
कोणासन के नाम से ही बता चलता है कि,शरीर के विभिन्न अंगों को किसी एक एंगल यानी पोजिशन में ताने रखने की अनेको मुद्राओं का अभ्यास करना है। आओ करें अभ्यास –

कोणासन की सही विधि:-
वैसे तो अनेक प्रकार के कोणासन किये जाते है,जिनमें यहां में दो प्रकार के कोणासनों को करके बताता हूं।
कोणासन को आसनों में सहायक आसन यानी उपासन माना गया है। जो बड़े उपयोगी सिद्ध होता है और कठिन भी।इस कोणासन में अपने योग मेट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और अपने दोनों पैरों को मिला दें,अब अपने दोनों की हथेलियों को जमीन पर टिकाते हुए साथ ही एक गहरा सांस भरते हुए अपने हाथों और एङियो पर जोर देते हुए कमर ओर हिप्स को ऊपर आकाश की ओर उठायें, गर्दन को पीछे की ओर मोड़ दें, एङियां पंजे मिले हुए रहे, और दोनों पांवों का पुरा तलवा भुमि पर छूता रहे,आपके दोनों बाजू कोहनियों सहित बिलकुल सीधे रहे, आपका सीना ऊपर को ओर तना हुए उठा हुआ हुआ।

दूसरी विधि:-
अपने योग मेट पर पेट के बल सीधे लेट जाएं व दोनों पैर बिलकुल सीधे रहे और अब दोनों हाथों से दंड लगाने की पोजिशन में ऊपर को उठ जाये, अपने हिप्स ओर जांघ से पैर के पंजो तक बिलकुल तान कर सीधा रखें,अब आपका जो स्वर चल रहा हो,उसी स्वर की साइड के विपरीत की साइड के हाथ को जमीन पर सीधा ही टिका कर रखते हुए स्वर वाली साइड के हाथ को हथेलियो ओर उंगलियों को खोलते हुए आकाश की ओर बिलकुल सीधा कर दें,तब आपके शरीर का सारा भार एक हाथ पर ओर एक पैर पर हो जाएगा,इसमे नीचे की साइड के पेर के ऊपर दूसरा पैर को रखते हुए बेलेंस बनाना होता है।

इसी मुद्रा में प्रारम्भ में 10 सेकेंड से शुरू करते हुए 20 सेकेंद्र तक बने रहते हुए 5 से 10 बार तक गहरे सांस ले और मूलबंध भी लगाये ओर सांस छोड़ते में ढीला करते और सांस लेते में टाइट करते रहे। यहां उड़ियांबन्ध व जलंधरबन्ध नही लगता है।और धीरे से सांस छोड़ते रहा करें।
इस कोणासन की मुद्रा को पूरा करके कुछ देर विश्राम करें और फिर ठीक ऐसे ही दूसरी साइड से कोणासन करें।
इस प्रकार से दोनों साइड से एक एक बार यानी दो बार की कोणासन करना चाहिए,बार बार बिलकुल भी नहीं करें।
तभी स्ट्रेंथ ओर स्टेमिना ओर मन चित्त की एकाग्रता और शांति की प्राप्ति के साथ अनेक रोग ठीक होते है।

कोणासन के क्या क्या मुख्य लाभ होते है:-
कोणासन से कंधे गर्दन और भुजा कोहनी के जोड़ ओर हथेली व पंजे मजबूत होते हैं। पेट की सख्ती दूर होती है, बगल की यानी पसलियों की सभी मांसपेशियां ताकतवर होती है।मेरुदंड का जो तिरछापन होता है,वो ठीक होता है,सीने से लेकर पेट की ओर नाभि की दोनों साइड की हटी हुई नस-नाङियां अपनी असल स्थिति में आ जाती है जिससे सभी प्रकार के कब्जों की शिकायत बिलकुल खत्म होती है।

पूरे शरीर को खींच कर सीधा रखने में बहुत ही सहायता मिलती है।
कटिस्नायु शूल (साईटीका) के रोगियों को अद्धभुत लाभ मिलता है।
यूरिन में फंसी पथरी सहजता से आगे सरक कर बार बार मूलबंध लगाते रहने से बाहर निकल जाती है।पेशाब की कमजोरी और जनेन्द्रिय की कमजोरी ठीक होती है।अंडकोष ठीक होकर संतुलित होकर पुरुष का वीर्य व स्त्री का रज को शुद्ध व गाढ़ा ओर ज्यादा बनाते है,ताकि गृहस्थी जीवन मे आनन्द भर जाता है।
प्राण शक्ति मूलाधार चक्र तक पहुँचती ओर चढ़ती है।
!!यो करें कोणासन!!
!!रहे स्वस्थ करके रोग नाशन!!

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
महायोगी स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
www.satyasmeemission.org
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