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नियम कायदों के साथ धारण करें पुखराज, यह जिंदगी में ला देगा बदलाव, पुखराज के नुकसान और फायदों के बारे में जाने : बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

हमने पहले भी रत्न रहस्य में लगभग सभी रत्नों के बारे में बताया था लेकिन उसमें विस्तारपूर्वक जानकारी नहीं थी। आज हम श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के माध्यम से एक अद्भुत रत्न पुखराज के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

पुखराज एक ऐसा रत्न है, अगर सूट कर जाए तो जीवन को बदल कर रख दे और अगर सूट नहीं किया तो आप मानिए कि जीवन को बिगाड़कर रख देगा।
आज श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज पुखराज के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

आओ पुखराज रत्न “येलो सफायर” के विषय में विशेष ज्ञान जाने:-

मुख्य 84 रत्न होते है जिनमें अब अनेकों लुप्त हो चुके और कुछ ही शेष है,यो रत्नों में पांच रत्न ही महारत्न कहे जाते है:-1-माणिक्य-2-मोती-3-पन्ना-4-हीरा-5-नीलम।
वेसे लगभग सारे रत्नों का मूल रत्न है माणिक्य जो सूर्य का रत्न है और जिस प्रकार से सूर्य सभी ग्रहों का राजा है,ठीक वेसे ही माणिक्य सभी रत्नों का राजा है और सभी रत्न इसी माणिक्य के परिवर्तित रूप है। जिनमें आज का हमारा रत्न ज्ञान विषय है-पुखराज…
पुखराज बृहस्पति ग्रह का रत्न है,ब्रह्स्पति ग्रह देवताओं के देव गुरु है,यो वे रत्न के भी देव है,अतः जैसे-देव गुरु ब्रह्स्पति का सभी आध्यात्मिक ज्ञान और सभी संसारिक पदों और विवाह तथा गृहस्थी जीवन से लेकर सन्तान और मोक्ष तक अधिकार है,यो ये पंच धर्म का निचोड़ यानि मनुष्य के आध्यात्मिक भाग्य के स्वामी ग्रह है। गुरु के रत्न पुखराज पहनने से अच्छा भाग्य और धन, पद प्रतिष्ठा, विवाह और सन्तान की प्राप्ति हो सकती है।
पुखराज पहनना आपकी बुद्धि में एक नवीन विचारधारा और समय पर अच्छे निर्णय लेने की क्षमता में मदद करता है।
पुखराज पहनने किसी कन्या या लड़के के निरन्तर विवाह में देरी होते रहने से उबरने में मदद कर सकता है और उपयुक्त साथी ढूंढने में मदद करता है।
पुखराज मीन राशि वाले या जिनकी जन्मकुंडली में मीन लग्न हो या धनु राशि वाले या जिनकी जन्मकुंडली में धनु लग्न हो उन के लिए बहुत ही लाभकारी रत्न है।
पुखराज पहनने से सभी प्रकार के एजुकेशन से जुड़े लोग और विद्यार्थियों या शिक्षाविदों,अध्यापकों के कार्यों में बड़ी प्रगति ला सकता है और उच्च शैक्षणिक यानि हाई एजुकेशन और उनके सेंटर चलने वालों या ऐसी ही विद्यालयों के चलने की गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए बहुत बढ़िया रत्न है।
बृहस्पति ग्रह कानून और न्याय,राजनीती के क्षेत्र में शासन करता है, इसलिए जो लोग कानूनी पेशे या राजनीती और प्रशाशनिक यानि आईएस,पीसीएस की तैयारी में लगे हैं, वे पुखराज से अवश्य लाभ उठा सकते हैं।
आध्यात्मिक परामर्शदाताओं,ज्योतिषियों, चिकित्सकों, कर्मकांडी पण्डितों, – जो लोग धार्मिक या आध्यात्मिक ज्ञान के क्षेत्र में है,भक्ति की साधना में लगे हुए हैं वे पुखराज के पहनने से भी लाभ लेते हैं क्योंकि समस्त धर्म बृहस्पति का ही क्षेत्र है। आध्यात्मिक विकास पाने वालों को भी बहुत फायदा हो सकता है
पुखराज रत्न पेट की बीमारियों,शुगर की बीमारी, कमजोर पाचन तंत्र,लिवर,किडनी और पीलिया के मामले में बहुत मदद कर सकता है।
वृषभ,मिथुन,कन्या,तुला,मकर, कुंभ राशि या इन लग्न वालों को पुखराज रत्न को परीक्षण यानि टेस्ट करके पहनना चाहिए।अन्यथा हानि भी उठानी पड़ सकती है।

मेष लग्न वालों के लिए गुरु ग्रह उनके धर्म और इष्टदेव व भाग्य के घर यानी नवम भाव का स्वामी होता है।यो यहां गुरु पीड़ित या कमजोर डिग्री का होने से उस व्यक्ति को पूजा करने पर इष्ट दर्शन या मंत्र जप से लाभ नही होता और धार्मिक कार्यों में विध्न बांधाये आती है,यो भाग्य में कमी आती है। अत: भाग्यवृद्धि के लिए इसे पहन सकते हैं।

कर्क लग्न वालों के लिए गुरु भाग्येश यानि नवम घर के साथ षष्टेश यानि छटे घर( छटा घर ननसाल,गुप्त शत्रु,पेट के रोग,कर्ज का घर होता है) का भी स्वामी होता है।यो इन सब पर गुरु का अच्छा या बुरा असर होता है। अत: इन्हें पुखराज पहनना शुभ रहता है। धर्म-कर्म में आस्था बढ़ाने के साथ-साथ भाग्य में भी वृद्धि करता है। स्वयं व संतान को भी लाभ पहुंचाता है। इस लग्न के जातक मोती (अनामिका ऊँगली में पहने) के साथ पुखराज(तर्जनी ऊँगली में) धारण कर शुभफल पा सकते हैं।

सिंह लग्न वालों के लिए गुरु पंचम घर यानी विद्या, मनोरंजन,शिष्य,सन्तान, गर्भधारण की छमता, का प्रति‍निधित्व करता है अत: इस क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति पुखराज पहनने से लाभ पा सकते हैं। सिंह लग्न वाले माणिक(अनामिका ऊँगली में) के साथ पुखराज(तर्जनी ऊँगली में) पहनकर विशेष लाभ पाने में समर्थ होते हैं।

वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिए गुरु धनेश होकर पंचमेश यानि पांचवे घर का स्वामी होता है अत: धन, वाणी, संतान,शिष्य,विद्या,या विषय या विद्यालय परिवतर्न,प्रेम, मनोरंजन भाव के लिए लाभप्रद है। मनोरंजन करने के सभी कार्यों से जुड़े व्यक्ति इसे पहनकर लाभ पा सकते हैं। इस लग्न वाले जातक सिंदूरिया मूंगे(अनामिका ऊँगली में पहने) के साथ पुखराज पहनें।

धनु लग्न वालों के लिए उस जन्मकुंडली के पहले घर यानि लग्न का स्वामी होने के साथ-साथ गुरु ग्रह उस वंश या जाति के लोगों से लाभ या हानि मिलेगी या सभी सुख, माता, भवन, जायदाद का स्वामी भी होता है। यो ये स्त्री या पुरुष बिना किसी अन्य रत्न के केवल पुखराज का लॉकेट बनवाकर गले में गुरुवार को धारण कर सकते हैं।

मीन लग्न वाले जातकों के लिए गुरु लग्नेश यानि पहला घर होकर दशमेश यानि दसवा घर भी है।यो इन घरों के लाभ- व्यापार, पिता,सुसर, नौकरी,उच्चाधिकारी से लाभ, राजनीति के क्षेत्र में लाभ का प्रतिनिधित्व करता है। उच्च प्रशासनिक सेवा वाले जातक इस रत्न को अवश्य पहन सकते है। जातक मूंगा व मोती के साथ पुखराज पहन कर अनेक लाभ पा सकते हैं।

पुखराज के उपरत्न इस प्रकार से है, इन्हें भी पहनकर आप अच्छा लाभ पा सकते है:-

पुखराज के उपरत्न इस प्रकार बताये गये हैं-(1) सुनैला, (2) केरु, (3) घीया, (4) सोनल, (5) केसरी। इनमें सुनैला और केसरी भारत में पाये जाते हैं, शेष की उत्पत्ति ईरान एवं अफगानिस्तान में होती है। सोनल श्रीलंका में भी प्राप्त होता है। केरु के उत्पत्ति स्थल बर्मा एवं चीन प्रांत हैं। ये सभी उपरत्न हल्के पीले रंग के होते हैं तथा धारण के उपरान्त पुखराज रत्न वाला प्रभाव कम रूप में प्रदान करते हैं।

धिया- हल्का पीला का होता है।
केसरी- हल्की चमक वाला और वजन में थोडा भारी होता है।
केरू- पीतल के रंग का होता है।
सोनल- सफेद- पीली किरणें वाला होता है।
सुनैला- सफेद-रंग का चिकना चमकदार होता है।
इनके आलावा भी आप पुखराज के स्थान पर टाइगर, सुनहला या पीला हकीक भी धारण कर सकते हैं।

पुखराज के चार प्रकार भी होते है:-

1-वर्णहीन पुखराज,इसे सफेद पुखराज भी कहते है,ये शुक्र ग्रह के लिए हीरे के स्थान पर भी पहना जा सकता है।

2-तराशा हुआ नील पुखराज,ये नीलम के स्थान भी पहना जा सकता है।

3-रक्त पुखराज या खुनी पुखराज,ये माणिक्य का पुखराज में परिवर्तित रूप होने से माणिक्य के स्थान पर भी पहना जा सकता है।

4-शाही पुखराज रत्न,ये केवल उच्च कोटि की राजनीती या प्रशाशनिक पद या धर्म में उच्च पदों के लिए उपयोगी है।

शुद्ध पुखराज की पहचान कैसे करें:-

आजकल सभी रत्नों में धोखाधड़ी मिल रही है और नकली रत्नों को जानवरों की हड्डियों और केमिकल के मिश्रण से बनाया जा रहा है।और केमिकल में उच्चतापमान पर कांच को करके डालकर नकली पुखराज बनाये जा रहे है और उन्हें पहचाना भी एक समस्या है,ऐसे रत्नों के रंग उड़ने पर बिकने वाला कह देता है की-अरे तुम्हारी कोई भारी ग्रह का असर ये रत्न ने ले ली और ये अपना असर खत्म कर गया,अब नया रत्न ले लो और ऐसे ही लूटते रहते है।विशेषकर पुखराज रत्न के विषय में यह अपने चरम रूप का लूट चल रही है। असली नकली की पहचान करने हेतु विशेषज्ञों ने अपने कई मत प्रकट किये है जिनको प्रयोग में लाने पर पुखराज के असली अथवा नकली होने का ज्ञान हो जाता है। इनमे से कुछ परीक्षण इस प्रकार से हैं:-

पुखराज रत्न को गाय के गोबर से रगड़ने पर यदि चमक काम अथवा फीकी हो जाय तो, रत्न नकली माने, परन्तु ऐसा करने पर यदि चमक में और वृद्धि हो जाय, तो पुखराज रत्न असली है।
अधिक ताप पर इसे तपाये जाने पर यदि रत्न तड़क या टूट जाय तो नकली है। रंग में परिवर्तन न हो, तो भी नकली है। अधिक ताप पर चटके अथवा टूटे नहीं तो मानो असली है एवं अधिक ताप पर तपाये जाने पर यदि रंग बदलकर एकदम सफेद हो जाय तो असली है।
किसी विषैले जन्तु द्वारा दंशित स्थान पर असली पुखराज रत्न रखने से विष का प्रभाव धीमा हो जाता है।
पुखराज को कच्चे या पक्के दूध में एक दिन, एक रात तक छोड़ रखें। बाद में निकालकर देखें। यदि उसकी चमक और रंगत पहले की ही भाँती है, तो पुखराज रत्न असली है, यदि चमक कम अथवा फीकी पड़ने पर पुखराज के नकली होने का आभास प्राप्त होता है।
धूप में यदि पुखराज रत्न को सफेद कपड़े पर रख दिया जाए तो असली पुखराज रत्न से पीली आभा छिटकती है।

पुखराज को धारण कैसे करें:-
पुखराज को सोने या पीतल में या पंचधातु की अंगूठी में बनवाकर अपने सीधे हाथ की पहली यानि तर्जनी ऊँगली जो की ब्रह्स्पति की ऊँगली होती है,उसमे गुरुवार के दिन प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक के बीच ही गंगा जल,दूध,दही,शहद,गो मूत्र या गाय के घी का बना पंचाम्रत में डालकर अपने पुखराज रत्न को देखते हुए अपने गुरु मंत्र का कम से कम 108 बार जप करके अपने इष्टदेव का भी 108 बार जप करके पहन ले।अंगूठी को बार बार उतारना नहीं चाहिए,उससे उसे फिर से गलत महूर्त में पहनने से दोष हो जाता है।हाँ चाहे तो तब उस समय उलटे हाथ की इसी ऊँगली में पहन ले और कार्य आदि के बाद फिर से पहली ऊँगली में पहन सकते है।
बहुत आवश्यक हो तो उसे पूजघर में रख दे और कार्य निपटाकर फिर से अपने गुरु मन्त्र के जप करके गंगा जल से धोकर पहन ले।

“इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी। 
माता पूर्णिमाँ देवी की चमत्कारी प्रतिमा या बीज मंत्र मंगाने के लिए, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से जुड़ने के लिए या किसी प्रकार की सलाह के लिए संपर्क करें +918923316611

ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः


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