
तेज़ बहादुर अगर बनारस से चुनाव लड़ते तो… लेकिन चु.आ (चुनाव आयोग) को तेज बहादुर के नामांकन में खामियां दिखीं, तो उन्हें सही करने के लिए चेतावनी के साथ समय दिया गया मात्र 1 दिन का। वो भी अमिताभ बच्चन की फ़िल्म के मशहूर डायलॉग जैसा… कि जाओ पहले उसके साइन लेकर आओ…।
तो मेरा जबाव, यहां अपराधियों को, लोगों की हत्याएं करने वालों को, आतंकवादियों को, गुंडों को टिकट मिल जाता है। अतीक अहमद जैसा अपराधी जेल से चुनाव लड़ सकता है, (अतीक ने अपने आप अपना नामांकन वापस ले लिया)। फिर तेज़ बहादुर में ऐसी क्या कमी थी?
सबसे बड़ा सवाल, अगर मोदी की लोकप्रियता के सामने अगर तेज़ बहादुर चुनाव लड़ भी लेते तो क्या उखाड़ लेते?
तो यहां मैं खुद ही जबाव देना चाहूंगा कि “अगर तेज़ बहादुर चुनाव लड़ते तो वोट जरूर काटते, भले तेज़ बहादुर हार जाते”।
मैं बनारस 3 बार जा चुका हूं। वहां लोगों की राय बंटी हुई है।
माहौल भले मोदीमय हो। लेकिन तेज़ बहादुर ने अपने पक्ष में काफी माहौल बना लिया था। मोदी सेना के पराक्रम के नाम पर वोट मांग रहे हैं, जबकि सेना में अपना योगदान दे चुका एक सैनिक उनके सामने था, वोट दोनों तरफ राष्ट्रवाद को पड़ते।
इसके अलावा बनारस में हिन्दू भी इस बार मोदी से खफा- खफा हैं खुद सैंकड़ों पुजारी मोदी का जमकर विरोध कर रहे हैं … विरोध भी इसलिए क्योंकि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर, और भी कई “विकास” कार्यों के नाम पर मंदिर तोड़े गए हैं…।
(टूटी मस्जिद भी हैं लेकिन हिंदुत्व की बयार में उनके वोट कौन गिनता है…।)
इसके बाद सपा बसपा का समर्थन…. सपा की तरफ से तेज़ बहादुर को अपना उम्मीदवार बना लेना, आम आदमी पार्टी का खुलकर तेज़ बहादुर के सामने आना… तेज़ बहादुर को काफी वोट दिलवा देता। हो सकता था कि टक्कर कांटे की होती।
दूसरा सवाल प्रियांका गांधी मैदान छोड़कर क्यों भागीं?
लोग एक सवाल और दाग रहे हैं कि कांग्रेस डर गई, बनारस से प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने की घोषणा की थी लेकिन वो मैदान छोड़कर भाग गई।
तो आप सबको बता देना चाहता हूं कि प्रियंका भागी नहीं थीं। बल्कि प्रियंका का नाम उछालना कांग्रेस का महज़ एक प्रोपोगेंडा था। ताकि प्रियंका के नाम की हवा बनाई जा सके, इससे मोदी बनारस में ज्यादा ध्यान देते। आज के वक़्त मोदी एक ब्रांड है, बड़ा नाम है, मोदी के वोट कम होना, टक्कर में आ जाना, या चुनाव हार जाना किसी भी सूरत में भाजपा की जबरदस्त किरकिरी होती। और बाकी क्षेत्रों के विधानसभा चुनावों पर इसका सीधा-सीधा असर पड़ता।
इसके अलावा मोदी जहां जाते हैं भीड़ उनकी सभाओं, रैलियों में खिंची चली आती है, भले पैसे लेकर आ रही हो (विपक्ष का आरोप), लेकिन आ तो रही है। प्रियंका का नाम इस वजह से उछाला गया ताकि मोदी का देशभर की रैलियों से ध्यान भटके और वे ज्यादा ध्यान बनारस की तरफ लगाएं…। क्योंकि मोदी का प्रचार कोई दूसरा मोदी नहीं कर सकता… और न ही उनकी जगह ले सकता। और यह काफी हद तक दिखा भी। प्रियंका का नाम आने से मोदी बनारस को लेकर काफी गंभीर हो गए थे।
तो यह कांग्रेस का एक तीर से कई शिकार करने जैसा फार्मूला था। जो सोशल मीडिया मैनेजमेंट के गुण वो बीजेपी आईटी सेल से सीख रही है। अब इस मामले में वो बीजेपी यानि मोदी को खास टक्कर देती दिख रही है।
यही सत्य है आप किसी भी जानने वाले मीडियाकर्मी से पूंछ लीजिए। बिना कैमरा तो ज़ी न्यूज़ वाला पत्रकार भी सत्य बता देता है। 🙂
मोदी जिस तरह सोशल मीडिया और मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, कुछ हद तक कांग्रेस भी उसी राह पर है। 2014 में सोशल मीडिया मैनेजमेंट की वजह से 44 सीटों पर सिमटी कांग्रेस। मतलब मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना, अब सपना ही रह जायेगा। जिस राह पर चलकर मोदी देश के पीएम बनें, राहुल को पप्पू बनाया।
अब उसी राह पर राहुल हैं। राहुल गांधी ने मोदी की चौकीदारी को “चोर” शब्द से जोड़ दिया। अब ‘चौकीदार’ शब्द जुड़ते ही अपने आप ‘चोर’ जुड़ जाता है।
भले बीजेपी इस बार चुनाव जीत जाए लेकिन आने वाली 23 मई को जबरदस्त नुकसान का आंकलन है।

मनीष कुमार “अंकुर”
Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Hindi News – Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines, current affairs, cricket, sports, business and cinema, Latest Hindi News, Breaking News in Hindi, Bollywood Gossip, Bollywood News, Top Hindi News Channel, Khabar 24 Express Live TV, Khabar24, Khabar24 Express