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चांगोली के श्रीभगपीठ में ‘सिद्ध पितृ मोक्ष समाधि’ की अनोखी महिमा, चार दीप और पितृ यज्ञ से मिलती है पितरों को मुक्ति



गंगनहर तट पर स्थित पूर्णिमा देवी श्रीभगपीठ आश्रम चांगोली को पितृ दोष शांति और आध्यात्मिक साधना का विशेष केंद्र माना जाता है।


नोएडा / गौतमबुद्धनगर: गौतमबुद्धनगर जिले के ककोड़ क्षेत्र के पास गंगनहर के पावन तट पर स्थित चांगोली के पूर्णिमा देवी श्रीभगपीठ आश्रम में स्थापित “सिद्ध पितृ मोक्ष समाधि स्थल” इन दिनों श्रद्धालुओं और साधकों के बीच आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां किए जाने वाले पितृ यज्ञ, दीपदान और मंत्र जप से पितृ दोष की शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

आश्रम से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस स्थान की महिमा प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यहां चार घी के दीप जलाकर और “सत्य ॐ” मंत्र का जप करने से पितरों को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण अमावस्या, पूर्णिमा और विशेष तिथियों पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना और पितृ यज्ञ करते हैं।

धार्मिक कथाओं के अनुसार देवर्षि नारद ने कलियुग में मनुष्यों की पीड़ा देखकर भगवान सत्यनारायण और देवी पूर्णिमा से ऐसा मार्ग पूछा जिससे पितरों को तृप्ति और मनुष्यों को रोगों से मुक्ति मिल सके। मान्यता है कि इसी संवाद के आधार पर गंगनहर के तट पर स्थित इस सिद्ध स्थल की महिमा प्रकट हुई, जहां श्रद्धा और साधना से पितृ मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

आश्रम के संतों के अनुसार इस स्थल पर चार दीप जलाने की परंपरा का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। चार दीप चार पीढ़ियों—पितृ, प्रपितामह, वृद्ध-प्रपितामह और अज्ञात पितरों के प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन दीपों की ज्योति पितरों के मार्ग को प्रकाशित करती है और उनके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

धार्मिक ग्रंथों में भी जल तट के पास किए गए पितृ यज्ञ को अत्यंत फलदायी माना गया है। बहते जल को पितृ लोक और मृत्यु लोक के बीच सेतु का प्रतीक बताया जाता है। मान्यता के अनुसार यज्ञकुंड में दी गई आहुति ‘कव्यवाह’ अग्नि के रूप में पितरों तक पहुंचती है और उन्हें तृप्त करती है।

आश्रम में पितृ शांति और आरोग्य से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय भी बताए जाते हैं, जिनमें हल्दी की गांठ, आक (मदार) के पत्तों और दीपदान का विशेष महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु इन उपायों को आस्था और परंपरा के अनुसार अपनाते हैं।

चांगोली स्थित यह सिद्ध स्थल आज कई श्रद्धालुओं के लिए पितृ दोष शांति, आध्यात्मिक साधना और पारिवारिक मंगलकामना का केंद्र बन चुका है। दूर-दूर से आने वाले भक्त यहां यज्ञ, दीपदान और मंत्र जप के माध्यम से अपने पितरों की शांति और परिवार की समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं और आध्यात्मिक आस्था से जुड़ा यह स्थल गौतमबुद्धनगर क्षेत्र में तेजी से प्रसिद्ध हो रहा है, जहां श्रद्धालु विशेष रूप से अमावस्या और पूर्णिमा के अवसर पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

अधिक जानकारी के लिए श्रद्धालु आधिकारिक वेबसाइट
www.satyasmeemission.org
पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


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