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One Nation One Pension: Ammol Dewaji Wallke ने दिव्यांगों के लिए समान पेंशन की उठाई मांग, 800 रुपये में कैसे होगा गुजारा?

Ammol Dewaji Walkke | Nagpur News | Bureau Report Khabar 24 Express


देश में दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। भाजपा के कद्दावर नेता और सोशल वर्कर अम्मोल वालके ने “वन नेशन वन पेंशन” की मांग उठाई है। उनका सवाल साफ है—जब देश एक है, तो दिव्यांगों की पेंशन अलग-अलग क्यों? क्या 800 या 1000 रुपये में किसी दिव्यांग का गुजारा संभव है? आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट।

देश के अलग-अलग राज्यों में दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन की राशि अलग-अलग है। कहीं 800 रुपये, कहीं 900 रुपये, तो कहीं 1200 रुपये। वहीं दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 2500 रुपये तक की पेंशन दी जा रही है। इसी असमानता को लेकर अम्मोल वालके ने सरकार के सामने बड़ा मुद्दा उठाया है।

अम्मोल वालके का कहना है कि दिव्यांग कोई अपनी मर्जी से दिव्यांग नहीं बनता। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त सहयोग दिया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि 800 या 1000 रुपये महीने में आखिर किसी दिव्यांग का गुजारा कैसे हो सकता है? दवा, इलाज, दैनिक जरूरतें—इन सबका खर्च इतना कम नहीं होता।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारें दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। लेकिन अगर पूरे देश में “वन नेशन वन पेंशन” लागू हो जाए, तो हर राज्य में दिव्यांगों को समान पेंशन मिल सकेगी और वे ज्यादा मजबूती के साथ आत्मनिर्भर बन पाएंगे।

अम्मोल वालके ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार सरकारी अधिकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं करते। उन्होंने कहा कि बहुत सी योजनाओं का लाभ कागजों में तो दिखाई देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर वह दिव्यांगों तक नहीं पहुंच पाता।

उनके अनुसार, “दिव्यांग जन संवाद” कार्यक्रम में रोजाना ऐसी शिकायतें सामने आती हैं, जहां अधिकारी दिव्यांगों को अनावश्यक रूप से परेशान करते हैं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जिन्हें पहले से ही जीवन ने कठिन परिस्थितियां दी हैं, उन्हें और परेशान करना गलत है।

इसी उद्देश्य से अम्मोल वालके ने “दिव्यांग न्यूज भारत” की शुरुआत की है। उनका कहना है कि यह प्लेटफॉर्म दिव्यांगों की आवाज बनेगा और उनके अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देगा।

खास बात यह है कि अम्मोल वालके खुद भी दिव्यांग हैं। लेकिन उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और आज वे एक सफल बिजनेसमैन और प्रभावशाली नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। यही कारण है कि उनकी बात को गंभीरता से सुना जा रहा है।

अब सवाल यह है क्या सरकार “वन नेशन वन पेंशन” पर विचार करेगी? क्या देशभर में दिव्यांगों को समान पेंशन मिल पाएगी? आने वाले समय में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।

दिव्यांगों की पेंशन को लेकर उठी यह मांग क्या नई नीति की शुरुआत बनेगी या फिर सिर्फ बहस तक सीमित रहेगी? यह देखना बेहद अहम होगा।

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