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राजस्थान निकाय चुनाव का बिगुल बजा: 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे; प्रदेश में लागू हुई आचार संहिता

Rajasthan Local Body Elections | Bureau Report Jagdish Teli | Khabar 24 Express


राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी तेज होने वाली है। राज्य में निकाय चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव दो चरणों में कराए जाने प्रस्तावित हैं, जिसमें 9 और 11 सितंबर को मतदान होगा, जबकि 14 सितंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आचार संहिता लागू हो गई है। बताया जा रहा है कि इस चुनाव में करीब 1 करोड़ 44 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। निकाय चुनाव को लेकर अब भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों की रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय समीकरणों पर सबकी नजर रहेगी।

दो चरणों में होगा मतदान

घोषित कार्यक्रम के अनुसार निकाय चुनाव दो चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। पहले चरण के लिए 9 सितंबर को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।

दोनों चरणों का मतदान पूरा होने के बाद 14 सितंबर को मतगणना की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम आने की उम्मीद है। चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

करीब 1 करोड़ 44 लाख मतदाता करेंगे फैसला

इस निकाय चुनाव में करीब 1 करोड़ 44 लाख मतदाता मतदान कर सकते हैं। शहरी क्षेत्रों की राजनीति में निकाय चुनाव को बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसका सीधा असर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों की पकड़ और आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ता है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह चुनाव केवल नगर निकायों में सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं, बल्कि जनता के बीच अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा अवसर भी होगा।

भजनलाल शर्मा सरकार के लिए अहम परीक्षा

राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार बनने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच भाजपा की पकड़ कितनी मजबूत हुई है, इसका संकेत निकाय चुनाव के नतीजों से मिल सकता है।

भाजपा के सामने उम्मीदवार चयन से लेकर स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बनाने तक बड़ी चुनौती होगी। पार्टी की कोशिश होगी कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ चुनाव मैदान में उतरा जाए।

वसुंधरा राजे की भूमिका पर भी रहेगी नजर

राजस्थान भाजपा की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। निकाय चुनाव के दौरान एक बार फिर उनकी सक्रियता और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

राजस्थान के कई इलाकों में वसुंधरा राजे का अपना मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में चुनाव प्रचार और उम्मीदवारों के समर्थन में उनकी भूमिका किस तरह सामने आती है, यह भाजपा की आंतरिक राजनीति के लिहाज से भी अहम होगा।

कांग्रेस के सामने भी बड़ी चुनौती

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व और कांग्रेस संगठन की रणनीति भी इस चुनाव में परीक्षा के दौर से गुजरेगी। विधानसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए शहरी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक ताकत को दोबारा मजबूत करने का बड़ा मौका हो सकता है।

कांग्रेस की कोशिश होगी कि स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर भाजपा सरकार को घेरा जाए। महंगाई, विकास कार्य, शहरी सुविधाएं और स्थानीय प्रशासन जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार में अहम बन सकते हैं।

स्थानीय चुनाव, लेकिन बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर

भले ही यह चुनाव नगर निकायों के लिए हो, लेकिन राजस्थान की राजनीति में इसका असर प्रदेश स्तर तक दिखाई दे सकता है। भाजपा के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार और संगठन की रणनीति की परीक्षा होगी, वहीं कांग्रेस के लिए अशोक गहलोत समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव का आकलन होगा।

इसके साथ ही वसुंधरा राजे की राजनीतिक सक्रियता और राजस्थान भाजपा में उनके प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं तेज रह सकती हैं।

आचार संहिता लागू, राजनीतिक गतिविधियां तेज

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव आयोग के नियमों के तहत प्रचार करना होगा।

आने वाले दिनों में टिकटों की घोषणा, बागियों की नाराजगी, स्थानीय नेताओं के समीकरण और चुनावी प्रचार राजस्थान की राजनीति को और गर्माएंगे। 9 और 11 सितंबर को होने वाला मतदान और 14 सितंबर को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि शहरी राजस्थान में किस राजनीतिक दल की पकड़ सबसे मजबूत है।

राजस्थान निकाय चुनाव अब केवल नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है। यह चुनाव भजनलाल शर्मा सरकार, भाजपा के संगठन, वसुंधरा राजे की राजनीतिक भूमिका और अशोक गहलोत की कांग्रेस के लिए भी एक अहम राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है।


Bureau Report : Jagdish Teli, Rajasthan


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