श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज द्वारा रचित पूर्णिमाँ पुराण में भी इस पूजा का वर्णन है। अगर इन दिनों कोई भी अपने नए घर-दुकान इत्यादि में माँ पूर्णिमाँ देवी की मूर्ती स्थापना करता है तो उसके घर कभी भी दुःख दरिद्रता नहीं आती है। घर में शांति रहती है। व्यापार में कभी घाटा नहीं होता है। गृह दोष से मुक्ति मिलती है।
बसंत पंचमी के दिन सिर्फ मां सरस्वती ही नहीं बल्कि प्रेम के देवता कामदेव की भी पूजा की जाती है। इसके साथ ही इसी दिन भगवान विष्णु की भी पूजा का बड़ा महत्व है।
बसंत ऋतु को प्यार की ऋतु भी कहा जाता है। इस मौसम में प्रत्येक मनुष्य के शरीर में विभिन्न तरह के बदलाव होते हैं। इसलिए वसंत ऋतु को खुशनुमा और प्यार का मौसम भी माना जाता है।
इस दिन के बहुत से महत्व हैं इसीलिए भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अलग-अलग तरह से इस दिन की शुरुआत होती है। विदेशों में इन दिनों कार्निवल की शुरूआत हो जाती है।
भारत में बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। माता सरस्वती को बुद्धि और विद्या की देवी माना जाता है। इस महीने के दौरान मौसम काफी सुहावना हो जाता है। इस दौरान न तो ज्यादा ही गर्मी होती है और न ही ज्यादा ठंड होती है और यही वजह है कि बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की खास पूजा की जाती है।
श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज माँ सरस्वती पूजा का शुभ मूहर्त बता रहे हैं।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की शुभ मूहर्त 9 फरवरी को 12:26 से 12;41 तक
बसंत पंचमी शुरूः 9 फरवरी 2019 को 12:25 से
बसंत पंचमी समाप्त- 02:08, 10 फरवरी 2019
सद्गुरु स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के मुताबिक बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त है। और नए काम के लिए ये बड़ा अच्छा और शुभ दिन माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करें। पीले वस्त्र पहनकर पूजा करना अच्छा होता है। अगर पीले पकवान बनाकर खाएं और बांटे तो अच्छा होगा इससे बड़ा फायदा होता है। ऐसा करने से रोग मुक्ति होती है। घर में शांति आती है।
स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज कहते हैं कि भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की थी। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। और यही वो दिन था, तभी से यह दिन बसंत पंचमी के नाम से जाना जाने लगा। इसी वजह से माँ सरस्वती की पूजा होती है।
तो आप सब भी माँ पूर्णिमा और माँ सरस्वती की पूजा करें और पुण्य कमाएं।
जय माँ सरस्वती
जय माँ पूर्णिमाँ
जय श्री विष्णु भगवान
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
सद्गुरु स्वामी श्री श्री सत्येन्द्र जी महाराज
www.satyasmeemission.org
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