टिकट बंटवारे को लेकर स्थानीय नेताओं की अनदेखी और बाहरी उम्मीदवारों को तरजीह देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
15 जनवरी को होने वाले नागपुर नगर निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर जबरदस्त असंतोष सामने आया है।
प्रभाग के पूर्व भाजपा अध्यक्ष गजानन निशितकर ने साफ कहा कि पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज किया।
उनका कहना है कि यह सीट ओपन थी और वे सबसे मजबूत दावेदार थे। प्रभाग के 24 बूथ उनके ही क्षेत्र में आते हैं, फिर भी टिकट एक ऐसी महिला उम्मीदवार को दे दिया गया, जो न तो स्थानीय हैं और न ही प्रभाग की निवासी।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। टिकट बंटवारे की आंच अब नेताओं के निजी जीवन तक पहुंच चुकी है। पूर्व मेयर अर्चना डेहनकर के घर पर उस वक्त हंगामा मच गया।
विनायक डेहनकर का कहना है कि वे 1984 से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस बार प्रभाग 17 में स्थानीय कार्यकर्ताओं को मौका देने के बजाय बाहरी और यहां तक कि पूर्व कांग्रेसी नेताओं को टिकट दिया गया। इसी से आहत होकर उन्होंने बगावत का रास्ता चुना।
भाजपा ने 143 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि शिवसेना को सिर्फ 8 सीटें मिली हैं।
विपक्ष की हालत भी बेहतर नहीं है।।कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार गुट और शिवसेना यूबीटी अलग-अलग मैदान में हैं।
एनसीपी शरद पवार गुट के सूत्रों ने कांग्रेस पर धोखे का आरोप लगाते हुए कहा है कि तय सीटों पर भी कांग्रेस ने आखिरी वक्त पर अपने उम्मीदवार उतार दिए।
कुल मिलाकर, नागपुर नगर निगम चुनाव से पहले राजनीति में भरोसे की दीवारें दरकती नजर आ रही हैं।
नागपुर में भाजपा की यह अंदरूनी कलह चुनावी नतीजों को किस दिशा में ले जाएगी, क्या बागी उम्मीदवार खेल बिगाड़ेंगे या फिर पार्टी हालात संभाल पाएगी इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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