
एक थी आम आदमी पार्टी, और एक थे केजरीवाल…
इन्होंने दावा किया था कि मोदी 7 जन्म लेने के बाद भी उन्हें हरा नहीं पाएंगे….
दिल्ली की जनता ने इन्हें भर भरकर वोट किया था। इतना वोट किया कि इनके दो टर्म में विपक्ष भी खोजने से नहीं मिल रहा था।
दिल्ली में कई तरह की समस्याएं हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या तो साफ पानी की है, यहां कई इलाकों में साफ पानी तो छोड़िए पानी ही नहीं आता था। तो केजरीवाल ने हर घर पानी पहुंचाने का वायदा किया, दिल्ली के कई इलाकों में पानी तो पहुंचा लेकिन साफ नहीं…. गंदा बदबूदार… यानी मिला जुला पानी आता रहा। कभी गंदा तो कभी ठीक ठाक।
खैर हम इस बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। हम विश्लेषण कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की हार की..।
आखिर वो क्या कारण थे जिनकी वजह से अरविंद केजरीवाल खुद भी चुनाव हार गए।
वैकल्पिक राजनीति के नारे के साथ आई आम आदमी पार्टी अन्ना हजारे के 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी थी,
और केजरीवाल ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के चेहरों में से एक थे। हाफ शर्ट और चप्पल पहनकर केजरीवाल ने एक ऐसी छवि बनाई जो आम राजनेता से बिलकुल अलग थी। जेब में रखी 10 रूपये वाली कलम एक साधारण नेता की छवि पेश कर रही थी, जिसने व्यवस्था को स्वच्छ रखने के लिए भारतीय राजस्व सेवा की नौकरी छोड़ दी।
अरविंद केजरीवाल सिंपल, साधारण सा दिखने वाला एक नेता जिसने सिर्फ राजनीतिक बदलाव की बात की। केजरीवाल ने भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करने की बात की… और इस बात का इतना प्रचार प्रसार हुआ कि बॉलीवुड, से लेकर बड़े समाज सेवी तक उनकी बातों में आए, यहां तक कि कई पत्रकारों ने तो नौकरी छोड़कर अरविंद केजरीवाल की राह पकड़ ली… अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने साल 2013 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और पहली ही बार 28 सीटें जीतने में कामयाब हो गए।
अब ऐसे में किसी भी दल के पास समर्थन नहीं था न भाजपा के पास और न कांग्रेस के पास… इसके बाद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली… मतलब जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर राजनीति की शुरुआत की उसी के साथ सरकार भी बना ली…।
सरकार तो बनाई बनाई यहां तालमेल की कमी भी खूब खली, केजरीवाल कांग्रेस पर काम न करने के आरोप लगाने लग गए और इसके बाद परेशान होकर कांग्रेस ने केजरीवाल से समर्थन वापस ले लिया और सरकार 49 दिन बाद गिर गई।
केजरीवाल फिर जनता के बीच गए… भाजपा और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए कि दोनों दल इन्हें काम नहीं करने दे रहे थे, हमें ऐसी सरकार चाहिए जो किसी के भरोसे पर न चले… दिल्ली की जनता इनकी बात मान गई और इसके बाद इन्हें जो बंपर वोट मिले वो इतिहास बन गए। दिल्ली की जनता ने 70 में से 67 सीट केजरीवाल की झोली में डाल दी।
वहीं भाजपा को महज 3 सीट मिली। कांग्रेस जीरो हो गई। कांग्रेस के जीरो होने की कहानी पर भी हम वीडियो बनाएंगे लेकिन आज केवल आम आदमी पार्टी की बात करेंगे।
फिर 5 साल बाद साल 2020 में विधानसभा चुनाव हुए… और इस बार भी शानदार प्रदर्शन रहा केजरीवाल ने 62 सीटें अपने नाम की… भाजपा को 8 और कांग्रेस को फिर जीरो सीट मिली।
अरविंद केजरीवाल राजनीति को बदलने के लिए सत्ता में आए थे।
केजरीवाल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मॉडल लागू करने की बात को लेकर 3 बार सत्ता में आए। यमुना की सफाई की कसम खाई थी। दिल्ली को पेरिस बनाने की बात की थी… दिल्ली के लोगों को साफ पानी और लगातार पानी देने की बात की थी..।
लेकिन इनमें से केजरीवाल ने क्या वायदे पूरे किए…
यमुना साफ हुई…. नहीं
शिक्षा व्यवस्था सुधरी… तो जबाव है… हां, लेकिन नए स्कूलों का निर्माण नहीं हुआ, कुछ स्कूलों को चमकाया और उन्हीं को मॉडल बताया गया…।
दिल्ली के लोगों को रोजगार मिला… तो जबाव है नहीं… वो सिर्फ आरोप लगाते रहे कि LG और भाजपा काम नहीं करने दे रहे हैं।
केजरीवाल ने अपनी राजनीति में केवल एक बात पकड़कर रखी वो थी LG काम नहीं करने दे रहे। भाजपा, कांग्रेस उनके काम में अड़ंगा लगाते हैं। तो एमसीडी भी हमें दे दो.. दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को सब कुछ दिया… लेकिन केजरीवाल ने उन्हें क्या दिया?
दिल्ली वालों को साफ पानी मिला… जबाव है…. पानी कई इलाकों में टैंकरों से भी आया… कहीं मिला कहीं नहीं मिला… कई इलाकों में बदबूदार पानी आया..।
यमुना की हालत बद से बदतर हो गई, दिल्ली में यमुना को गंदे नाले में तब्दील कर दिया गया।
केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से वायदे बहुत किए थे उन्होंने राजनीति की शुरुआत बेहद ही सादगी से की थी…। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और आम आदमी की बात करना… इन सब वजहों से उन्होंने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। लेकिन धीरे-धीरे उनकी सरकार पर सवाल उठने लगे।
और फिर एक समय ऐसा आया जब उनकी हार तय हो गई। इस हार के पीछे कई कारण थे:
सरकारी आवास को शीशमहल बनाने में भ्रष्टाचार,
यमुना की सफाई का झूठ और शिक्षा के क्षेत्र में कोई ठोस कदम न उठाना।
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सत्ता संभालने के बाद अपनी सरकार के कामकाज को पारदर्शिता और ईमानदारी के प्रतीक के रूप में पेश किया था। उन्होंने बार-बार यह दावा किया था कि उनकी सरकार में कोई भी भ्रष्टाचार नहीं होगा।
लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप में केजरीवाल के आधे मंत्री जेल चले गए। खुद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को जेल की हवा खानी पड़ी।
यहां तक कि उनके सरकारी आवास के बारे में जानकारी सामने आई, तो यह खुलासा हुआ कि केजरीवाल ने अपने आवास को शीशमहल में तब्दील कर दिया। और करोड़ों रुपए अपने सरकारी आवास पर खर्च कर दिए।
दिल्ली के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास को सरकारी जैसा होना चाहिए था, उसे एक आलीशान महल जैसा बना दिया गया। उनके इस कदम को लेकर जनता में आक्रोश फैल गया। इसे बनाने में करोड़ों रुपए खर्च हुए, वहीं सरकारी आवास को शीशमहल बनाने में भ्रष्टाचार की बात भी सामने आई।
खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़कर सत्ता में आए केजरीवाल अपने दामन को भी साफ नहीं रख पाए।
वहीं यमुना की सफाई के लिए करोड़ों खर्च किए गए, लेकिन यमुना की स्थिति जस की तस बनी रही।
नाले यमुना में गिरते रहे। और खुद यमुना नदी नाले में तब्दील हो गई।
नतीजा…. अरविंद केजरीवाल की हार
उनकी सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करने में असफल रहे। भ्रष्टाचार, झूठे वादे और योजनाओं की विफलता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। दिल्लीवासियों को यह एहसास हो गया कि जिन मुद्दों पर केजरीवाल ने जोर दिया था, वे बस चुनावी रणनीति का हिस्सा थे, जिनका कोई ठोस परिणाम नहीं निकलाना था।
वहीं बता दें कि केजरीवाल इंडिया गठबंधन का हिस्सा भी हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने सहयोगियों के साथ ही तालमेल नहीं रखा। उन्होंने गुजरात में जबरदस्ती कांग्रेस से कई सीटों की मांग की, पंजाब में अकेले चुनाव लड़े…यहां तक कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण भी बनें। ये सब मुद्दे भी सहयोगियों को परेशान करने वाले रहे।
इससे केजरीवाल की छवि मोल भाव करने वाले, अपना फायदा देखने वाले नेताओं जैसी हो गई… जिसे पब्लिक ने 2025 के चुनाव में पूरी तरह से नकार दिया…।
और बहुत हद तक केजरीवाल की इस हार में कांग्रेस की अच्छी खासी भूमिका रही।
खैर अब भाजपा की सरकार दिल्ली में बन चुकी है। जल्द ही मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान भी हो जाएगा।
अब ऐसे में भाजपा के लिए भी कम चुनौतियां नहीं होंगी। बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार, यमुना की सफाई इत्यादि इन सबमें दिल्ली की भाजपा सरकार को नंबर वन पर रहना होगा।
और वहीं केजरीवाल की तरह भाजपा को परेशान करने वाला या काम रोकने वाला भी तो नहीं होगा क्योंकि LG भी अपने, केंद्र में सरकार अपनी… तो अब ऐसे में हम यही उम्मीद लगा सकते हैं कि कम से कम भाजपा वो काम जरूर करे जो केजरवाल नहीं कर पाए… दिल्लीवासियों के चेहरे पर PR वाली मुस्कान नहीं प्यार वाली रियल मुस्कान आए।
धन्यवाद
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