सूर्य देव की उपासना वेदिक काल से सर्वत्र भारत में प्रचलित रही और पहले केवल मंत्रो और स्तुतियों आदि के रूप में थी।आगे चलकर ये मन्दिर और मूर्ति के साथ प्रचलित होती चली गयी।तब से अब तक अनेक विश्व प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर सूर्यदेव की उपासना के लिए प्रसिद्ध है।
सूर्य को वेदों में ईश्वर की आँखे कहा है।और सूर्य को पुराणों में ब्रह्म आत्मा भी कहा और पूज्य किया है।सूर्यदेव को सत्यनारायण भगवान भी कहते है और गायत्री मंत्र से इन्हीं की उपासना भी होती है।प्रातः सूर्य को जल देना प्रत्येक भारतीय का परम् कर्तव्य है।सूर्य को प्रातः नंगी आँखों से अपलक देखने यानि कुछ देर देखने से नेत्र की ज्योति तेज होती है और मुनष्य की आत्मा सहित शरीर में भी बल और तेज का संचार होता है।त्वचा के रोग मिटते है। यो माघ की चौदस की प्रातः को गंगा स्नान करते हुए गंगा जल को अंजुली में भरकर सूर्य को प्रदान करते हुए अपने पितरों को और अपने इष्ट देव व् देवी को मंत्रजप करते देते हुए साधना और उसके उपरांत ध्यान करते जप करने से पितृदोष और देवदोष आदि शांत होते और शुभ परिणाम मिलता है।और इसी लिए सूर्य की शक्ति की प्राप्ति के लिए उपाय स्वरूप सूर्य की धातु स्वर्ण के आभूषण पहने जाते है।तथा शाम को चन्द्रमा के उदय होने पर रात्रि को पूर्णिमासी को जप ध्यान करने से सूर्य की उज्वल चन्द्रिका प्रकाश की प्राप्ति होने से मन की शक्ति अद्धभुत रूप से विकसित होती है।यो माघ महीने में कुम्भ में स्नान करके जप तप और दान ला विशेष महत्त्व है।सूर्य की सात किरणे मनुष्य की कुण्डलिनी के 7 चक्रों को जाग्रत करने की शक्ति रखती और देती और उनकी प्रतिनिधि भी है,यो ज्योतिष में सूर्य मनुष्य की आत्मा का स्वामी ग्रह कहा गया है।की सूर्य की स्थिति यदि कमजोर है तो मनुष्य की आत्म शक्ति यानि इच्छा शक्ति निर्बल होने से जीवन में सही निर्णय नहीं ले पाने से बड़ी कठनाइयों का सामना करना पड़ता है।सूर्य को पिता कहा गया है।यो सूर्यलोक को पितृलोक भी कहते है।सूर्यदेव के अनेक मंत्र है,इनका बीज मंत्र सं है-विशेष मंत्र-ॐ सं सूर्यायै नमः है।गायत्री मंत्र के साथ साथ सावत्री और सविता विद्या शक्ति की भी साधना सूर्य की ही साधना का मुख्य अंग है।यहाँ गायत्री कुण्डलिनी शक्ति है और सविता इंगला नाड़ी और सावत्री पिंगला नाड़ी है।इन्हीं के एकीकरण यानि संगम में ज्ञान ध्यान स्नान करने से आत्म जागर्ति होती है।
यहाँ स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी ने अपनी स्वरचित सूर्यदेव स्तुति कही है।जो इस प्रकार से है कि….
!!🌞सूर्यदेव स्तुति👏!!
हे रवि भास्कर तेजप्रतापी
तुम से हैं नो खण्डा।
प्रत्यक्ष प्रकाशित इशबिंम्ब
तुम ब्रह्म केंद्र नभ् झण्डा।।
दैनिक चर्या विश्व चराचर
प्रातः पहर प्रभात।
तुम पोषक जनजीवन जग के
तुम्हीं पिता और मात।।
हर ऋतू तुम अमृतदाता
हर पहर सुखकर्णी।
समय तुम्हीं हो हर क्षण बनकर
दे सप्त रस किरण हर पर्णी।।
संध्या प्रभा छाया पत्नी
यम यमी मनु पुत्र शनि।
राशि वाहन सिंह सवारी
शिष्य हनुमान भक्तधनि।।
हे सवितु ॐ नांदी
सावत्री गायत्री मूल।
ज्ञेय अज्ञेय प्रज्ञा विधाता
तुम दर्शन मिटे हर शूल।।
हे सत्य सनातन तुम्हीं ज्ञातन
स्वर्ण प्रभा आभाधारी।
भक्तन पालक विश्व चालक
तुम्हें श्रद्धा नमन आभारी।।
*********
स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
www.satyasmeemission.org
Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Hindi News – Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines, current affairs, cricket, sports, business and cinema, Latest Hindi News, Breaking News in Hindi, Bollywood Gossip, Bollywood News, Top Hindi News Channel, Khabar 24 Express Live TV, Khabar24, Khabar24 Express

