
छठ पूजा को में बस कुछ ही दिन शेष बचे हैं। बिहार, झारखंड उत्तर प्रदेश, बंगाल और नेपाल में प्रमुख रूप से मनाया जाने वाला ये पर्व विशेष महत्व रखता है। बीते कुछ सालों में छठ पर्व भारत में ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है या यूँ कहें कि पूर्वोत्तर भारत के लोग जिस प्रदेश या देश में रहते हैं वो उसी जगह छठ पूजा करते हैं। अमेरिका में भी बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा में हिस्सा लेते हैं।
कार्तिक शुक्ल को मनाया जाने वाला पर्व यानि छठ पूजा का चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व कई मायनों में खास होता है। इस पर्व में सूर्य भगवान की पूजा होती है और ये सूर्य भगवान में लोगों की अपनी गहरी आस्था के साथ मनाया जाने वाला यह लोकपर्व बीते कुछ सालों में समूचे देश ही नहीं वरन देश के बाहर भी लोकप्रिय हो चुका है। दीपावली के ठीक 1 हफ्ते बाद आने वाला ये पर्व इस इस बार 26 अक्टूबर से शुरू होगा।

जन्म कुंडली में स्थित चन्द्रमा, सूर्य, मंगल और बुध ग्रहों का संबंध आत्मविश्वास एवं आत्मबल से होता है। जिन जातकों में ये चारों ग्रह शुभ स्थिति में, उच्च अथवा शुभ ग्रहों से दृष्ट होते हैं, उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ सोच-विचार एवं शीघ्र निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता होती है। ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार, चंद्र ग्रह, मन, भावना, विचारधारा आदि का कारक होने से मन की आंतरिक शक्ति को नियंत्रित करता है।
वहीँ सूर्य आत्मा, इच्छा शक्ति एवं ऊर्जा का कारक है तो मंगल को शारीरिक एवं आत्मिक बल का कारक माना गया है। बुध ग्रह तो वैसे ही संकल्प शक्ति और दृढ़ संकल्प उत्पन्न करने में सक्रिय भूमिका निभाता है। बुध के अशुभ होने पर मनुष्य के प्रयास तिनके की तरह हवा में उड़ जाते हैं। कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल या बुध नीच के हों अथवा कुंडली के छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठे हों तो अपनी अशुभ स्थिति के कारण इन ग्रहों का नकारात्मक और अशुभ प्रभाव जातक पर अवश्य पड़ता है।

इन ग्रहों की महादशा अथवा अन्तर्दशा आने पर भी जातक का जीवन प्रभावित होता है। परिणामस्वरूप जातक में मानसिक अस्थिरता, अशांति, तनाव, चिंता, नकारत्मक सोच, आत्मविश्वास में कमी, कार्यों के सम्पादन में अनिच्छा, धैर्य की कमी आने से उसका जीवन असफलताओं के जाल में उलझकर रह जाता है।
आत्मविश्वास एवं आत्मबल की वृद्धि के लिए सूर्य को मजबूत करना आवश्यक है। प्रातः उठकर सूर्य नमस्कार, सूर्य को तांबे के बर्तन से जल चढाना तथा प्रातः उठकर अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके उनकी सेवा करना सूर्य को मजबूत करने के आसान उपाय हैं।
चंद्रमा की मजबूती के लिए चांदी में मोती धारण करना, माता की सेवा करना और पूर्णमासी का व्रत रखना सटीक उपाय है।
हिंदू धर्म के शास्त्रों में सूर्य पूजा के लिए कई मंत्र बताए गए हैं, इन मंत्रों का जप सुबह-सुबह करना चाहिए। रविवार से शुरू करके हर रोज सूर्य मंत्रों का जप करें और सूर्य को जल अर्पित करें। ये उपाय सभी सुख प्रदान करने वाला माना गया है और सूर्य नमस्कार करने से बल, बुद्धि, विद्या, वैभव, तेज, ओज, पराक्रम व दिव्यता आती है।
आपकी सभी परेशानियों से जल्द ही निजात मिल जाता है। जानिए रविवार के दिन किस तरह पूजा करनी चाहिए जिससे कि सूर्य भगवान जल्द ही आप पर प्रसन्न हो जाए।
रविवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें इसके बाद किसी मंदिर या घर में ही सूर्य को जल अर्पित करे इसके बाद पूजन में सूर्य देव के निमित्त लाल पुष्प, लाल चंदन, गुड़हल का फूल, चावल अर्पित करें। गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं और पवित्र मन से नीचें दिए हुए सूर्य मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह मंत्र राष्ट्रवर्द्धन सूक्त से लिए गए है। साथ ही अपने माथें में लाल चंदन से तिलक लगाए। ऊं खखोल्काय शान्ताय करणत्रयहेतवे।
निवेदयामि चात्मानं नमस्ते ज्ञानरूपिणे।।
त्वमेव ब्रह्म परममापो ज्योती रसोमृत्तम्।
भूर्भुव: स्वस्त्वमोङ्कार: सर्वो रुद्र: सनातन:।।
छठ पर्व में बस 5 दिन शेष हैं ख़बर 24 एक्सप्रेस अपने सभी दर्शकों को छठ पूजा की अग्रिम शुभकामनायें देता हैं। हम आपके सुखद और स्वस्थ जीवन की मंगलकामना करते हैं।
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