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शारदीय नवरात्रियों में गुरु बदल रहा है अपना स्थान, इससे किन-किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव? बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

 

आज यानि 10 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गयी हैं, लोग माँ दुर्गे की भक्ति में पूरे जोर शोर से लगे हैं। माँ दुर्गे को मनाने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। लेकिन आजसे ही गुरु अपना स्थान बदल रहा है, तो इससे कुछ राशियों पर भी प्रभाव पडने वाला है।

 

 

आज से नवरात्रि शुरू हो रही हैं लेकिन साथ ही गुरु आजसे अपना स्थान बदल रहा है श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज बता रहे हैं कि किन-किन राशियों पर गुरु का क्या प्रभाव पड़ने वाला है?

गुरुदेव बृहस्पति के स्थान बदलने से किन राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइये जानते हैं स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से : –

11 अक्टूबर को बृहस्पति तुला राशि से वृश्चिक राशि यानी अपने मित्र सकारात्मक मंगल की राशि में प्रवेश कर रहे हैं। वहां लगभग 13 माह तक रहेंगे। ग्रहों में बृहस्पति को गुरु व मंगल को देवों का सेनापति कहा जाता है। अधिकतर बृहस्पति गोचर में 2, 5, 7, 9 वें व 11वें स्थानों में होने पर लगभग शुभ फल ही प्रदान करता है। यह गोचर परिवर्तन वृष, कर्क, कन्या, तुला, मकर व मीन राशि वाले लोगों के लिए विशेष शुभ कारक सिद्ध होगा।

चंद्रमा व शुक्र के बाद गुरु सबसे चमकदार और सुंदर सोम्य शुभकारक ग्रह है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु को पुरुष और आकाश तत्व माना गया है।ब्रह्स्पति का अर्थ ही विशालता, विकास और विस्तार होता है। इसकी अपनी राशि धनु व मीन है, यह कर्क राशि पर उच्‍च व मकर राशि पर नीचस्थ हो जाता है। सूर्य, चंद्रमा व मंगल इसके मित्र ग्रह हैैं, बुध शत्रु व शनि ग्रह तटस्थ हैैं। गुरु पिछले जन्मों के कर्म और धर्म तथा ज्ञान यानि इच्छा के अनुसार ही वर्तमान जन्म में अपना फल देता है-ये पांच कर्मों के फल का अधिकारी है-सन्तान-विद्या-नोकरी-विवाह और मोक्ष। साथ ही यह अद्धभुत स्मृति शिक्षा, उच्च राजनीति,सफल मंत्री पद एवं उच्‍च अभिलाषा आदि का कारक ग्रह है।
इस परिवतर्न से भारतीय राजनीति पर गुरु का विशेष प्रभाव देखने में आएगा।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृश्चिक राशि में गुरु के परिवर्तन से गुरु के लाभ में तेजी और आक्रमकता बढ़ कर मिलती है,यदि योजना नहीं बनी है और अचानक कार्य प्रारम्भ कर दिया तो,हानि ही मिलती है।यो अचानक स्नेक नेताओ के मंत्रालय में बदलाव या राज्यसभा में भी पदों की वृद्धि की जा सकती है। इस वर्ष राजनीतिज्ञो की भाषा और आंदोलनों में लोगो और अनुयायियों के अंदर उन्माद में वृद्धि हो सकती है। जनता में असंतोष की स्थिति बन सकती है। वित्तीय योजनाओं को बल तो मिलेगा, लेकिन देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति खराब भी हो सकती है। महंगाई में तेजी आएगी। ईंधन की दर में भी तेजी आने की आशंका है, साथ ही विधिक पक्ष में भी अभूतपूर्व बदलाव देखे जाएंगे।वैज्ञानिक खोजो और टेक्नोलॉजी की दिशा में अच्छा विस्तार होगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति के राशि परिवर्तन के समय चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होगा, जो बृहस्पति का ही नक्षत्र है।अर्थ यह है कि-आने वाले समय से ही गुरु बलवान अवस्था में होंगे।नतीजा जिन भक्तों की जन्मकुंडली में बृहस्पति राजयोग या योगकारी है, वे अपने जीवन के सभी क्षेत्र में अच्छी उन्नति व् प्रगति प्राप्त करेंगे। भारत वर्ष की कुंडली में बृहस्पति अष्टम (अचानक,संघर्ष,दुर्धटना,पार्टनरशिप भंग,गुप्त शत्रु आक्रमण, मृत्यु आदि) व एकादश (आय,लाभ, प्रसिद्धि, जनता को होने वाले व्यवसायिक लाभ, रोजी-रोजगार में सफलता आदि) का स्वामी है, लेकिन वृषभ लग्न में गुरु तटस्थ व् विपरीत फलदायक होता है, जिसके कारण देश की आर्थिक स्थिति में लाभकारी परिणाम कम प्राप्त होंगे।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति मित्र और सकारात्मक मंगल के घर में प्रवेश कर रहा है। परन्तु मंगल ग्रह गर्म होने से अनुकूल-प्रतिकूल दोनों ही फल को देगा।जिससे देश की जलवायु में विपरीत और अचानक वर्षा कभी सूखे का परिवर्तन योग मिलेगा।सत्ता पक्ष व विपक्ष के मध्य आरोप-प्रत्यारोप का वातावरण बना ही रहेगा। सत्ता में हेर-फेर की भी बड़ी संभव है। घी, तेल, पेट्रोल, डीजल आदि के मूल्य में वृद्धि का क्रम बना रहेगा।तेल की कीमत में कम गिरावट होगी व् दाल व अन्न के भाव में गिरावट आ सकती है। सत्ता पक्ष जनता के हित में अनेक कार्यों की हितकारी योजना बनाएंगे।
12 राशियों पर संछिप्त प्रभाव:-
मेष :- अष्टमस्थ गुरु होने से अचानक यात्रा में परेशानी और आय कम,परिवारिक खर्च अधिक बढ़े।व्यवसाय में ऋण बने व बच्चों व् स्त्री पक्ष को रोग सम्भव हो।गुरु चित्र या देवी को नवीन माला पहनाएं,घी व् सामग्री का दान करें,नवरात्रि व् दीपावली पर विशेष पूजन करें।
वृष :-अकस्मात आवश्यकता से ज्यादा व्यय, घर बाहर संघर्ष की स्थिति बने, समय उत्तम नहीं,योजना देख कर बनाये।दीपावली पर देवी अनुष्ठान करें,यज्ञ को लकड़ी दान करें।
मिथुन :-परिणाम से अधिक परिश्रम व् फल कम,प्रेम में तनाव,सन्तान को कष्ट,अचानक यात्रा सम्भव,थकन बढ़े,जप ध्यान बढ़ाये,घी का दान तुरंत करें।परीक्षा में कुछ कमी रह जाये।यो गुरु मंत्र जपें।
कर्क :-व्यापर और घर में मांगलिक कार्य व आर्थिक उन्नति की संभावना,नए व्यक्ति से सम्पर्क पर सावधान रहें।बुखार बनें।
सिंह :-चल रहे कार्य क्षेत्र में सकारात्मक लाभ सहित परिवर्तन, यश व पराक्रम में वृद्धि,नवीन परिचय को देख कर बढ़ाये।नवीन योजना में सावधानी बरतें।नेत्रों व् गुप्तांग में कष्ट,ध्यान व् पूजा बढ़ाये।
कन्या :-वाणी पर सयंम बरतें,नए निर्णय लेने में सावधानी बरतें,व्यापार व् शासन से लाभ।यात्रा में कष्ट सम्भव।किसी मांत्रिक स्त्री से बचें।इष्ट देव देवी पर नवीन वस्त्र पहनाएं।
तुला :-पूर्व हितेषी से मुलाकात,तन की अपेक्षा मन में प्रेम तरंग,व्यापार या नोकरी में कुछ नया होगा,लगभग हर तरफ से लाभदायक सम्भव,पर अचानक दुःख आएं,सन्तति सुख सम्भव।घी और झाड़ू का दान करें।
वृश्चिक :-चल रही परेशानियों में कमी,परिजन व् स्वयं की सेहत में सुधार होगा,मांगलिक कार्य बने पर विध्न भी हो,दीपावली पर तंत्र व् गुप्त शत्रु से सावधान,बच्चों की और से चिंता।गरीब को रोटी दें।
धनु :- नवीन योजना में आर्थिक जोखिम न लें,अपनी व् माता या बड़ी सन्तान की सेहत का ध्यान रखें।शिक्षार्थी महनत करें।गुरुवार को पीले लड्डू चने गाय को दें।
मकर :-व्यापार व् नोकरी कार्य में अचानक लाभ,पद प्रतिष्ठा में उन्नति के अवसर,जीवनसाथी को कष्ट,नवीन व्यक्ति मित्र से अचानक लाभ भी ओर हानि भी सम्भव हो।कुत्ते को रोटी दूध दें।
कुंभ :-इस समय कार्य में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव बढ़े,थकन,प्रेम में निराशा, विशेष संघर्ष के बाद ही सफलता मिले यो थोडा विश्राम करें तब कार्य करें,मन नहीं मिलने से कुछ स्वजनों से दुरी बनें।धार्मिक कार्य में सफलता।सरसों का तेल दान या दीपक गुरुवार व् शनिवार को मन्दिर में करें।
मीन :-पद प्रतिष्ठा कार्य में सफलता और उच्‍च विद्या व कॅरियर में उन्नति,गुप्त शत्रु से दीपावली पे हानि।गुरु मंत्र से अनुष्ठान करें।

 

 

 

माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना से घर की दुख दरिद्री दूर होती है। घर में शांति आती है। बिगड़े कार्य सफ़लता में बदल जाते हैं। धन, यश, वैभव, शिक्षा आदि की समृद्धि आती है। जीवन सफ़लता की ओर अग्रसर हो जाता है।

इन नवरात्रि में माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना कर सकते हैं। श्री सत्य सिद्ध आश्रम बुलंदशहर से माँ पूर्णिमा देवी की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति प्राप्त की जा सकती हैं। ये मूर्ति इतनी चमत्कारिक होती हैं कि घर की सारी दुख दरिद्रता दूर होने लग जाती है।

 

-सत्य ॐ सिद्धाश्रम से महावतार महादेवी सत्यई प्रेम पूर्णिमा की प्राणप्रतिष्ठित मूर्ति को माँगा कर अपने घर,गांव,शहर, तीर्थस्थान पर स्थापित कराये धर्म पूण्य लाभ कमाएं।

-सम्पर्क सूत्र- पुजारी श्री मोहित महंत जी-08923316611
और महंत श्री शिवकुमार जी-09058996822
सत्य ॐ सिद्धाश्रम शनिमन्दिर कोर्ट रोड बुलन्दशहर(उ.प्र.)

-प्राणप्रतिष्ठित देवी प्रतिमा जो शुद्ध पीतल और स्वर्ण पालिशयुक्त है. 9 इंच ऊँची और साढ़े तीन किलों वजन की है, तथा उनका श्री भग पीठ लगभग 9 इंच लंबा अनुपाती चौड़ाई व् ढेढ़ से दो किलों वजन का है।जिसकी दक्षिणा समयानुसार 25 सौ व् भेजने का खर्चा अलग से तक बनता है।।अभी महादेवी की कृपा हेतु सम्पर्क करें।।

 

माँ माँ है वे बहुमूल्य है- जो मांगेगा मिलेगा।।

!!जय पुर्णिमाँ महादेवी की जय!!

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

www.satyasmeemission.org

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One comment

  1. Thank u guri ji itne acche se raashifal btane k liye. Aapki language bht easy ar acchi h mjhe itni shudh hindi nhi aati toh aapki language 1 bar mei smajh aa jati h

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