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अगर घुटनों के दर्द से हैं परेशान तो डॉ० स्वतंत्र जैन के द्वारा बताई गयी जानकारी आपके लिए हो सकती है महत्त्वपूर्ण

 

अगर आप घुटनों के दर्द से बहुत ज्यादा परेशान हैं, काफी इलाज कराने के बाद भी आपको आराम नहीं मिल रहा है तो डॉ० स्वतंत्र जैन के द्वारा बताई गयी यह विधि आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है और घुटनों के दर्द से आपको हमेशा-हमेशा के लिए निजात दिला सकती है।

 

 

 

• घुटना बदलने का मायाजाल –
अभी हाल ही के समाचार पत्रों में छपी बड़ी खबर के अनुसार एक बड़े हड्डी विशेषज्ञ जो विदेश से सीख कर माइक्रोप्लास्टी पद्धति से घुटने को बदलने का ऑपरेशन करते हैं; उनके अनुसार भारतीय पद्धति से जमीन पर बैठने में निम्न दोष रहते हैं –
1. जमीन पर पालथी लगाकर बैठना घुटनों के लिए घातक होता है,
2. इससे उठते समय शरीर के वजन से छः गुना ज्यादा वजन घुटने पर आता है.
3. भारतीय स्टाइल के टॉयलेट का प्रयोग बिलकुल न करें.
उनके इस तरह के सुझावों से मैं आश्चर्यचकित और दुखी हूँ.
हमारे समाचार पत्र वाले भी कई बार बिना सोचे समझे कुछ भी छाप देते हैं.
वे यह नहीं सोचते हैं कि यह इन डॉक्टरों का लोगो के घुटना बदलने के व्यापार का एक घटिया तरीका है.
इस तरह की उल्टी शिक्षा देकर वे योगासन की सभी मुद्राओं के विपरीत बोल रहे हैं
इसका दुष्परिणाम यह होगा कि लोगो के घुटने जल्दी ही जाम हो जायेंगे और फिर हर व्यक्ति को पचास साल के बाद अपना घुटना बदलवाना ही पड़ेगा.
हमारे देश के सन्दर्भ में जब हम देखते हैं, तो हम पाते हैं कि हमारे देश के अधिकांश डॉक्टर पेमेंट बेसिस पर 20 से 30 लाख रूपये में MBBS की डिग्री लेते हैं, और पोस्ट-ग्रेजुएट करने में उन्हें 8-9 वर्ष और लगभग एक से दो करोड़ रूपये लगते हैं. अगर वे यह राशी बैंक से ब्याज पर ले, तो पोस्ट-ग्रेजुएट करने तक का कुल खर्च मय ब्याज के कम से कम दो से तीन करोड़ होगा.
फिर अगर वह डॉक्टर किसी क्षेत्र की विदेशों से विशेषज्ञता हासिल करता है, तो उसे पुनः कई करोड़ रूपये नई तरह के उपचार की मशीन और उसकी ट्रेनिंग पर खर्च करना होता है.
इस तरह पैसे खर्च कर विशेषज्ञ डॉक्टर बनने वाले हर व्यक्ति को अपनी लगाई गयी पूँजी पर बैंक का ब्याज ही हर माह का कम से कम तीन लाख चुकाना पड़ेगा और मूल पूँजी के चुकारे के लिए भी कम से कम तीन लाख देना होगा.
अब जो डॉक्टर हर माह छः लाख रूपये सिर्फ बैंक का चुकायेगा, वह अपने घर खर्च के लिए कम से कम कुछ राशी तो निकलेगा ही. इस तरह डॉक्टरी के बिजनेस में अधिकांश डॉक्टरों के लिए हर माह कम से कम सात लाख कमाना जरुरी है या सरल शब्दों में कहें तो उन्हें हर दिन कम से कम 25 हजार रुपये कमाना ही होगा, तब कही जाकर 8 से 10 सालों में उनके द्वारा लिए गए लोन का वे चुकारा कर सकेंगे.
उपरोक्त विवरण तो डॉक्टरों की मज़बूरी का हिसाब है, इतना तो उन्हें हर हाल में कमाना ही है, अन्यथा उन्हें बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा. हमारे देश के डॉक्टर भी किसी भी मामले में पीछे नहीं है और उन्होंने लोगों की दुःख-बीमारी में उनके शोषण के नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.
उपरोक्त विवरण में अगर डॉक्टरों का लालच और जुड़ जाता है तो यह रकम 50 हजार रूपये से एक लाख प्रति दिन तक हो जाती है. इस बड़ी रकम को हासिल करने के लिए हमारे देश के डॉक्टर्स मरीजों और उनके परिवार का शोषण करने के लिये कई तरह के तरीके निकालते हैं, जो निम्नानुसार हैं –
1. बड़े-बड़े अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श केम्प आयोजित करते हैं, जहाँ वे मरीजों को गैरजरूरी खून की जाँच, एक्सरे तथा अन्य शारीरिक जाँच के लिए भेजते हैं.
2. कहते हैं कि सभी जांचे रियायती दर पर कर रहे हैं.
3. छोटी-छोटी बिमारियों को बढ़ा-चढ़ा कर उसमे भी हजारो रूपये वसूलते हैं.
4. मरीज की बीमारी के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर उसके परिवार जन, पति/पत्नी आदि को भयाक्रांत कर उनका शोषण किया जाता है.
5. एक बीमारी के इलाज के लिये जाते हैं तो उसके साथ ही अन्य बीमारी के स्पेशलिस्ट के पास भेज कर उनसे भी सलाह ली जाती है, इस तरह मरीज का खर्च का मीटर बढ़ता रहता है.
6. कई तरह की काल्पनिक बीमारियों का भय दिखाकर मरीज के परिवारों का शोषण किया जाता है.
7. जो बीमारी नहीं है, उसकी भी दवाई दे दी जाती है.
8. जो तकलीफ नहीं है, उसका भी आपरेशन कर दिया जाता है.
9. सस्ती जेनेरिक दवाईयों की जगह दस से बीस गुना तक महँगी दवाइयां दी जाती हैं.
10. विदेशी कम्पनियों की बनाई नई दवाइयों का ड्रग ट्रायल बिना बताये करके लाखों-करोड़ों रुपयों का कमीशन विदेशी बैंकों में जमा करवाया जाता है.
सच्चाई यह है कि जमीन पर पालथी लगाकर बैठना, भारतीय स्टाइल के टॉयलेट का
प्रयोग करने से और हमारे इंडियन वैल्यूज के संस्कारों का प्रयोग करने से हमारी किडनी और घुटना भी बचा रहेगा.
हमारे शरीर की एक्सरसाइज की तरह ही हमारी किडनी और घुटने की भी एक्सरसाइज करना बहुत जरुरी होता है, ताकि वह अपने निम्न कार्य सुचारू रूप से कर सके –
1. शरीर की शुद्धि का कार्य,
2. शरीर में जल स्तर बनाये रखने का कार्य
3. ब्लड प्रेशर मेंटेन करने के लिए हारमोन उत्पादन का कार्य
4. शरीर से विजातीय और गैर जरुरी तत्वों को बाहर निकालने का कार्य.
हमारे स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए ये सब कार्य अत्यंत जरुरी हैं, लेकिन हमारी इंडियन वैल्यूज के संस्कार ही किडनी और घुटने की उचित देखभाल का कार्य करके हमे नीरोगी रख सकते हैं.
लेकिन आज की आधुनिकता में हम अपने संस्कारों को भूल गये हैं. हमारे इन संस्कारों से ही अपने आप किडनी और घुटने की एक्सरसाइज होती रहती थी. जिन घरों में आज भी ये संस्कार निभाये जाते हैं, उन घरों में आज भी इस तरह की कोई समस्या नहीं रहती है.
अतः हमारा प्रयत्न यह होना चाहिए कि हमारे परिवार में किसी को भी किडनी या घुटने के ट्रांसप्लांट करने की जरुरत नहीं पड़े.
हमारे विश्व प्रसिद्ध ये भारतीय संस्कार जिनसे किडनी में संकुचन होता है और घुटना भी मजबूत रहता है, उसकी एक्सरसाइज भी हो जाती है; वे इस तरह के होते हैं –
1. हमारे माँ-बाप, सभी बड़ो को, बुजुर्गों को सुबह उठते समय और रात को सोते समय झुक कर नमस्कार करना या घुटनों के बल धोक देने की परम्परा का निर्वाह करें.
2. सुबह-शाम मंदिर में जाकर घुटनों के बल झुक कर भगवान को नमस्कार करने की कोशिश करें.
3. हमारी प्राचीन जमीन पर बैठकर भोजन करने की परम्परा भूल को भूल कर अब हम डाइनिंग टेबल कुर्सी पर भोजन कर रहे हैं, अतः इसे बंद कर पुराणी जमीन पर बैठ कर भोजन करने की ने
4. फ्रेश होने के लिए अब हम टॉयलेट में घुटनों के बल इंडियन सीट पर नहीं बैठते हैं.
5. बैठ कर बाथरूम करने से भी किडनी और घुटने की मांस-पेशियों में संकुचन होता है, जिससे उसकी एक्सरसाइज होती है.
6. पहले हमारे घर की महिलायें किचन में बैठ कर खाना बनाती थी, लेकिन अब खड़े होकर रसोई बनती है.
7. अधिकाँश योग के आसनों से भी किडनी में संकुचन होता है, जिससे उसकी एक्सरसाइज होती है.
8. आपको पता ही है कि हमारे मुस्लिम भाइयों में रोज नमाज़ अदा करने की परम्परा है. इसमें की जाने वाली सभी मुद्राओं से भी मुख्यतः घुटने और किडनी में संकुचन होता है, जिससे उसकी एक्सरसाइज होती है. इसलिए उनमें नमाज़ को पांच बार अदा करने की परम्परा सदियों पूर्व से स्थापित की गयी है. उनका बैठने का तरीका भी योग का वज्रासन ही है. इससे भी पाचन और किडनी की प्रणाली को सुचारू रखने में मदद मिलती है.
9. रात्रि को खाना और जमीकंद खाना और शाकाहारी भोजन से भी किडनी को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है.
10. शराब पीना व धूम्रपान या तम्बाखू खाने से किडनी पर बहुत बुरा असर होता है.ते हों, तो इन्हें बंद करें.
11. कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक का प्रयोग बंद कर दें.
12. खाने में नमक कम करें या सिर्फ सेंधा नमक का ही प्रयोग करें.
13. ताजे फल-सब्जी का प्रयोग ज्यादा करें.
14. मोटापा और ज्यादा वजन न बढ़ने दें.
15. रक्तचाप और केलोस्ट्रोल को नियंत्रण में रखें.
16. किसी भी तरह की बीमारी में दर्द या एलर्जी की दवाइयों का प्रयोग न करें.
17. किसी भी बीमारी के उपचार के लिए एलोपैथी या आयुर्वेदिक कम्पनी की दवाई को लम्बे समय तक लेने से भी किडनी ही हर हाल में सबसे पहले डेमेज होती है.
अगर आप किसी भी तरह को घुटने या किडनी की बीमारी से बचना चाहते हैं, या अपनी खराब हो रहे घुटने या किडनी को बचाना चाहते हैं, तो उपरोक्त इंडियन वैल्यूज को अपनाएं और स्वस्थ रहें.


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4 comments

  1. Sar,mere uncle ko ghutno ka dard bohut hota hai. Please koi upeai batai.. Ham bohut paresan hai..

  2. Bahot hi badhiya sahab aap achi information dete hai ji

  3. Very good information sir

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