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Home / Breaking News / World toilet day विश्व शौचालय दिवस 19 नवंबर पर ज्ञान कविता इस विषय पर अपने सामाजिक ज्ञान और अभिव्यक्ति को अपनी कविता के माध्यम से स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी इस कहते है कि,

World toilet day विश्व शौचालय दिवस 19 नवंबर पर ज्ञान कविता इस विषय पर अपने सामाजिक ज्ञान और अभिव्यक्ति को अपनी कविता के माध्यम से स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी इस कहते है कि,

संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के अनुसार हर साल 19 नवंबर को
विश्व शौचालय दिवस (World Toilet Day) मनाया जाता है।World Toilet Day 2020 की Theme Sustainable Sanitation and Climate Change (क्लाइमेट सैनिटेशन एंड क्लाइमेट चेंज) है, जिसे हिंदी में “स्वीकार्य स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन” कहा जा सकता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत विश्व शौचालय संगठन द्वारा वर्ष 2001 में की गई थी।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य का निष्कर्ष ये है कि

अधिकतर जिन धनी लोगों की शौचालयों तक जाने की आसानी से पहुंच हैं वे इसकी अपने को छोड़कर अन्य जनसाधरण लोगों की स्वच्छता के जीवन मूल्य के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं। ऐसे लोग स्वयं को वैचारिक राहत देने और केवल बस अपने मल को दूर करने के लिए इसे मात्र एक जगह के रूप में देखते हैं। लेकिन दुनिया भर में 2.4 अरब लोग है, जिनके पास बुनियादी शौचालय की सुविधा बहुत कम और बिलकुल भी नहीं है, उनके लिए इसका मतलब इससे बहुत अधिक जीवन उपयोग है।वैसे तो सभी देश की सरकार इस दिशा में विभिन्न प्रयासों से योगदान दे रही है।हमारी भारत सरकार ने भी ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत प्रत्येक घर के लिए शौचालय बनाने की योजना बनाई है। पर अभी भी कई लोग विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे खुले में शौच जाने के कारण बीमारियों से पीड़ित हैं।

विश्व शौचालय दिवस इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए हम सबको सबसे अच्छा मंच प्रदान करता है और साथ ही सभी लोगों को इस शौचालय सम्बन्धित सभी कारणों के लिए अपना अनेक प्रकार से वैचारिक ओर प्रयोगवादी योगदान करने में मदद करता है।

विश्व शौचालय दिवस पर कविता इस प्रकार से है कि,,

विश्व आबादी बढ़ रही दिन दर
ओर जीवन के तीन आवश्यक अंग।
खाना सोना शोच दिनचर्या
मनुष्य जीव का नित शौच अंतरंग।।
अष्टांग योग में शौच विशेष बल
अंतर बहिर दो प्रमुख शौच।
जैसे शरीर को भोजन ओर मल
दोनों स्वस्थ दीर्घ जीवन हो पहोंच।।
भूमि कम और मनुष्य अधिक है
शौच सभी जीवन है मुख्य।
आधे से अधिक आबादी नहीं है
शौच व्यवस्था का घर में सुख्य।।
गांव खत्म हो रहे सब धीरे धीरे
बढ़ रहे शहर जगहां है कम।
शौच व्यवस्था ध्वंश हो रही
खुले में ओट नहीं रही हम।।
एक बार को पुरुष कर सकते
स्त्री बच्चे खुले करें न शौच।
उन्हें सुरक्षा अति जरूरी
चाहे सामूहिक हो या एक करें शौच।।
कम भूमि पे शौच अधिक कर
दूषित होती वो नित भूमि।
संक्रमित होकर दस्त रोग हो
शौच व्यवस्था नहीं संचारित भूमि।।
नदी न पोखर शौच साफ को
न साफ मिले अधिक पानी।
गंदे जल से शौच को धोकर
बन रोगी खोते जीवन हानि।।
यो घर में व्यवस्था करो शौच की
गड्ढे गहरे बना कर टैंक।
सरकार दे रही बना बनवाने
शौचालय को सहज ऋण बैंक।।
घर बनवाओ तो करो व्यवस्था
सबसे मुख्य है शौचालय।
शौच का दूषित पानी जाए
शहर बाहर तक जलतालय।।
जल निकास व्यवस्था नली को
स्वयं ओर सहयोग दें साफ रखों।
सहयोग ही इसका समाधान सब
मिल इस भविष्य विषय पर ध्यान रखों।।
मनुष्य दिनचर्या खराब बहुत है
यो शौच बन गयी मुख्य रोग।
भोजन लज़ीज खराब पेट कर
नित स्वास्थ करो सही कर योग।।
आओ विश्व शौचालय दिवस पर
शौच व्यवस्था पर दें ध्यान।
अपने संग ओर मनुष्य की सोचे
सहयोग सरकार दें शौचालय ज्ञान।।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
Www.satyasmeemission.org


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