जीवन को सही ढंग से जीने की कला सिखाने वाले, महिलाओं को उनके अधिकार बताने वाले, भविष्यवक्ता, दुखों को दूर करने वाले, बुरी शक्तियों का नाश करने वाले, अपने भक्तों के हितों की रक्षा करने वाले। ऐसे नरम ह्रदय, परमज्ञानी सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज का जन्मदिन भक्तों ने ऐसे मनाया जैसे कि वे किसी देव की पूजा कर रहे हों, या कोई देव पर्व मना रहे हों।
वैसे कहते हैं गुरु भगवान का ही एक रूप हैं, तो सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज भी अपने भक्तों के लिए किसी देव या ईश्वर से कम नहीं हैं।
स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास वो कला है जो अपने भक्तों के मन को पढ़ लेती है। उनके मन में क्या चल रहा है, वे किस दुःख से गुज़र रहे हैं? उनके जीवन में क्या परेशानियां हैं? स्वामी जी उन सबको समाधान के साथ अपने भक्तों के सामने रख देते हैं। और भक्तों की समस्याएं भी पल भर में दूर हो जाती हैं।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, देश के कौने-कौने में स्वामी जी के भक्त हैं, अमेरिका जैसे समृद्ध देश में भी स्वामी जी के बहुत सारे भक्त हैं।
इतना ही नहीं स्वामी जी के भक्तों की संख्या देश विदेश में निरंतर तेज़ी से बढ़ती जा रही है।
9 अप्रैल को जो भक्त आश्रम में नहीं आ सके उन्होंने अपने घर पर केक मंगा स्वामी जी तस्वीर लगाकर जन्मदिन मनाया। 9 अप्रैल को महिलाओं ने हवन कीर्तन करवाया, गुरु भक्ति की गीत गाये, गुरु जी का सत्संग किया।
स्वामी जी के जन्मदिन पर हम उनके बारे में ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जिन्हें शायद आप भी न जानते हों।
आपको बता दें कि सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज ने छोटी सी उम्र में ही सन्यास ले लिया था और सांसारिक सुखों से बिल्कुल दूर हो गए थे। स्वामी जी ने बुलंदशहर में कचहरी रोड पर श्री सत्य सिद्ध शानिपीठ मंदिर का निर्माण कराया, यहां हर शनिवार मेला सा लगता है, कहते हैं जिन पर शनि की साढ़ेसाती हो, महादशा हो या शानिदशा हो, वे इस मंदिर में पूजा करके शानि की हर दशा से मुक्ति पा उनका आशीर्वाद पा लेते हैं।
स्वामी जी ने महिलाओं के सम्मान में सत्यास्मि मिशन नाम की संस्था भी बनाई हुई है। महिलाओं को कुम्भ में शाही स्नान की व्यवस्था, सभी पर्वों पर महिलाओं की भागीदारी, मंदिरों में महिला पुजारियों का स्थान, शिक्षा में महिलाओं का स्थान, कामकाज, व्यापार, नौकरी इत्यादि में महिलाओं की भागीदारी आदि ये सब सत्यास्मि मिशन द्वारा स्वामी जी के आवाह्न पर होती हैं।
स्वामी जी में बचपन से ही कुछ ऐसी चमत्कारिक शक्तियां आ गई थीं जो स्वामी जी को बाकी बच्चों से तथा सांसारिक सुखों से अलग करती थीं।
स्वामी जी जबसे सन्यासी बनें तब से वे एक दो बार को छोड़ दें तो कभी आश्रम से बाहर नहीं गए। स्वामी जी आश्रम से शनि मंदिर तक जरूर जाते हैं लेकिन शनिमंदिर की दूरी आश्रम से महज 300 मीटर है।
आज देशभर में पूर्णिमाँ माता के जितने भी मंदिर देखने को मिलते हैं वे सभी स्वामी जी के भक्तों द्वारा निर्माण कराए हुए हैं और उन मंदिरों में जो मूर्ती आप देखेंगे वे सभी श्री सत्य ॐ सिद्धाश्रम बुलंदशहर से ही जाती हैं। स्वामी जी उन मूर्तियों में प्राणप्रतिष्ठा करके मूर्तियों को भक्तों को देते हैं और भक्त घर, मंदिर, दुकान, फेक्ट्री, ऑफिस इत्यादि में उन मूर्तियों को स्थापित कर देते हैं। भक्तों के मुताबिक पूर्णिमाँ माता की मूर्ती स्थापित करने के बाद उनके जीवन में अनेक चमत्कार देखने को मिले जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
बहुत से लोगों ने अपने आस-पास “सत्य ॐ सिद्धायै नमः” नाम के मंत्र का जप करते हुए लोगों को देखा होगा, इस मंत्र को स्वामी जी ने ही सर्वप्रथम बताया है। इस मंत्र की शक्ति इतनी है कि अगर कोई सच्चे दिल से स्वामी जी का ध्यान करते हुए “सत्य ॐ सिद्धायै नमः” मंत्र का जप करे तो उसके कष्ट दूर हो जाते हैं।
बड़े से बड़े नेताओं, व्यापारियों, रसूखदार लोगों ने स्वामी जी को अपने यहां बुलाने की कोशिश की बजाय स्वामी जी के जाने के वे खुद स्वामी जी के चरणों में नतमस्तक हुए।
स्वामी जी ने सत्यास्मि धर्म ग्रन्थ की भी रचना की है जिसमें ऐसी ऐसी बातें लिखी हैं कि अगर कोई उन्हें सही ढंग से जान ले, पढ़ ले तो वो जीवन के असली महत्व को जान जाएगा, वो ईश्वर को प्राप्त कर लेगा।
स्वामी जी अपने प्रवचन खुद लिखते हैं, वे भविष्यवाणियां भी करते हैं। स्वामी जी ने आजतक जितनी भी भविष्यवाणी की हैं वे सब सही साबित हुई हैं।
सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज को भविष्यवक्ता भी कहा जा सकता है। उनके जितने भी भक्त हैं अगर वे किसी परेशानी से जूझ रहे हैं तो स्वामी जी अपने ध्यान द्वारा, दिव्यदृष्टि से भक्त को अपने पास बुला लेते हैं और उसकी परेशानी को दूर कर देते हैं।
स्वामी जी के बारे में अनेक रोचक जानकारियां हैं अगर विस्तार से बताने लगें तो कई दिन निकल जाएं।
अंत में हम सिर्फ इतना कहना चाहेंगे कि सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की आत्मा अपने भक्तों के दिलों में बसती है।
जैसे शिरडी के साई बाबा को कलयुग के कृष्ण का अवतार कहा जाता है, कहते हैं साई बाबा अपने भक्तों के लिए ईश्वर से लड़ जाते थे…. वैसे ही सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज हैं वे भी अपने भक्तों के लिए ईश्वर से लड़ जाते हैं… स्वामी जी को ईश्वर का आजका जीता जागता सच्चा अवतार कहा जा सकता है।
जो भक्त दान देना चाहते हैं, पुण्य कार्य करना चाहते हैं, जो भक्त पीड़ा से मुक्ति चाहते हैं, जो भक्त शनिदशा से मुक्ति चाहते हैं वे भक्त नीचे दिए गए एकाउंट में दान दे सकते हैं।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
जय हो सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आपकी जय जयकार हो
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सत्य ऊँ सिद्धायै नम: 🙏🏻🙏🏻 गुरु जी 🎈🎁✨🎉🎂💐🎊🍫😊🙏🏻
Jai Satya om sidhay namah