ये कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं है…
ये कहानी है हिम्मत की, हौसले की… और उस थप्पड़ की जो उस समाज के गाल पर पड़ा है,
जो आज भी बेटियों को बोझ समझता है…”
गरीबी से जूझता एक परिवार, बेटे की चाहत… लेकिन बेटा तो नहीं हुआ… 5 बेटियां जरूर पैदा हो गई
और जब पांचवीं बेटी पैदा हुई… तो घरवालों के चेहरे पर खुशी नहीं, शिकन थी।
क्योंकि हमारे समाज में जब एक से ज़्यादा बेटियां हों… तो दोष माना जाता है और जब लड़के की आस में सिर्फ लड़कियां ही पैदा हो जाएं तो वो लड़कियां ही समाज में अभिशाप कहलाती हैं।
आज हम ऐसी ही कहानी आपको सुनाने जा रहे हैं। जिसमें 5 बहनों में से सबसे छोटी लाडो है और लाडो ने वो कारनामा कर दिखाया जिससे समाज ही नहीं बल्कि पूरा गांव उसके कदमों में गिर गया।

कहानी उस प्यारी सी लाडो की… बेहद ही मासूम और चेहरे से हंसी गायब। क्योंकि वो एक अभिशाप थी।
बचपन से ताने सुनती आई…
‘अरे फिर से लड़की हुई?’
‘कब तक पालोगे इन बोझों को?’
ये बेटियां नहीं बल्कि गले की हड्डी हैं। कहां से लाएंगे इतना पैसा, कहां से करेंगे इनकी शादी…। ये मरती भी तो नहीं, इनको कोई बीमारी भी तो नहीं आती।
दादी के इस तरह के ताने उन सबको सुनने को मिलते और सबसे ज्यादा लाडो को सुनाया जाता।
लाडो रोज़ ये बातें सुनती, चुपचाप काम करती।
सारे दिन बर्तन धोना, कपड़े धोना, पूरे घर की देखभाल करना…
पांचवीं कक्षा उसने प्राइमरी से की और इसके बाद की शिक्षा उसने सरकारी स्कूल से ही की… मां बाप उसको एक रुपया भी नहीं देते थे। थोड़ी बहुत फीस जाती तो मां चुपके से कभी कभार उसे पैसे दे देती वो भी उतने कि उसकी फीस चली जाए।
मां मना करती कि तू मत पढ़ हमारे पास सरकारी स्कूल में भी पढ़ाने के पैसे नहीं हैं। पढ़ने के ऊपर मार भी खाती लेकिन लाडो ने पढ़ाई नहीं छोड़ी।
वहीं जब घर वाले सो जाते, तब वो जलती हुई ढिबरी के नीचे पढ़ाई करती।
उसे किताबें खरीदने के लिए न तो पैसे थे, न मदद…
इसलिए उसने कपड़े सिल-सिलकर पैसे जोड़े… और किताबें खरीदीं।
कोई पूछता – ‘क्या करेगी पढ़कर?’
वो मुस्कुरा देती… क्योंकि उसका सपना बहुत ऊंचा था।”
“परिवार नहीं चाहता था कि वो आगे की पढ़ाई करें।
लेकिन उसे थी जिद – कुछ कर दिखाने की।
2 बहनों की शादी हो चुकी थी,
बाकी 3 बहनें, मां-बाप, दादा-दादी और ऊपर से गरीबी…
पर लाडो ने कभी हार नहीं मानी।
सिर्फ एक चीज़ थी जो उसके साथ थी – उसका हौसला… और खुद पर विश्वास।”
“कई बार भूखी सोई,
लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ी।
उसे पता था कि वो अभिशाप है, मां बाप के प्यार को तरसती, बस एक दुलार को तरसती। क्योंकि मां बाप उसकी बाकी बहनों को भरपेट खाना भी देते और थोड़ा बहुत दुलार भी करते। लेकिन उस बिटिया की किस्मत में न दुलार था और न भरपेट खाना।
लेकिन उसने रात-रात भर जागकर वो किया जो गांव में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।”
“और फिर वो दिन आया…
जब गांव में ढोल नहीं बजे,
पर खबर ऐसी फैली… जैसे आग लग गई हो।
लाडो – वही प्यारी सी लड़की,
जिसे सब बोझ समझते थे,
जिसकी बात होते ही परिवार के मुंह सिकुड़ते थे…
आज वो बन गई DSP… यानी IPS ऑफिसर!”
“गांव की वो गलियां जहां वो ताने सुनती थी,
आज तालियों से गूंज रही थीं।
जो कभी उसे देखना भी पसंद नहीं करते थे,
आज उसी के पैर छू रहे थे।
मां-बाप की आंखों में आंसू थे…
लेकिन वो शर्म के नहीं, गर्व के थे।”
“लाडो ने मां-बाप को गले लगाया और कहा –
आई, बाबा… अब से मैं ही आपका बेटा हूं।
अब मुझे भी खाना खिलाओगे, मुझे भी प्यार दोगे। मैं अभिशाप नहीं हूं। लेकिन मैं आप सबको बहुत प्यार करती हूं।
मैं आपकी देखभाल करूंगी…
और अपनी बहनों की शादी ऐसे करूंगी कि सारी दुनिया देखे।
डीएसपी बिटिया ने दादी से पूछा
अम्मा क्या अब भी मुझसे नफरत करोगी?
मुझे अब तो नहीं मारोगी?
और ये कहते ही बिटिया फूट-फूटकर रो पड़ी।”
उस दिन सिर्फ लाडो की नहीं, पूरे गांव की आंखें नम थीं…
हर कोई उस ‘बोझ’ उस अभिशाप से माफी मांग रहा था, जो अब बोझ नहीं, ‘सम्मान’ बन चुकी थी।”
“लाडो की कहानी हमें सिखाती है कि
अगर हालात बुरे हों, तो झुकिए मत – जुट जाइए।
आपका हौसला ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
ये कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं…
बल्कि उस समाज को जवाब है, जो बेटियों को कमतर समझता है।”
“बेटा हो या बेटी – कोई फर्क नहीं।
बस हौसला हो, तो हर कोई कुछ भी बन सकता है।
लाडो जैसी बेटियां आज भी भारत का भविष्य हैं।”
Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network Khabar 24 Express brings the latest Hindi News, Breaking News, Live TV, India News, Maharashtra News, Nagpur News, Politics, Crime, Business, Sports, Entertainment, Technology, Auto, Health, Education, Lifestyle and World News with fast, accurate and trusted updates 24×7