Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / Congress में अब कांग्रेसी नहीं बचे, अपने ही बढ़ा रहे मुश्किलें; थरूर के बाद आनंद शर्मा, कमलनाथ व मनीष तिवारी चले भाजपा की राह

Congress में अब कांग्रेसी नहीं बचे, अपने ही बढ़ा रहे मुश्किलें; थरूर के बाद आनंद शर्मा, कमलनाथ व मनीष तिवारी चले भाजपा की राह

Exclusive Report | Manish Kumar Ankur | Khabar 24 Express

  • कांग्रेस में ‘अपने ही विरोधी’? थरूर के बाद आनंद शर्मा, कमलनाथ और मनीष तिवारी के सुर बदले
  • बढ़ीं पार्टी की मुश्किलें,
  • मोदी सरकार की तारीफ करने लगे कांग्रेस के दिग्गज नेता
  • पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी ने बढ़ाई अंदरूनी कलह


नई दिल्ली | Khabar 24 Express : कांग्रेस पार्टी इन दिनों अंदरूनी मतभेदों की आग में जलती नजर आ रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी के ही बड़े नेता अब उसकी आधिकारिक लाइन से अलग बयान देकर मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में शशि थरूर के बाद आनंद शर्मा, कमलनाथ और मनीष तिवारी जैसे वरिष्ठ नेता भी केंद्र की मोदी सरकार के समर्थन में बोलते नजर आए हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि कांग्रेस के भीतर अब ‘कांग्रेसी विचारधारा’ कमजोर पड़ती जा रही है और नेता खुलकर अपनी अलग लाइन लेने लगे हैं। इससे पार्टी की साख और रणनीति दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


मोदी सरकार की तारीफ, कांग्रेस की बढ़ी परेशानी

वैसे तो अच्छे कार्यों की तारीफ होनी चाहिए। भाजपा की मोदी सरकार जिस तरह से देशहित में काम कर रही है उसे लेकर सभी पार्टियों के नेता इस बात को जरूर मानते हैं, “अगर मोदी न होते तो देश का क्या होता।”

कांग्रेस जहां एक ओर पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता उसी सरकार की नीतियों की सराहना करते दिख रहे हैं।

आनंद शर्मा ने सोशल मीडिया पर भारत की कूटनीतिक रणनीति को “समझदारी भरा” बताया, जबकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एलपीजी संकट को “राजनीतिक माहौल” करार दिया। इसके अलावा सांसद मनीष तिवारी ने भी एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि सरकार इस मुद्दे पर “संभवतः सही काम कर रही है।”


थरूर से शुरू हुआ विवाद, अब बढ़ती जा रही लिस्ट

इस पूरे विवाद की शुरुआत शशि थरूर के बयान से मानी जा रही है, जिन्होंने पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के रुख को “जिम्मेदारी भरा” बताया था। उन्होंने साफ कहा कि “चुप्पी कायरता नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हितों को समझने की जरूरत है।”

अब लगातार अन्य नेताओं के ऐसे बयान सामने आने से कांग्रेस के अंदर असहमति खुलकर सामने आ गई है।


राहुल-खरगे के बयान से उलट सुर

एक तरफ राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केंद्र सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा संकट को लेकर तीखे हमले कर रहे हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में कहा कि आने वाले समय में ईंधन संकट गंभीर रूप ले सकता है और इसके पीछे सरकार की गलत विदेश नीति जिम्मेदार है।

लेकिन पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं के अलग रुख ने कांग्रेस की रणनीति को कमजोर कर दिया है और विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


क्या कांग्रेस में ‘कांग्रेस’ बची है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और विचारधारा को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई दिग्गज नेता पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं और जो बचे हैं, उनमें भी खुलकर मतभेद सामने आ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कांग्रेस अपने ही नेताओं की इस बयानबाजी पर कार्रवाई करती है, तो पार्टी में बचेगा कौन?


और अंत में….

कांग्रेस के लिए यह समय सबसे बड़ी परीक्षा का है। एक ओर सत्ता से दूरी, दूसरी ओर अंदरूनी कलह—इन दोनों के बीच पार्टी की पकड़ लगातार कमजोर होती दिख रही है। अगर जल्द ही संगठन और नेतृत्व स्तर पर सख्त फैसले नहीं लिए गए, तो आने वाले समय में कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


Exclusive Report : Manish Kumar Ankur

Tags:
congress internal conflict, shashi tharoor statement, anand sharma on modi, kamal nath latest news, manish tiwari statement, congress vs bjp, rahul gandhi news, kharge statement, india middle east policy, political news hindi


Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

“कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी”

"कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी"

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Subscribe