30 अक्टूबर 2008 को असम में एक के बाद एक धमाके हुए थे जिनमें 88 बेकसूर लोग मारे गए थे और 550 से अधिक घायल हो गए थे। स्थानीय पुलिस ने इस केस में कई बेकसूर लोगों को गिरफ्तार कर लिया था और केस को बंद कर दिया था। लेकिन सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में ले लिया और इसके बाद सीबीआई के बहादुर अफसर एन.एस खड़ायत और उनकी टीम ने इस मामले की तह तक जाकर खुलासा किया।
इसमें उनको और उनकी टीम को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन बेकसूर लोगों को न्याय दिलवाने के लिए कमर कस चुके इस जाँबाज अफसर ने किसी बात की परवाह न की और इस केस से जुड़े आतंकवादियों को सलाखों के पीछे पहुंचवाने में मदद की।
एन.एस खड़ायत भले 2013 में रिटायर हो गए हों लेकिन उन्होंने इस केस में अपनी नज़र गड़ाए रखी।
यह एन.एस खड़ायत जैसे बहादुर जाँबाज अधिकारियों की ही बदौलत थी कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष अदालत ने असम में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट में 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसमें आतंकवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के प्रमुख रंजन दैमारी समेत अन्य नौ लोग शामिल थे।
बता दें कि रंजन दैमारी इस सिलसिलेवार बम धमाके मामले में मुख्य आरोपी था, जिसमें 88 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 540 अन्य घायल हुए थे। ये विस्फोट गुवाहाटी के गणेशगुरी, पानबाजार व कचहरी क्षेत्र में और बारपेटा, कोकराझार ओर बोंगाईगांव में 30 अक्टूबर, 2008 को करीब-करीब एकसाथ हुए थे।
इस मामले में CBI ने 2009 में NDFB प्रमुख और 22 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। आरोप-पत्र में 650 प्रत्यक्षदर्शियों के नाम थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पकड़े गए लोगों की कबूलनामे, कुछ आरोपियों द्वारा कॉल की जानकारी समेत 682 दस्तावेज शामिल थे।
बंगाल बैटल, सीबीआई बनाम पुलिस की लड़ाई :
सीबीआई बनाम पुलिस की लड़ाई, यानि पश्चिम बंगाल में सीबीआई को लेकर जिस तरह की सियासत इन दिनों पूरे देश में चल रही है ये पूरे देश में चर्चा का विषय बन गयी है।
पश्चिम बंगाल में सीबीआई VS पुलिस फिर ममता बनर्जी सरकार बनाम केंद्र सरकार के बीच की खींचतान। यहां जिस तरह की राजनीति हो रही है यह बेहद ही खतरनाक है। क्योंकि इससे केंद्र सरकार, सीबीआई, और ममता बनर्जी तीनों हो कि साख पर बड़ा सवाल है। एक ओर जिस शारदा चिटफंड घोटाले के मामले में सीबीआई अब तत्परता दिखा रही है वहीं दो बड़े आरोपी मुकुल रॉय, हेमंत बिस्वा ने भाजपा जॉइन कर लो है। इन दोनों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हो रहा है ना ही कोई पूँछताछ हो रही है। इस तरह भ्रष्टाचार पर केंद्र सरकार का यह दोहरा रवैया है।
वहीं सीबीआई बनाम सीबीआई की लड़ाई ने जिस तरह सीबीआई की साख को एक बड़ा धब्बा लगाया है वो भी कहीं न कहीं देश के लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
इन सब बातों पर सीबीआई के जाँबाज ऑफिसर असिस्टेंट डायरेक्टर (रिटायर) एन.एस खड़ायत से बात की हमारे एडिटर मनीष कुमार ने।
खबर 24 एक्सप्रेस के एडिटर मनीष कुमार के साथ एन.एस खड़ायत का बेबाक इंटरव्यू जरूर देखें :
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