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“राफेल” का बवाल: सीबीआई जांच की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने ये क्या कह डाला?

 

 

 

 

 

राफेल खरीद में हुए कथित घोटाले की जांच के मामले में दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीमकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सरकार और याचिकाकर्ताओं को हड़काते हुए कहा कि पहले सीबीआई अपने घर को तो ठीक कर लेने दीजिये इसके बाद कोई फैसला लेंगे।

 

 

बता दें कि सीबीआई में चल रहे घमासान को लेकर सुप्रीमकोर्ट भी चिंतित है। बुधवार को राफेल डील की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी के अपने ‘घर की स्थिति’ ठीक कर लेने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है।

 

 

कांग्रेस इस मामले को लेकर पहले ही सरकार के नाक में दम कर चुकी है। और अब स्थिति यह हो गयी है कि राफेल डील भाजपा के लिए नासूर बन चुकी है।

 

 

इसके अलावा सुप्रीमकोर्ट ने मोदी सरकार से फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल विमान की कीमत संबंधित जानकारियां मांगी हैं। सुप्रीमकोर्ट ने बुधवार को कहा कि सरकार 10 दिनों के भीतर एक सीलबंद कवर में कीमत संबंधित जानकारियां दे। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने फिर से यह स्पष्ट किया कि उसे राफेल सौदे से जुड़ी तकनीकी जानकारी नहीं चाहिए। अदालत ने केंद्र से कहा कि अगर विमान की कीमत विशिष्ट सूचना है और इसे साझा नहीं किया जा सकता है, तो इसके लिए ऐफिडेविट दाखिल करें।

 

राफेल खरीद में हुए कथित घोटाले पर सुप्रीममकोर्ट में याचिका पर याचिका डाली जा रही हैं

 

सीनियर वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा, पहले सीबीआई को अपना घर ठीक करने दो।

कोर्ट का यह बयान तब आया है, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण ने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से राफेल डील की जांच कराई जाए। सीजेआई के नेतृत्व में जस्टिस यूयू ललित और केएम जोसेफ भी इस पीठ का हिस्सा थे।
सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई मामले से जुड़ी याचिकाओं पर भी रोक लगा दी है, जिसमें वर्मा और अस्थाना द्वारा दायर की गई याचिकाएं भी शामिल हैं। जब प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल डील की जांच सीबीआई से कराई जाए जो कोर्ट ने कहा, आपको उसके लिए इंतजार करना होगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमानों की कीमत का विवरण सीलबंद लिफाफे में दस दिन के भीतर पेश करने का केन्द्र सरकार को निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि लड़ाकू विमानों को खरीदने का निर्णय लेने की प्रक्रिया में उठाए गए कदमों सहित यह विवरण सार्वजनिक किया जा सकता है और इसे याचिका दायर करने वाले पक्षकारों को भी उपलब्ध कराया जाए।

पीठ द्वारा आदेश लिखे जाने के बाद, अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इन विमानों की कीमत का विवरण संसद के साथ भी साझा नहीं किया गया है। इस पर पीठ ने अटार्नी जनरल से कहा कि यदि यह विवरण इतना ‘विशेष’ है और इसे न्यायालय के साथ भी साझा नहीं किया जा सकता है तो केन्द्र को ऐसा कहते हुए हलफनामा दाखिल करना चाहिए। पीठ ने वेणुगोपाल से अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा, ‘यदि कीमतें विशेष हैं और आप हमारे साथ इन्हें साझा नहीं कर रहे हैं तो कृप्या ऐसा कहते हुये हलफनामा दायर कीजिये।’

पीठ ने स्पष्ट किया कि इस समय वह विवरण जिसे सरकार ‘सामरिक और गोपनीय’ समझती है उसे न्यायालय के समक्ष पेश करे और इसे याचिकाकर्ताओं के वकीलों को नहीं दिया जा सकता है। न्यायालय ने अपने आदेश में इस तथ्य को नोट किया कि उसके 10 अक्टूबर के निर्देश के अनुरूप सरकार ने सीलबंद लिफाफे में एक नोट में 36 राफेल जेट लड़ाकू विमान खरीदने के निर्णय की प्रक्रिया के कदमों का विवरण दिया है।

पीठ ने कहा, ‘इस समय हम इस रिपोर्ट के मजमून के बारे में कोई राय दर्ज नहीं करेंगे। इसकी बजाय, हमारी राय है कि जो सूचना उक्त गोपनीय रिपोर्ट में न्यायालय को प्रेषित की गई है उसे सार्वजनिक दायरे में लाया जा सकता है और सभी मामलों में याचिकाकर्ताओं के वकीलों तथा व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओंको उपलब्ध कराया जा सकता है। पीठ ने कहा कि भारतीय ऑफसेट साझेदार के शामिल करने संबंधी विवरण भी सहजता से सार्वजनिक दायरे में आ सकता है और इसे याचिकाकर्ताओं को भी दिया जा सकता है।


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