
नागपुर की पहचान मानी जाने वाली सीताबर्डी मार्केट आज विवादों के घेरे में है। ये वही जगह है जहां सालों से हज़ारों छोटे दुकानदार, फेरीवाले और पटरी पर बैठने वाले व्यापारियों ने अपना जीवन खड़ा किया। लेकिन हाल ही में नागपुर महानगरपालिका यानी मनपा ने एक कड़ी कार्रवाई करते हुए इस इलाके से इन तमाम फेरीवालों और दुकानदारों को जबरन हटा दिया।
अब सवाल उठता है कि कार्रवाई का कारण – ट्रैफिक या कुछ और?
मनपा का तर्क है कि यह कार्रवाई यातायात व्यवस्था सुधारने और पैदल यात्रियों को सुविधाजनक रास्ता देने के लिए की गई। लेकिन स्थानीय लोगों, दुकानदारों और समाजसेवियों का आरोप है कि इस कार्रवाई के पीछे की असली वजह “ग्लोकल मॉल” है।
दरअसल, सीताबर्डी की जिस सड़क को अतिक्रमण मुक्त बताया जा रहा है, वहीं “ग्लोकल मॉल” स्थित है। जानकारी के अनुसार, इस मॉल की दुकानें बिक नहीं पा रही थीं। जिसकी वजह से लोग मॉल में कम और रेहड़ी पटरी वालों से ज्यादा खरीदी करते थे।
वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि मनपा ने जानबूझकर बर्डी मार्केट की भीड़ को हटाकर इस मॉल की ओर मोड़ने की कोशिश की है।
फेरीवालों का दर्द – ‘हमने स्टे लिया था फिर भी दुकानें उजाड़ दीं’
सबसे बड़ी बात यह है कि फेरीवालों का कहना है कि उन्होंने कोर्ट से स्टे ऑर्डर लिया था, लेकिन इसके बावजूद मनपा ने उनकी दुकानों को हटा दिया। कई व्यापारियों का तो यही कहना है कि “हमने पूरी जिंदगी सड़क के किनारे ईमानदारी से गुज़ारी है, आज अचानक हमें यूं निकाल देना क्या न्याय है?”
हॉकर्स का आरोप, हमें शिफ्ट किया गया है नागपुर-अमरावती हाईवे पर’
मनपा द्वारा फेरीवालों को शिफ्ट किया गया है नागपुर-अमरावती हाईवे की तरफ, यानी शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक। अब ज़रा सोचिए, कोई ग्राहक अगर वहां खरीदारी के लिए रुकता है, तो गाड़ियों की लंबी कतार लग सकती है। ट्रैफिक जाम आम बात होगी और ऐसे हाईवे पर लोगों का रुकना या दुकान लगाना एक्सिडेंट को भी दावत दे सकता है।

सीताबर्डी है बाजार इलाका, हाईवे नहीं
सीताबर्डी मार्केट एक पारंपरिक मार्केटिंग ज़ोन है। यहां गलियों में लोग आराम से खरीदारी करते हैं, दुकानें पास-पास हैं, और पैदल यात्री ही ज़्यादातर ग्राहक होते हैं। यानी यह इलाका ट्रैफिक के लिए नहीं बल्कि व्यापार के लिए बना है। ऐसे में फेरीवालों को इस जगह से हटाना और उन्हें एक व्यस्त हाईवे पर ले जाकर बैठाना एक तरह से उनका व्यापार खत्म करने जैसा है।
ग्लोकल मॉल के लिए पार्किंग – पर आम लोगों के लिए नहीं?
ग्लोकल मॉल में पार्किंग की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। अब अगर कहा जाए कि बर्डी मार्केट से भीड़ हटाई गई ताकि वहां ट्रैफिक कम हो, तो मॉल में बढ़ती भीड़ और गाड़ियों के कारण ट्रैफिक और जाम की समस्या नहीं होगी क्या? क्या वहां भी ऐक्सिडेंट का खतरा नहीं होगा? तो फिर नियम केवल छोटे दुकानदारों के लिए ही क्यों?
लोगों का बढ़ता शक – ‘सारा खेल ग्लोकल मॉल के लिए?’
स्थानीय लोगों का विश्वास इस पूरी कार्रवाई से डगमगा गया है। उनका साफ कहना है कि जब तक मनपा पारदर्शिता से नहीं बताएगी कि किन नियमों के तहत यह सब हुआ, तब तक उनका शक ग्लोकल मॉल की ओर ही रहेगा। क्योंकि बात अब सिर्फ दुकानें हटाने की नहीं है, बात है रोज़गार की, ज़िंदगी की, और न्याय की।
अंत में एक सवाल – क्या एक मॉल की सफलता के लिए सैकड़ों घरों का चूल्हा बुझा दिया जाएगा?
अब सवाल उठता है — क्या हम इस तरह के “विकास” को स्वीकार करेंगे जिसमें छोटे दुकानदारों की रोज़ी-रोटी कुचली जाए? क्या फेरीवाले और ठेले पर बैठने वाले लोग इस शहर के नागरिक नहीं हैं? क्या केवल बड़े प्रोजेक्ट्स को सुविधा देना ही सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए?
सवाल बहुत हैं, लेकिन जवाब अब जनता और प्रशासन दोनों को मिलकर ढूंढना होगा।
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