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खूबसूरत रंगों के त्योहार पर समाजसेवी विजय शर्मा की शुभकामनाएं, होली पर ख़बर 24 एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्ट

 

 

 

होली का पर्व सभी के सर चढ़कर बोल रहा है। हर कोई अपनी तरह से होली को मनाने में जुटा हुआ है। और हो भी क्यों ना यह पर्व साल में एक बार आता है इस खुशियों के पर्व की हर कोई बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी खुशी से ज्यादा दूसरों को खुशियां देने में खुद को आनंदित महसूस करते हैं।”

 

 

 

 

 

बिहार के मशहूर “समाजसेवी विजय शर्मा” उनमें से एक हैं। विजय शर्मा अपने परिवार के साथ तो होली मनाते ही हैं वो उन लोगों का भी विशेष ख्याल रखते हैं जो किसी भी त्यौहार को मनाने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे में विजय शर्मा जैसे समाजसेवी उनकी मदद करने के लिए बाहर निकलते हैं। विजय शर्मा लोगों की हर संभव मदद करते हैं जिससे कि गरीब तबके के लोग भी आराम से अपने त्यौहार को मना सकें।

 

 

“बता दें कि विजय शर्मा “सरोवर सेवा आश्रम” के संयोजक हैं। सरोवर सेवा आश्रम बिहार के लोगों के उत्थान का कार्य करता है।”

 

 

 

ख़बर 24 एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए विजय शर्मा ने सभी देशवासियों को होली की बधाइयाँ दी। उन्होंने कहा कि होली खूबसूरत रंगों का त्योहार है, यह खुशियों का पर्व है। जिस तरह होली के रंग खूबसूरत होते हैं उसी तरह हर एक की जिंदगी ख़ूबसूरत बन जाये। विजय शर्मा ने ख़बर 24 एक्सप्रेस की टीम को भी होली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि ख़बर 24 एक्सप्रेस के टीम मेंबर अपना काम बड़ी ही मेहनत और ईमानदारी से करते हैं उन्होंने कहा कि ख़बर 24 एक्सप्रेस के टीम मेंबर हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहें।

 

क्यों मनाई जाती है होली :

बता दें कि होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है। विक्रम संवंत के अनुसार फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है। होली का पर्व दो तक मनाया जाता है जिसमें पहला दिन छोटी होली या होलिका दहन का होता है। वहीं दूसरा दिन को रंग वाली होली, धुलेटी या धुलंडी कहा जाता है। इस वर्ष 1 मार्च और 2 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा। रंगों और मस्ती के इस त्योहार का अपना एक धार्मिक और सामाजिक महत्व भी है। होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। होली सिर्फ रंगों ही नहीं एकता, सद्भावना और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
होली शब्द होला से लिया गया है। जिसका शब्दार्थ भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राक्षस हिरण्यकश्यिपु को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया था। वह चाहता था कि उसे भगवान के रुप में पूजा जाए। वहीं उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यिपु अपने पुत्र को सबक सिखाना चाहता था तो उसने इसके लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को ब्रह्म देव से अग्नि में ना जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यिपु के कहने पर होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान की कृपा से प्रहलाद बच गया लेकिन होलिका आग में भस्म हो गई। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर हिरण्यकश्यिपु की वध कर दिया।

 

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ख़बर 24 एक्सप्रेस


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