“वो नोटबन्दी” 8 नवंबर 2016 की वो तारीख.. याद है या भूल गए
नोटबन्दी को भले आज दो साल हो गए हों लेकिन नोटबन्दी के जख्म इतने गहरे थे कि वो अभी तक भरे नहीं हैं। नोटबन्दी ने आमजन को खूब परेशान किया। परेशान ही नहीं बल्कि इस नोटबन्दी की भेंट लगभग 250 लोग चढ़ गए। लगभग 250 से ज्यादा लोगों की मौत इस नोटबन्दी की वजह से हुई।
आज नोटबन्दी को जब 2 साल पूरे हो गए हैं तो विपक्ष भी कहाँ चुप बैठने वाला था। चुनावी माहौल है और हर कोई चुनावी माहौल में अपने फायदे के लिए मोदी सरकार पर निशाना साधाना चाहता है। और साधें भी क्यों न, ये फैसला ही ऐसा था जिससे प्रधानमंत्री खुद पे खुद कटघरे में खड़े हो गए।
पीएम मोदी की उनके फैसले के खिलाफ खूब आलोचना हुई। नोटबन्दी के बाद लोगों को जिस तरह परेशानी का सामना करना पड़ा उससे लोगों ने जी भरकर पीएम को और उनके इस नौसिखये फैसले को कोसा।
खैर फैसला जो भी था इस फैसले ने देश को अच्छे खासे जख्म दिए जो आज तक हरे हैं। तभी तो आजतक पीएम मोदी की उनके इस फैसले के खिलाफ अभी तक आलोचना हो रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबन्दी को बताया सबसे क्रूर फैसला :
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नोटबंदी के दो साल पूरा होने के मौके पर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि यह एक ऐसा ‘क्रूर षड्यंत्र’ था जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सूट-बूट वाले मित्रों’ के कालेधन को सफेद किया गया।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि इस ‘घोटाले’ में सबकुछ सोच-समझकर किया गया और इसके अतिरिक्त नोटबंदी का कुछ दूसरा मतलब निकालना देश की समझ का अपमान है।
उन्होंने ट्वीट कर, ‘ नोटबंदी सोच-समझ कर किया गया एक क्रूर षड्यंत्र था। यह घोटाला प्रधानमंत्री के सूट-बूट वाले मित्रों का काला-धन सफेद करने की एक धूर्त स्कीम थी। इस कांड में कुछ भी मासूम नहीं था। इसका कोई भी दूसरा अर्थ निकालना राष्ट्र की समझ का अपमान है।’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार किया और कहा कि अर्थव्यवस्था की ‘तबाही’ वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है तथा इसके घाव गहरे होते जा रहे हैं। सिंह ने एक बयान में यह भी कहा कि मोदी सरकार को अब ऐसा कोई आर्थिक कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो।
उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में त्रुटिपूर्ण ढंग से और सही तरीके से विचार किये बिना नोटबंदी का कदम उठाया था। आज उसके दो साल पूरे हो गए। नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो कहर बरपा, वह अब सबके सामने है। नोटबंदी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, पेशे या संप्रदाय का हो।’ सिंह ने कहा, ‘अक्सर कहा जाता है कि वक्त सभी जख्मों को भर देता है लेकिन नोटबंदी के जख्म-दिन-ब दिन और गहरे होते जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि देश के मझोले और छोटे कारोबार अब भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट आई, उसके और भी असर देखे जा रहे हैं। छोटे और मंझोले कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया। अर्थव्यवस्था लगातार जूझती दिखाई पड़ रही है जिसका बुरा असर रोजगार पर पड़ रहा है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। बुनियादी ढांचे के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है।’
उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के कारण रुपए का स्तर गिरा है जिससे वृहद आर्थिक आंकड़े भी प्रभावित हुए हैं।’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थाी जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे।
ममता बनर्जी ने नोटबंदी को ‘विपदा’ करार दिया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2016 में हुई नोटबंदी की घोषणा के बृहस्पतिवार को दो वर्ष पूरे होने पर इस कदम को ‘विपदा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले जब इसका ऐलान किया था वह तभी से इसे ‘काला दिन’ कहती आ रही हैं।
एक ट्वीट में ममता ने कहा, ‘आज नोटबंदी विपदा को दो साल हो गए। मैं ऐसा तब से कह रही हूं, जब से इसकी घोषणा की गई थी।’ उन्होंने कहा, ‘प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, आमजन और सभी विशेषज्ञ अब इससे सहमत हैं।’
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर बृहस्पतिवार को नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार किया और कहा कि अर्थव्यवस्था की ‘तबाही’ वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है तथा इसके घाव गहरे होते जा रहे हैं। सिंह ने एक बयान में यह भी कहा कि मोदी सरकार को अब ऐसा कोई आर्थिक कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था के संदर्भ में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो।
उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में त्रुटिपूर्ण ढंग से और सही तरीके से विचार किये बिना नोटबंदी का कदम उठाया था। आज उसके दो साल पूरे हो गए। नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो कहर बरपा, वह अब सबके सामने है। नोटबंदी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, पेशे या संप्रदाय का हो।’ सिंह ने कहा, ‘अक्सर कहा जाता है कि वक्त सभी जख्मों को भर देता है लेकिन नोटबंदी के जख्म-दिन-ब दिन और गहरे होते जा रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि देश के मझोले और छोटे कारोबार अब भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट आई, उसके और भी असर देखे जा रहे हैं। छोटे और मंझोले कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया। अर्थव्यवस्था लगातार जूझती दिखाई पड़ रही है जिसका बुरा असर रोजगार पर पड़ रहा है। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। बुनियादी ढांचे के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है।’
उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के कारण रुपए का स्तर गिरा है जिससे वृहद आर्थिक आंकड़े भी प्रभावित हुए हैं।’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थाी जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे।
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मनीष कुमार
ख़बर 24 एक्सप्रेस
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