

लेकिन मनीष तिवारी ने बतौर कांग्रेसी अपनी पार्टी और तत्कालीन मनमोहन सरकार की खामियां बताई इसके लिए भी जिगरा होना चाहिए क्योंकि आज दूसरी पार्टियों में लाख खामियां हों लेकिन नेता चमचागिरी करने के सिवाय कुछ नहीं कर रहे हैं। खामियां बताने वाले लेकिन मनीष तिवारी ने बतौर कांग्रेसी अपनी पार्टी और तत्कालीन मनमोहन सरकार की खामियां बताई इसके लिए भी जिगरा होना चाहिए क्योंकि आज दूसरी पार्टियों में लाख खामियां हों लेकिन नेता चमचागिरी करने के सिवाय कुछ नहीं कर रहे हैं। खामियां बताने वाले मनीष तिवारी अकेले कांग्रेसी नेता नहीं हैं, गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, सचिन पायलट जैसे कई बड़े नेता हैं जिन्होंने कांग्रेस में रहते हुए अपनी ही पार्टी के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाई और अब भी अपनी ही पार्टी में बनें हुए हैं।

15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के ऊपर चीनी सेना ने अचानक हमला बोल दिया था इस हमले में हमारे 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए लेकिन एक दो भाजपा नेताओं को छोड़कर किसी भी भाजपाई के हलक से चीन के खिलाफ आवाज नहीं निकली। सुब्रमण्यम स्वामी ने भले इसे मोदी की कमजोरी बताया हो लेकिन उनकी सुनता कौन है। ये हमला सीधे-सीधे चीन की एक ललकार थी, क्योंकि चीन भारत की सीमा में घुसकर भारत की जमीन हड़प रहा है। बॉर्डर पर बसे भारतीय गांवों में चीनी सेना भारतीयों को धमका रही है। भारतीय सेना से जब चाहे तब झगड़ा कर सामने आ रही है लेकिन भारत के प्रधान सेवक को इस बात से जरा फर्क नहीं पड़ता है।
2014 से लेकर आज तक न जाने कितने हमले भारतीय सेना के ऊपर हुए हैं लेकिन कोई आलोचना नहीं। यहां तक कि माननीय मोदी जी ने पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद पाकिस्तानी दल को बुलावा लिया कि देखो भैया तुम्हारे आतंकियों ने यहां हमला किया अब उनको पकड़ो। और बड़ी ही शान से पूरा एयरबेस घुमवाया।

वैसे ही 20 साल का सबसे बड़ा उरी हमला हुआ। पुलवामा हमला जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए। ये तो हमले जम्मू कश्मीर, लद्दाख में हुए हैं अब इनसे थोड़ा बाहर जाइये, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का गढ़चिरौली, असम, मणिपुर इत्यादि इन सबमें सेना के जवान मुख्य रूप से निशाने पर रहे हैं। लेकिन…..? बस नेताओं के कुर्ते का कलफ न बिगड़े, कपड़े एक दम चमचमाते होने चाहिए… कपड़ों से याद आया मुंबई हमलों के बाद कांग्रेस के तत्कलीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल को कपड़ों की वजह से इस्तीफा देना पड़ा था।

खैर आलोचना के लिए हिम्मत होनी चाहिए। और जो भी हो कांग्रेसी नेताओं में हिम्मत है। ये कांग्रेस की तारीफ नहीं बल्कि उन नेताओं की तारीफ है जो अपनी पार्टी की गलत नीतियों, गलत फैसले या गलतियों के खिलाफ खड़े हो जाते हैं और पार्टी छोड़ते नहीं पार्टी में भी बनें रहते हैं। लेकिन भाजपा के अंदर न वो हिम्मत है और न ही वो देशभक्ति का जज्बा है। भाजपा के अधिकतर नेता चापलूस हैं चमचे हैं उनमें देशभक्ति का जज्बा बिल्कुल भी नहीं है। जो है वो महज़ दिखावा भर है।
पेट्रोल डीजल जब महंगा हुआ था तो कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी पर सवाल उठाने लग गए थे। लेकिन भाजपा के नेता आपस में बांटकर खा रहे हैं शायद तभी तो आवाज नहीं उठाई। खाया तो कांग्रेसियों ने भी लेकिन कांग्रेस को सजा इतनी मिल गई कि अब सबका खाया पिया बाहर है… और इतना ही नहीं कांग्रेस को जो सजा मिल रही है “कांग्रेस की हालत अब मायावती जैसी हो गयी है…।”
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