

शादी, ब्याह, पार्टियों, धार्मिक आयोजन, तीज त्योहारों पर डीजे न बजें, ऐसा संभव नहीं है। यूपी ही नहीं बल्कि भारत के ज्यादातर हिस्से में डीजे बजते हैं और बजते ऐसे हैं कि जैसे डीजे बजाना उनकी बपौती हो। आवाज भी इतनी तेज कि कान के पर्दे फाड़ती हुई चली जाती है। दिल भी तेज़ धक धक वाला डांस करने लग जाता है।
डीजे बजाने वाले और बजवाने वाले तेज़ आवाज की प्रतिस्पर्धा सी करते हैं, उन्हें किसी से कोई मतलब नहीं होता, न किसी की परवाह, न ही कानून से, न ही लोगों से मतलब।
तेज़ आवाज से दिल का दौरा पड़ सकता है, सुनने की क्षमता कम हो सकती है, मानसिक रोग हो सकता है, आकस्मिक मृत्यु हो सकती है।

विशेषज्ञों व चिकित्सकों की मानें तो 100 डेसीबल तक की ध्वनि ही मनुष्य के लिए सुरक्षित रहती है। 125 डेसीबल से ऊपर की तेज आवाज खतरनाक हो जाती है। जबकि डीजे की सामान्य आवाज 580 डेसीबल से ज्यादा होती है।
इससे कान की परत फट सकती है। सबसे बुरा प्रभाव जन्म लेने वाले बच्चों पर पड़ता है। डीजे की तेज आवाज नवजात को बहरा, गूंगा तो बना ही देगी साथ ही मस्तिष्क पर भी इसका खतरनाक असर पड़ता है। गर्भ में पल रहे बच्चों में यह विभिन्न विकृति का कारण बन सकती है। शारीरिक व मानसिक विकास पर इसका गंभीर असर हो सकता है। डीजे की तेज आवाज को हृदय की समस्या के इजाफे का मुख्य कारण माना जाता रहा है। उच्च रक्तचाप, चिढ चिड़ापन, सर में चक्कर आना, नींद न आना, स्मृति पर बुरा असर होना जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती हैं।
तेज ध्वनि ज्ञानेंद्रियों को डीजे का साउंड बुरी तरह प्रभावित करती हैं, मस्तिष्क के तंत्र को बाधित करती हैं। इसका असर हृदय व रक्त प्रवाह पर पड़ता है।
लेकिन इस रोग को समझा है इलाहबाद हाइकोर्ट ने वो भी “सत्यास्मि मिशन” की एक याचिका पर।
सत्यास्मि मिशन की तरफ से सद्गुरु स्वामी सत्येंद्र जी महाराज ने तेज़ आवाज की कई बार स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद स्वामी जी ने शरण ली हाइकोर्ट की। स्वामी जी ने अपनी याचिका में कहा कि तेज़ आवाज के लिए मानक तय किये हुए हैं लेकिन लोग कानून का उलंघन करके तेज़ आवाज में डीजे बजाते हैं, आवाज इतनी तेज और तीखी होती है कि वो कान के पार चली जाती है। जिस जगह से भी डीजे गुजरता है घरों की दीवारों तक हिलने लग जाती हैं।
स्वामी जी के अनुसार तेज़ आवाज न केवल कानों के लिए खराब है बल्कि सेहत और बुरा असर डालती है।
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की तरफ से एडवोकेट सौरभ तयगी द्वारा लगाई याचिका पर संज्ञान लेते हुए यूपी के सभी जिलाधिकारियों को नोटिस दिया कि यदि कोई इस कानून का उलंघन करते पाया गया तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना, व 5 साल की कैद का प्रावधान होगा।
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्वामी जी की याचिका के साथ एक और ऐसी ही याचिका पर अपना फैसला दिया।
बता दें कि यदि कोर्ट के आदेश का सही पालन हुआ तो शादी-ब्याह, पार्टियों और त्योहारों पर तेज आवाज में डीजे बजाकर जश्न मनाना अब दुश्वार हो जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजे बजाने की अनुमति देने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है बच्चों, बुजुर्गों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों सहित मानव स्वास्थ्य के लिए ध्वनि प्रदूषण बड़ा खतरा है। कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को टीम बनाकर ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने और दोषियों पर सख़्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
माननीय कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। इसलिए सभी धार्मिक त्योहारों से पहले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बैठक कर कानून का पालन सुनिश्चित कराएं। कोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण कानून का उल्लंघन करने पर पांच साल की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत अपराध की प्राथमिकी दर्ज की जाए। कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी सभी संबंधित थानाध्यक्षों की होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रदेश के सभी शहरी इलाकों को औद्योगिक, व्यवसायिक और रिहायशी या साइलेन्स जोन के रूप में श्रेणीबद्ध करें। कोर्ट ने जिलाधिकारी को ध्वनि प्रदूषण की शिकायत सुनने वाले अधिकारी का फोन नंबर सहित अन्य ब्यौरा सार्वजनिक स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाकर देने का निर्देश दिया है। शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर जारी करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति ध्वनि प्रदूषण की शिकायत कर सकता है। हर शिकायत रजिस्टर पर दर्ज की जाए, साथ ही इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी दर्ज हो।
कोर्ट ने कहा है कि शिकायत दर्ज होते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर डीजे या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र बंद कराए और सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट करे ताकि दोषी पर कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने कहा है कि शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाए। अनाम शिकायत भी दर्ज हो। एसएमएस, व्हाट्सएप, ई-मेल आदि माध्यमों से या फोन से मौखिक मिली शिकायत भी दर्ज की जाए और संबंधित अधिकारी को सूचित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि आदेश की अवहेलना होने पर कोई भी व्यक्ति कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर कर सकता है। कार्रवाई न करने के लिए संबंधित थाना प्रभारी जवाबदेह माने जाएंगे। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी अधिकारियों को आदेश का पालन करने का निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
बता दें कि सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की तरफ से से लगाई गई याचिका में सत्यास्मि मिशन के एडवोकेट सौरभ त्यागी ने ध्वनि प्रदूषण कानून का कड़ाई से पालन करने की मांग की गई थी।
ध्वनि प्रदूषण को लेकर पहले से यह निर्देश और नियम तय हैं : –
– ध्वनि प्रदूषण कानून का उल्लंघन करने वाले पर प्राथमिकी दर्ज हो।
– त्योहारों से पहले अधिकारी बैठक कर ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाना सुनिश्चित करें।
– कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित थानाध्यक्षों की होगी।
– शहरी क्षेत्रों को औद्योगिक, व्यवसायिक और रिहायशी में श्रेणीबद्ध किया जाए।
– शिकायत सुनने के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया जाए।
– ऐसे अधिकारी का फोन नंबर और अन्य ब्यौरा सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करें।
– शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर जारी करें।
– शिकायतें एक रजिस्टर पर दर्ज हों और उन पर कार्रवाई की जाए।
– शिकायत मिलने पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे और शोर बंद कराए।
– शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाए, अनाम शिकायतें भी दर्ज हों।
– एसएमएस, व्हाट्सएप, ई-मेल से भी शिकायतें दर्ज हों।
– कार्रवाई न होने पर जनता का कोई भी आदमी अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है।
कौन है सत्यास्मि मिशन, और कौन हैं सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज?
सत्यास्मि मिशन एक संस्था है जो स्त्री उत्थान के लिए अनेक कार्य करती है, उनके अधिकारों के लिए लड़ती है। कुम्भ में शाही स्नान के लिए भी सत्यास्मि मिशन ने याचिका डाली थी जिसमें सत्यास्मि मिशन की जीत हुई। सत्यास्मि मिशन बहुत से कार्य करती है जो समाज व देश हित में होते हैं।
सत्यास्मि मिशन संस्था का निर्माण सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज ने करवाया था।
सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले हैं। एक धार्मिक गुरु हैं।
हर धर्म वर्ग के लोग सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज को मानते हैं, उनके विचारों पर चलते हैं।
देश में सैंकड़ों पूर्णिमाँ देवी के मंदिर हैं वे सभी सद्गुरु स्वामी सत्येंद्र जी महाराज के आवाह्न पर बनाये गए हैं। उन मंदिरों में जो पूर्णिमाँ माता की मूर्ती आपमें से बहुतों ने देखी होगी वे स्वामी जी के आश्रम “सत्य ॐ सिद्धाश्रम बुलंदशहर” से प्राण प्रतिष्ठित होकर आती हैं।
सद्गुरु स्वामी सत्येंद्र जी महाराज के अनुयायी उन्हें ईश्वर समान मानते हैं, अपने परम गुरु की संज्ञा देते हैं।
हर शनिवार, रविवार स्वामी जी के आश्रम में भक्तों का तांता लगता है। दूर-दूर से भक्त अपनी समस्याओं को लेकर स्वामी जी के पास आते हैं व अपने दुखों से मुक्ति पाते हैं।
तो अब आप समझ गए होंगे कि सद्गुरु स्वामी सत्येंद्र जी महाराज ने क्यों और किसलिए तेज़ आवाज़ में डीजे बजाने पर रोक के लिए याचिका दी होगी।
स्वामी जी एक स्वस्थ व खुशहाल समाज की कल्पना करते हैं, लोगों के अधिकारों के लिए सामने आते हैं।
सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की ओर से ऐसे ही अनछुए पहलुओं पर 5 और जनयाचिकायें हाईकोर्ट में दायर की गई हैं, जिन पर जल्दी ही हाईकोर्ट का आदेश पारित होगा।
यह भी देखें, स्वामी जी इससे पहले भी लोगों से तेज़ आवाज में डीजे न बजाने के लिए अपील कर चुके हैं :
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