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महाराष्ट्र में मराठी नहीं जानने वाले ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों पर सख्ती, नहीं सीखी भाषा तो लाइसेंस-बैज पर कार्रवाई

Maharashtra News | Bureau Report Akash Dhake | Khabar 24 Express


महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले उन ड्राइवरों के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें मराठी भाषा का कामचलाऊ ज्ञान नहीं है। राज्य सरकार ने ऐसे ड्राइवरों के खिलाफ अभियान शुरू करने का फैसला किया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि पहले ड्राइवरों को नोटिस देकर मराठी सीखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी तय समय में भाषा का आवश्यक ज्ञान हासिल नहीं करने वालों के लाइसेंस और बैज पर कार्रवाई की जा सकती है।

राज्य में 20 अगस्त से इस संबंध में विशेष अभियान शुरू किया गया है, जो एक महीने तक चलने की बात कही गई है। इस दौरान ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की जांच की जाएगी कि उनके पास मराठी भाषा का ‘वर्किंग नॉलेज’ यानी कामकाज के लिए जरूरी स्तर का ज्ञान है या नहीं।

पहले नोटिस, फिर 3 महीने का मौका

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, जिन ड्राइवरों को मराठी भाषा का कामचलाऊ ज्ञान नहीं होगा, उन्हें पहले नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें मराठी सीखने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा।

यदि इसके बावजूद संबंधित चालक आवश्यक स्तर तक मराठी नहीं सीखता है, तो उसके लाइसेंस और बैज को सस्पेंड करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

इस अभियान की निगरानी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ करेंगे। पूरे महाराष्ट्र में अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमें नियमों के पालन की जांच करेंगी।

RTO की फ्लाइंग स्क्वॉड करेगी जांच

अभियान के तहत RTO की फ्लाइंग स्क्वॉड अलग-अलग इलाकों में ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच करेगी। अधिकारियों द्वारा ड्राइवरों से बातचीत कर यह देखने की कोशिश की जाएगी कि उन्हें मराठी भाषा का कितना ज्ञान है।

जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वेरिफिकेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने की भी बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना बताया जा रहा है।

‘वर्किंग नॉलेज’ को लेकर ड्राइवरों में चिंता

हालांकि सरकार के फैसले के बाद ड्राइवर संगठनों के बीच कुछ सवाल भी उठने लगे हैं। सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी का कहना है कि सरकार ने मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ जरूरी तो कर दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर ड्राइवर को भाषा का कितना ज्ञान होना चाहिए।

उनका कहना है कि नियमों की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने पर जांच के दौरान मनमानी, भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका बढ़ सकती है।

महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आकर काम कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे हैं जिन्हें मराठी बिल्कुल नहीं आती या वे केवल कुछ सामान्य शब्द ही समझ और बोल पाते हैं। ऐसे ड्राइवरों के बीच लाइसेंस और बैज पर कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

महाराष्ट्र में लाखों ऑटो और टैक्सियां

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां संचालित होती हैं। इनमें बड़ी संख्या मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR में चलती है।

सरकार करीब 6 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है। मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, कुछ महीने पहले शुरू किए गए अभियान से अब तक 1,65,601 ड्राइवर जुड़ चुके हैं।

सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान होने से यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद बेहतर होगा और कामकाज में आसानी होगी।

खुद ऑटो चलाते थे परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक

इस फैसले के बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अपनी जीवन यात्रा भी चर्चा में है। राजनीति में आने से पहले वह ठाणे की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण शुरुआती दिनों में उन्होंने अगरबत्ती और कैलेंडर बेचने का काम भी किया।

बाद में उन्होंने रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी कारोबार में कदम रखा। वर्तमान में वह शिंदे गुट की शिवसेना के विधायक और महाराष्ट्र सरकार में परिवहन मंत्री हैं।

रामदास आठवले ने ड्राइवरों को और समय देने की मांग की

केंद्रीय मंत्री और RPI(A) प्रमुख रामदास आठवले ने इस मुद्दे पर ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को राहत देने की बात कही है। उनका कहना है कि जो ड्राइवर मराठी सीखने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

आठवले के अनुसार, मराठी नहीं जानने वाले ड्राइवरों पर तुरंत कठोर कार्रवाई या परमिट रद्द करने जैसे कदम उठाने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस मामले में संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।

अब महाराष्ट्र में शुरू हुआ यह अभियान कितना प्रभावी साबित होगा और ‘वर्किंग नॉलेज ऑफ मराठी’ की स्पष्ट परिभाषा क्या होगी, इस पर सबकी नजर रहेगी। खासतौर पर दूसरे राज्यों से आकर महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चलाने वाले लाखों ड्राइवरों के लिए आने वाले तीन महीने बेहद अहम माने जा रहे हैं।


Bureau Report Akash Dhake, Mumbai


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