Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Breaking News / Mamata Banerjee ने चुनाव आयोग को बताया WhatsApp आयोग, सिर्फ नाम काटने के लिए हो रहा SIR, निशाने पर बंगाल

Mamata Banerjee ने चुनाव आयोग को बताया WhatsApp आयोग, सिर्फ नाम काटने के लिए हो रहा SIR, निशाने पर बंगाल

देश के लोकतंत्र से जुड़ा एक बड़ा सवाल आज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में खुद मौजूद होकर ममता बनर्जी ने कहा कि SIR का इस्तेमाल सिर्फ नाम काटने के लिए किया जा रहा है और बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

यहां तक कि उन्होंने चुनाव आयोग को व्हाट्सएप आयोग तक कह डाला। सवाल ये है कि क्या वाकई वोटर लिस्ट की आड़ में लोकतंत्र से छेड़छाड़ हो रही है?

सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर अहम सुनवाई हुई। इस सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में मौजूद रहीं, जो अपने आप में एक असाधारण घटना मानी जा रही है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि हालात बेहद गंभीर हैं। उनके मुताबिक 32 लाख मतदाता अभी तक सूचीबद्ध नहीं हो पाए हैं, 1.36 करोड़ नाम तथाकथित तार्किक विसंगति सूची में डाले गए हैं और 63 लाख मामलों की सुनवाई लंबित है।

उन्होंने कहा कि लोगों को चार-चार, पांच-पांच घंटे कतारों में खड़ा किया जा रहा है और आधार, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी खारिज किए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने खुद हस्तक्षेप करते हुए कहा कि SIR का इस्तेमाल सिर्फ नाम हटाने के लिए हो रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि शादी के बाद महिलाओं के उपनाम बदलने पर उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जा रहे हैं।

गरीब लोग जो रोजगार या मजबूरी में घर बदलते हैं, उनके नाम भी हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह सब अदालत के पुराने निर्देशों की भावना के खिलाफ है।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि भाजपा शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर बुलाकर बंगाल में नाम काटने का काम कराया जा रहा है। मतदाता पंजीकरण अधिकारियों के अधिकार छीने गए हैं और फॉर्म 6 तक भरने नहीं दिए जा रहे।

उन्होंने दावा किया कि लाखों जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया और अपील का कोई मौका नहीं दिया गया।

सबसे तीखा हमला तब हुआ जब ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को व्हाट्सएप आयोग कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अनौपचारिक आदेश व्हाट्सएप के जरिए जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले, फसल कटाई और लोगों की आवाजाही के समय इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है और ऐसा सिर्फ बंगाल में ही क्यों हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए व्यावहारिक समाधान निकालने की बात कही है और अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है। अदालत ने चुनाव आयोग को संवेदनशील रहने और नोटिस जारी करने में सावधानी बरतने का संकेत भी दिया है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या SIR सच में सुधार की प्रक्रिया है या फिर वोटर लिस्ट के जरिए सियासी खेल खेला जा रहा है। 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

अगर आप लोकतंत्र से जुड़े ऐसे ही बड़े और असरदार मुद्दों की सटीक और बेबाक खबरें चाहते हैं, तो चैनल को सब्सक्राइब करें, वीडियो को लाइक करें और अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।


Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

“कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी”

"कोट्यवधींचा खर्च, तरीही सुविधा नाहीत; भुसावळ नगरपरिषदेवर श्वेतपत्रिकेची मागणी"

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express | India's Leading Hindi News Network

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading