
Delhi समेत 70 एयरपोर्ट्स की सुरक्षा में बड़ा बदलाव, CISF की संख्या घटाने की तैयारी
भारत के हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के 70 से अधिक एयरपोर्ट्स, जिनमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नै जैसे बड़े एयरपोर्ट शामिल हैं, वहां से करीब 12,000 CISF जवानों को हटाने की योजना सामने आई है। इस फैसले के बाद अब इन एयरपोर्ट्स पर प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने की तैयारी की जा रही है।
इस कदम के सामने आते ही देशभर में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या एयरपोर्ट जैसी हाई-अलर्ट जगहों की सुरक्षा निजी हाथों में देना सही फैसला है?
BCAS की समीक्षा के बाद बना प्लान
जानकारी के मुताबिक, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने देश के एयरपोर्ट्स की सुरक्षा का विस्तृत रिव्यू किया। इस समीक्षा के बाद करीब 50,000 CISF जवानों में से 12,000 जवानों को हटाने की सूची तैयार की गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव नागर विमानन मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों को भी सौंपा जा चुका है। फिलहाल इस पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है।
सरकार का पक्ष: सुरक्षा से समझौता नहीं
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा में कटौती नहीं बल्कि “स्मार्ट मैनेजमेंट” का हिस्सा है। समीक्षा में एयरपोर्ट्स के संवेदनशील और कम संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की गई है।
जहां खतरा कम है, वहां प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का सुझाव दिया गया है। जबकि हाई-रिस्क और संवेदनशील क्षेत्रों में CISF जवानों की तैनाती जारी रहेगी।
बड़े एयरपोर्ट्स पर ज्यादा असर
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नै जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर CISF जवानों की सबसे अधिक तैनाती है। रिपोर्ट के अनुसार, कई ऐसे पॉइंट्स हैं जहां इतनी बड़ी संख्या में प्रशिक्षित CISF जवानों की जरूरत नहीं है।
इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि जहां जरूरत कम है, वहां निजी सुरक्षा कर्मियों से काम लिया जा सकता है।
उठ रहे बड़े सवाल
हालांकि इस फैसले के बाद कई गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं—
- क्या प्राइवेट सिक्योरिटी एयरपोर्ट जैसी संवेदनशील जगहों को संभाल पाएगी?
- क्या इससे सुरक्षा में किसी तरह की चूक का खतरा बढ़ेगा?
- क्या खर्च कम करने के लिए सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है?
इन सवालों का जवाब फिलहाल सरकार और संबंधित एजेंसियों के पास है, लेकिन आम लोगों में इसको लेकर चिंता साफ देखी जा रही है।
क्या है आगे का रास्ता?
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। सरकार का दावा है कि जहां CISF की जरूरत होगी, वहां उनकी तैनाती में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
लेकिन यह साफ है कि आने वाले समय में भारत के एयरपोर्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
और अंत में….
एयरपोर्ट सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लिया गया यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ सरकार इसे संसाधनों के बेहतर उपयोग के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और विशेषज्ञ सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस संतुलन को कैसे बनाए रखती है—खर्च में कटौती और सुरक्षा की मजबूती के बीच।
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