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Egoz Egg Controversy: क्या पैक वाले अंडों में कैंसर का जहर? लैब रिपोर्ट से देश में हड़कंप

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आज की यह रिपोर्ट सिर्फ अंडों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे आपके किचन, आपकी थाली और आपके बच्चों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।

भारत में पहली बार किसी बड़े प्रीमियम एग ब्रांड Egoz पर ऐसे आरोप लगे हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर फूड सेफ्टी सिस्टम तक हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक NABL मान्यता प्राप्त लैब रिपोर्ट में दावा किया गया कि Egoz के पैक वाले अंडों में Nitrofurans नामक प्रतिबंधित एंटीबायोटिक और उसका मेटाबोलाइट AOZ पाया गया है। यह वही रसायन है, जिसे दुनिया के कई देशों में कैंसर के संभावित खतरे की वजह से बैन किया जा चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक अंडों में AOZ की मात्रा करीब 0.73–0.74 µg/kg (पार्ट्स पर बिलियन) पाई गई। मात्रा सुनने में भले ही बहुत कम लगे, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि कैंसरकारी तत्वों के लिए “कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं” मानी जाती।

प्रीमियम अंडों का बदलता बाज़ार

पिछले कुछ वर्षों में भारत में अंडों का बाज़ार पूरी तरह बदल चुका है। कभी खुले में बिकने वाले अंडे आज सुपरमार्केट की चमचमाती रैक्स में “प्रीमियम”, “हर्बल फीड”, “एंटीबायोटिक-फ्री” जैसे टैग के साथ बिक रहे हैं।
इन्हीं दावों पर भरोसा कर लाखों उपभोक्ता Egoz जैसे ब्रांड चुन रहे थे।

Egoz की शुरुआत IIT खड़गपुर के तीन छात्रों ने की थी। 2017 के बाद इस स्टार्टअप ने तेज़ी से विस्तार किया, करोड़ों की फंडिंग जुटाई और दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद समेत करीब 11 बड़े शहरों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

लैब टेस्ट और विवाद की शुरुआत

विवाद तब शुरू हुआ जब एक यूट्यूब चैनल ने बाजार से Egoz के अंडों के पैकेट खरीदे और उन्हें NABL मान्यता प्राप्त लैब में टेस्ट कराया। रिपोर्ट में Nitrofurans और AOZ की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवालों की बाढ़ आ गई—

  • क्या अंडे DNA बदल सकते हैं?
  • क्या बच्चों में म्यूटेशन का खतरा है?

DNA को लेकर क्या सच है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अंडा खाने से इंसान का DNA सीधे तौर पर नहीं बदलता। खाने में मौजूद DNA और RNA शरीर पचा देता है।
लेकिन असली खतरा है Genotoxicity का—यानी ऐसे रसायन जो DNA को नुकसान पहुंचा सकते हैं, उसमें टूट-फूट या गलतियां पैदा कर सकते हैं। लंबे समय में यही सेल डैमेज कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

पोल्ट्री फार्मिंग और एंटीबायोटिक का खतरा

Centre for Science and Environment (CSE) की रिपोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि भारत के कई पोल्ट्री फार्मों में बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में एक मामूली फूड इंफेक्शन भी जानलेवा साबित हो सकता है।

Egoz का पक्ष

Egoz के संस्थापक अभिषेक नेगी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि कंपनी

  • 100% हर्बल फीड का इस्तेमाल करती है
  • किसी भी तरह के एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं होता
  • सख्त सेफ्टी और क्वालिटी चेक अपनाए जाते हैं

कंपनी ने अपनी ओर से कुछ लैब रिपोर्ट्स भी सार्वजनिक की हैं।

फिर सवाल क्यों कायम है?

सबसे बड़ा सवाल यही है—
अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है, तो प्रतिबंधित दवा का मेटाबोलाइट अंडों में आया कैसे?

दरअसल, Nitrofurans एक सस्ता और बेहद प्रभावी एंटीबायोटिक है, जिसे मुर्गियों को तेजी से बढ़ाने और बीमारियों से बचाने के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता रहा है। भारत के कई पोल्ट्री फार्मों में भीड़, गंदगी और संक्रमण के खतरे के चलते कुछ किसान इसे चुपचाप चारे में मिला देते हैं। यह दवा शरीर में जाकर AOZ में बदल जाती है, जो अंडों और मांस में लंबे समय तक जमा रह सकती है।

FSSAI के नियम और उलझन

यहां एक और अहम बात सामने आती है।
FSSAI एक ओर Nitrofurans के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाता है, वहीं टेस्टिंग के दौरान इसकी टॉलरेंस लिमिट 1.0 µg/kg तक मान्य करता है। रिपोर्ट के मुताबिक Egoz के अंडे इस सीमा के भीतर पाए गए हैं।

यही वजह है कि मामला अब सिर्फ ब्रांड तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि फूड सेफ्टी नियमों और उनकी सख्ती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नतीजा क्या निकलता है?

Egoz एग विवाद ने यह साफ कर दिया है कि “हेल्दी” और “प्रीमियम” का टैग अब आंख बंद करके भरोसा करने की गारंटी नहीं है।
यह सवाल सिर्फ Egoz का नहीं है, बल्कि पूरी उस व्यवस्था का है, जो हमारी थाली तक पहुंचने वाले खाने की निगरानी करती है।

अब ज़रूरत है पारदर्शिता, सख्त निगरानी और ऐसे नियमों की, जिन पर उपभोक्ता बिना डर के भरोसा कर सकें—क्योंकि मामला सिर्फ स्वाद या ब्रांड का नहीं, सेहत और भविष्य का है।


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