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Nagpur BJP में बगावत, 80 कार्यकर्ताओं का इस्तीफा, टिकट बंटवारे से मचा घमासान

नागपुर नगर निगम चुनाव से ठीक पहले भाजपा को उसके ही गढ़ में बड़ा झटका लगा है। प्रभाग 16 डी से पार्टी के 80 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

टिकट बंटवारे को लेकर स्थानीय नेताओं की अनदेखी और बाहरी उम्मीदवारों को तरजीह देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

स्थिति इतनी गंभीर है कि बगावत सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि नेताओं के घरों तक पहुंच गई है। तो आखिर क्या है पूरी कहानी और किसे मिलेगा इस अंदरूनी कलह का फायदा, चलिए विस्तार से बताते हैं।

15 जनवरी को होने वाले नागपुर नगर निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर जबरदस्त असंतोष सामने आया है।

प्रभाग 16 डी में पार्टी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब 80 से अधिक कार्यकर्ताओं ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। इनमें 45 पदाधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

प्रभाग के पूर्व भाजपा अध्यक्ष गजानन निशितकर ने साफ कहा कि पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज किया।

उनका कहना है कि यह सीट ओपन थी और वे सबसे मजबूत दावेदार थे। प्रभाग के 24 बूथ उनके ही क्षेत्र में आते हैं, फिर भी टिकट एक ऐसी महिला उम्मीदवार को दे दिया गया, जो न तो स्थानीय हैं और न ही प्रभाग की निवासी।

वहीं भाजपा नागपुर इकाई के अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने इस्तीफों को हल्के में लेने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस्तीफों की खबरें फिलहाल सोशल मीडिया तक सीमित हैं और उन्हें किसी का लिखित इस्तीफा नहीं मिला है।

लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। टिकट बंटवारे की आंच अब नेताओं के निजी जीवन तक पहुंच चुकी है। पूर्व मेयर अर्चना डेहनकर के घर पर उस वक्त हंगामा मच गया।

जब उनके पति विनायक डेहनकर ने भाजपा से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। बताया जा रहा है कि इसी फैसले से नाराज होकर अर्चना डेहनकर अपने मायके चली गईं।

विनायक डेहनकर का कहना है कि वे 1984 से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस बार प्रभाग 17 में स्थानीय कार्यकर्ताओं को मौका देने के बजाय बाहरी और यहां तक कि पूर्व कांग्रेसी नेताओं को टिकट दिया गया। इसी से आहत होकर उन्होंने बगावत का रास्ता चुना।

सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ में सियासी समीकरण उलझे हुए हैं। नागपुर में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन तो कायम है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर असंतुलन साफ दिख रहा है।

भाजपा ने 143 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि शिवसेना को सिर्फ 8 सीटें मिली हैं।

विपक्ष की हालत भी बेहतर नहीं है।।कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार गुट और शिवसेना यूबीटी अलग-अलग मैदान में हैं।

एनसीपी शरद पवार गुट के सूत्रों ने कांग्रेस पर धोखे का आरोप लगाते हुए कहा है कि तय सीटों पर भी कांग्रेस ने आखिरी वक्त पर अपने उम्मीदवार उतार दिए।

कुल मिलाकर, नागपुर नगर निगम चुनाव से पहले राजनीति में भरोसे की दीवारें दरकती नजर आ रही हैं।

नागपुर में भाजपा की यह अंदरूनी कलह चुनावी नतीजों को किस दिशा में ले जाएगी, क्या बागी उम्मीदवार खेल बिगाड़ेंगे या फिर पार्टी हालात संभाल पाएगी इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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