
रिपोर्ट : मनीष कुमार अंकुर | Khabar 24 Express News Desk : देश में उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 संपन्न हो चुका है। इसमें एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने जीत दर्ज की है। लेकिन यह जीत उतनी बड़ी नहीं रही जितनी 2022 में मिली थी। खैर जीत तो जीत होती है। जो NDA के संयुक्त उम्मीदवार को मिली।
वहीं विपक्ष के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने हार स्वीकार की, फिर भी INDIA गठबंधन को पिछली बार की तुलना में अपने वोट शेयर को बढ़ाकर राजनीतिक चर्चा में जगह बनाई है। चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि एनडीए भले ही जीत गया हो, लेकिन विपक्ष ने चुनौती देने की क्षमता में बढ़त हासिल की है।
मतदान का पूरा विवरण
- कुल सांसदों ने मतदान किया: 767
- वैध वोट: 752
- अवैध वोट: 15
- एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को मिले: 452 वोट
- विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को मिले: 300 वोट
- जीत का अंतर: 152 वोट
2022 के मुकाबले घटा जीत का मार्जिन
साल 2022 में उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ ने 725 वैध वोटों में से 528 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को मात्र 182 वोट मिले थे। उस चुनाव में एनडीए का जीत का अंतर 346 वोट का था।
वहीं इस बार सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्ष को 300 वोट यानी जीत का मार्जिन घटकर 152 वोट रह गया। आंकड़ों से स्पष्ट है कि एनडीए का प्रभुत्व बना हुआ है, लेकिन विपक्ष ने पिछली बार की तुलना में वोट शेयर बढ़ाकर 26% से 40% तक पहुँचाया है। यह विपक्ष की राजनीतिक ताकत में वृद्धि का संकेत है।
जयराम रमेश का बयान “यह भाजपा की नैतिक और राजनीतिक हार”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव परिणामों को विपक्ष के लिए सम्मानजनक बताया। उन्होंने कहा:
- विपक्ष ने इस बार एकजुट होकर मतदान किया।
- साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने 40% वोट शेयर हासिल किया।
- 2022 में विपक्ष को सिर्फ 26% वोट मिले थे।
- यह जीत नहीं, बल्कि भाजपा की नैतिक और राजनीतिक हार है।
- वैचारिक संघर्ष जारी रहेगा।
अवैध वोटों ने बढ़ाई राजनीति की बहस
चुनाव में 15 अवैध वोट सामने आए हैं। मतदान से पहले विपक्ष ने सांसदों के लिए मॉक पोल आयोजित कर मतदान की प्रक्रिया समझाई थी ताकि कोई वोट अमान्य न हो। बावजूद इसके इतने बड़े स्तर पर अवैध वोट मिलने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या विपक्ष पूरी तरह एकजुट नहीं रहा? या फिर किसी स्तर पर रणनीतिक चूक हुई?
यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का मुख्य बिंदु बनेगा।
विपक्ष की रणनीति – हार के बावजूद दिखा आत्मविश्वास
चुनाव हारने के बावजूद विपक्ष ने अपने वोट शेयर में बढ़त हासिल कर यह संदेश दिया है कि वह आगामी चुनावों में अधिक संगठित होकर सत्ता को चुनौती देने की कोशिश करेगा।
* 2022 में 26% वोट → 2025 में 40% वोट
* अनुशासन की कोशिशें बढ़ीं
* मॉक पोल से सांसदों को तैयार किया गया
* वैचारिक संघर्ष पर जोर दिया गया
हालांकि जीत एनडीए की हुई, लेकिन विपक्ष ने यह साबित किया कि वह अपनी स्थिति सुधारने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।
दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से – क्षेत्रीय राजनीति का असर
इस बार चुनाव की एक दिलचस्प पहलू यह रही कि दोनों प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं:
- सीपी राधाकृष्णन – तमिलनाडु, ओबीसी समुदाय, आरएसएस की पृष्ठभूमि
- बी. सुदर्शन रेड्डी – तेलंगाना, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश
यह न केवल क्षेत्रीय संतुलन का संकेत है, बल्कि दक्षिण भारत की राजनीति में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। इससे देश की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरणों का महत्व और स्पष्ट हुआ है।
कौन-कौन शामिल हुआ मतदान में?
इस चुनाव में देश के शीर्ष नेता मतदान केंद्र तक पहुँचे।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले मतदान करने पहुंचे।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, समाजवादी नेता राम गोपाल यादव, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश, और कई अन्य नेताओं ने मतदान किया।
- 92 वर्षीय देवेगौड़ा व्हीलचेयर पर मतदान केंद्र पहुँचे।
- मल्लिकार्जुन खरगे और नितिन गडकरी साथ-साथ मतदान करने पहुँचे।
- जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद ने भी मतदान में हिस्सा लिया।
क्रॉस वोटिंग का डर – क्या विपक्ष अनुशासन कायम रख पाएगा?
क्रॉस वोटिंग भारतीय राजनीति में हमेशा से चर्चा का विषय रही है।
- 2017 के उपराष्ट्रपति चुनाव में कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग हुई थी।
- 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में असम और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में विपक्षी सांसदों ने पार्टी लाइन तोड़ी थी।
- इस बार विपक्ष ने मॉक पोल कर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन 15 अवैध वोट सामने आने से सवाल उठे हैं।
निष्कर्ष – जीत एनडीए की, पर विपक्ष की चुनौती बढ़ी
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 में एनडीए ने जीत हासिल की, लेकिन पिछली बार की तुलना में उसका मार्जिन घट गया। विपक्ष ने हार के बावजूद अपने वोट शेयर में वृद्धि कर राजनीतिक रूप से मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आंकड़ों से साफ है कि आने वाले चुनावों में यह संघर्ष और तेज होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह चुनाव सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव का नया अध्याय है। एनडीए ने संख्या बल बनाए रखा है, जबकि विपक्ष ने संगठन और रणनीति में सुधार कर भविष्य के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
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