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श्री कृष्ण और गोवर्धन पूजा का सच्चा अर्थ व महत्व, गोवर्धन पूजा से क्या मिलता है पुण्य, जानिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

 

 

 

ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति दिखाते हुए विशालकाय गोवर्धन पर्वत को महज छोटी अंगुली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था। मान्यता है कि इस दिन जो भी श्रद्धापूर्वक भगवान गोवर्धन की पूजा करता है, उसे सुख समृद्धि प्राप्त होती है।

 

 

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज गोवर्धन पूजा का महत्व बता रहे हैं। और साथ ही बता रहे हैं इस पूजा से मिलने वाला पुण्य।

 

श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत पूजा का सच्चा अर्थ:-

 

हमें पर्वतों का रक्षण करना चाहिए..
द्वापरयुग में इस ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन यानि गिरिराज पर्वत था।जिसके विशाल क्षेत्र में गांवों की गाये पशु चरते थे।तब मूल में लोगो ने वेदों के अनुसार अपनी आत्मा की उपासना को छोड़कर अनेक उपदेवों इंद्र आदि देवो की उपासना अत्यधिक प्रचलित कर रखी थी।यो श्री कृष्ण ने इसी ज्ञान के चलते इंद्र का घमंड तोड़ा और व्यक्ति को उसके पुरुषार्थ के विषय में इस गिरिराज पर्वत पर उपदेश दिया और बताया की-ये पर्वत हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण है।और अंधकार भरे इस अमावस्या रूपी अज्ञान रात्रि से आगामी दिन यानि प्रतिपदा को उन्होंने ज्ञान प्रकाशित करने के उपदेश दिए।जिन्हें हमें अवश्य जानना और मनना चाहिए।
1-ये पर्वत बरसात की अधिकता बढ़ने पर हमें अपनी प्राकृतिक गुफाओं में रहने को देकर हमारे और हमारे पशुओं और प्रकार्तिक अन्य जीवों के जीवन को बचाते है।वहाँ प्रतिदिन गौ या पशुओं के चरने से उनके गोबर के पड़ते रहने से ये उपजाऊ भूमि बनी रहती है।
2-पर्वत हमें अनेक रोग निवारक बहुमूल्य ओषधि देतें है।
3-पर्वत अपने ऊपर वृक्षों को पृथ्वी के तल से ऊँचा करके हमारे जीवन की सबसे आवश्यक प्राणवायु और उसके क्षेत्र यानि ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाते है।ताकि पृथ्वी का निचला तल कितना ही प्रदूषित होता हो,तब ये अपनी इस ऊंचाई को देकर वृक्षों के माध्यम से हमें शुद्ध प्राणवायु मिले ये प्रदान करते है।
4-यो यदि हम यहां से निरन्तर वृक्ष काटते रहे तो हमारा ऑक्सीजन लेवल नीचे आता चला जायेगा और हमारा जीवन बड़े खतरे में पड़ जायेगा।यो इन पर्वतों पर वृक्ष लगाये।यो यहां यात्रा करने पर अपने साथ साथ एक एक व्यक्ति एक एक पौधा लाये और लगाये।
5-पर्वतों से अनेक प्रकार के हमें जीवन उपयोगी खनिज पदार्थ मिलते है।
6-पर्वतों की ऊंचाई से ही हमारे पानी का स्रोत्र ऊँचा रहता है।पर इस पानी के स्रोत्र को लगातार ऊँचा बनाये रखने में ये अधिक व्रक्ष ही पूर्ण सहयोगी है।
7-पर्वत पृथ्वी और आकाश के बीच की गर्मी यानि तापमान को भी नियंत्रित करते है।
8-पर्वत पर आप अपनी एकांत जप तप तपस्या को बिना कोलाहल के सम्पूर्ण कर सकते है।यो इन पर्वत और उसके वृक्षों की वृद्धि करो।
यही श्री कृष्ण गोवर्धन मुरारी के 8 उपदेश ही उनका अष्टमी व्रत है।
ऐसे अनेक बहुमूल्य उपदेश श्री कृष्ण जी ने इस पर्वत पर जनता को दिए,और उन्हें वृक्ष लगाने और इस पर्वत की रक्षा करने को लेकर वर्ष में दो बार अवश्य इसका दौरा या निरक्षण करने यानि परिक्रमा करने का आदेश दिया।जो आज केवल एक भ्रम पूर्ण परिक्रमा बनकर शेष रह गया है।जिस अर्थ की भगवान कृष्ण ने कहा-वो पीछे छूट गया बल्कि वो समाप्त हो हो गया।यो भक्तों आज या जब भी गिरिराज यानि गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करो।तब अवश्य वहां अपने परिवार के हिसाब से एक एक पौधा लगाओ और पुनः आगामी परिक्रमा में उसका निरक्षण करो-की-वो पौधा सही है या नहीं।और है..तो उसे जल दो और नहीं तो पुनः लगाओ और उसका रक्षण की व्यवस्था करो।तभी सही अर्थ में गोवर्धन परिक्रमा और श्री कृष्ण उपासक हो।अन्यथा आप श्री कृष्ण के सच्चे ज्ञान पथ पर चलने वाले अनुगामी भक्त नहीं हो।
सभी को शुभ गोवर्धन दिवस की शुभकामनायें..

 

 

गोवर्धन पर्वत से चला
ये पूज्य आठ उपदेश..
उठ री सपुति पुंज ले
गोधन खड़ा इस भेष..
कृष्ण पर्वत पर खड़े
दे रहे शाश्वत ज्ञान..
अमावस अज्ञान त्याग कर
पकड़ो सच्चा ज्ञान..
पर्वत रक्षक सदा तुम
और देते सदा आसरा..
इन पर पशु चर पले
रोग मिटाये दे साँसरा..
जप तप पूजा यहां फले
और फले यहाँ हर फल..
काटो पेड़ लगाओ भी
तब मिले प्राण नित कल..
ओओ यहाँ घूमने तुम
और देखो जीवन धाम.,
यहीं कहे कन्हिया जी
कर स्वागत गिरधर गाम..

 

 

******

स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

www.satyasmeemission.org


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One comment

  1. Jay satya om siddhaye namah

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