
अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस (वर्ल्ड सीनियर सिटिज़ंस डे) का संछिप्त इतिहास के विषय मैं आपको बताता हूं,फिर कविता के रूप में बताऊंगा कि-
अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस का इतिहास 1988 के समय से है। यह आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने 19 अगस्त 1988 को 5847 की घोषणा पर हस्ताक्षर किए तब 21 अगस्त को राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के रूप में पेश किया गया। रोनाल्ड रीगन पहले राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस का प्रचार करने वाले पहले व्यक्ति थे।यहां नीचे उस घोषणा की व्याख्या की गई है:-
“उन सभी ने अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त किया हो और सभी के लिए हासिल करना जारी रखा हो,उसके लिए हम हमारे बुजुर्गों को धन्यवाद और दिल से नमस्कार करना चाहते हैं। हम यह सुनिश्चित करके संतुष्टि प्राप्त सकते हैं कि हमारे समाज में अच्छे स्थान हैं बुजुर्गों के अनुकूल हैं – जिन जगहों पर बुज़ुर्ग लोग पूरी तरह से अपने जीवन का आनंद उठा सकते हैं और जहाँ उन्हें प्रोत्साहन, स्वीकृति, सहायता और सेवाएं मिल सकती है। स्वतंत्रत और गरिमापूर्ण जीवन जीना जारी रखें।”
!!21 अगस्त-अंतर्राष्टीय वरिष्ठ नागरिक दिवस!!
आओ वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाये
अपने बुजुर्गों को अपने निकट लाये।
उन्हें देख अपना भविष्य की सोचें
इस समझ अपना वर्तमान सजाये।।
सोचों इन्हीं से हम पीढ़ी है
सोचो यही पहली हम सीढ़ी है।
सोच कर जानो इनमें अपने को
कहीं छिपी उजागर कोई रूढि है।।
यहां बदला नहीं कोई एक दूजे
बस प्रेम बंधन है अटूट अबूझे।
प्रेम ग्रँथ के एक पृष्ठ है हम
उसमें सुखद अंत एक दूजे खोजे।।
ये हाथ थाम हमें बढ़ाकर आगे
अपना हाथ छुड़ा लेते है।
यही हमारा कर्तव्य है अपना
पुनः हाथ इन पकड़ लेते है।।
हाथ हाथ ले साथ साथ
चले एक दूजे बन जीवन लाठी।
कोई आगे तो कोई पीछे
सुसंस्कृति देते अपनी माटी।।
यादों में जो घिरे हुए
उन्हें संजीवता का दो निज साथ।
भोर करो उन हटा अंधेरे
उन्हें सोहार्दय भरा बढ़ाकर हाथ।।
उन्हें कभी न देना निज कुंठा
ओर कभी ना देना कडुवी बात।।
जो दोगे वही लौट मिलेगा
ज्यों पलट चक्र चलता दिन रात।।
ना छोड़ो उन्हें वृद्ध गृह
उन्हें समझो ओर समझाओ भी।
यही अभिशाप पित्तरदोष है
जो इसी सबके मिलता है सभी।।
उपाय यही है जीवित की सेवा
ओर सहनशीलता का प्रयास।
यो वरिष्ठ नागरिक सम्मान को जानो
जो लाता हर नव जीवन सुहास।।

स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
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