नागपुर के नरेंद्र नगर में हालात अब “असुविधा” नहीं बल्कि खुलेआम प्रशासनिक अपराध जैसे हो चुके हैं। यहां लोगों के घरों में नलों से पीने का पानी नहीं, बल्कि टॉयलेट का बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है। हर घर में डर है—कहीं अगला मरीज उनका बच्चा न बन जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
जब जनता गंदा पानी पीने को मजबूर है, तब उनके चुने हुए प्रतिनिधि कहां हैं?
एक हफ्ते से ज़्यादा समय, लेकिन समाधान शून्य
नवनाथ सोसायटी और मस्के लेआउट जैसे रिहायशी इलाकों में पिछले एक हफ्ते से लगातार दूषित जलापूर्ति हो रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शिव मंदिर के पास करीब 25 साल पुरानी सीवेज पाइपलाइन में लीकेज हुआ। मरम्मत के नाम पर खुदाई तो की गई, लेकिन उसी दौरान पेयजल की पाइपलाइन भी तोड़ दी गई।
नतीजा यह कि अब नलों से ऐसा पानी आ रहा है, जिसे देखकर कोई हाथ तक धोना न चाहे।
शिकायतें होती रहीं, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें मूंद लीं
नागरिकों ने धंतोली जोन कार्यालय में बार-बार शिकायतें कीं।
कहीं गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए, कहीं पाइपलाइन खुली पड़ी है।
इलाके के लोग पूछ रहे हैं—
क्या शिकायत सिर्फ रजिस्टर भरने के लिए होती है, समाधान के लिए नहीं?
जीत के बाद जश्न, जनता की पीड़ा से दूरी
चुनाव से पहले बड़े भरोसे से कहा गया था “जीतने के बाद सारी समस्याएं दूर कर दूंगा।”
लेकिन आज हालात यह हैं कि नवनिर्वाचित नगरसेवक Ramesh Bhandari पर आरोप है कि वे जीत के बाद इलाके में सिर्फ जश्न मनाने आए, जनता की समस्याएं सुनने नहीं।
नरेंद्र नगर के लोग सीधे सवाल कर रहे हैं अगर यही जनसेवा थी, तो वोट क्यों मांगा गया?
संदीप गवई की भूमिका पर भी उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर फैसले लेने वालों में Sandeep Gawai की भूमिका को लेकर भी नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है।
लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखने के बावजूद इलाके की गंभीर समस्या को नजरअंदाज किया गया।
यह सवाल अब सिर्फ पानी का नहीं रहा,
यह सवाल जवाबदेही और संवेदनहीनता का बन चुका है।
अधिकारी बोले – “जल्द करेंगे”, लेकिन जनता पूछ रही है – “कब?”
मनपा अधिकारियों का दावा है कि मुख्य सीवेज लाइन में लीकेज है, नया चेंबर बनाया जा रहा है, गड्ढे में पानी भर जाने से काम रुका है।
लेकिन नरेंद्र नगर की जनता का सीधा सवाल है क्या हमारी सेहत, तकनीकी बहानों से सस्ती है?
इस्तीफे का वादा याद है या नहीं?
चुनाव के वक्त कहा गया था “अगर काम नहीं किया तो इस्तीफा दे दूंगा।” आज जब नलों से ज़हर जैसा पानी आ रहा है, तो नरेंद्र नगर की नवनाथ सोसाइटी पूछ रही है वो वादा अब कहां गया?
4 दिन बाद एक टैंकर भेजने से क्या समस्या का हल हो जाएगा। या नगरसेवक सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। हम समझते हैं कि नवनिर्वाचित नगरसेवक हैं। अभी महापौर भी नहीं बना है। लेकिन नगरसेवक वो भी भाजपा के NMC पर दबाव तो बना सकते हैं। ये याद रखें कि प्रदेश में भाजपा की ही सरकार है।
यह सिर्फ एक इलाके की नहीं, पूरे शहर की चेतावनी है
अगर आज नरेंद्र नगर चुप रहा, तो कल नागपुर का कोई और इलाका होगा।
यह खबर सिर्फ जानकारी नहीं, यह चेतावनी है उन सभी के लिए जो जीत के बाद जनता को भूल जाते हैं।
नरेंद्र नगर के लोगों को कब साफ पानी मिलेगा या यह मुद्दा भी फाइलों में दबा दिया जाएगा यह देखना बाकी है।
खबर 24 एक्सप्रेस इस मुद्दे पर हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा, क्योंकि सवाल पूछना ही असली जनसेवा है।
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