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मनीष कुमार की कलम से!! क्या भाजपा के मास्टरस्ट्रोक में फंस गए नीतीश, क्या यही है नीतीश की राजनीति का अंत

कभी भाजपा के महागठबंधन एनडीए का हिस्सा रहे नीतीश कुमार मोदी के पीएम बनने से पहले गुजरात दंगों की वजह से इतने नाराज़ थे कि जैसे ही भाजपा ने मोदी को अपने पीएम उम्मीदवार बनाने की घोषणा की वैसे ही नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गये और उन्होंने कहा कि वो कभी अब भाजपा का हिस्सा नही रहेंगे। अनेकोनेक आरोप लगाने वाले नीतीश ने अपनी डगर बिलकुल अलग कर ली। और हाथ थाम लिया अपने सबसे पुराने दोस्त और राजनीति के सबसे बड़े दुश्मन लालू यादव का। लालू ने एनडीए से अलग हुए नीतीश का स्वागत बड़ी जोरों से किया और सरकार को अल्पमत में नहीं आने दिया।

लेकिन मोदी लहर इतनी तेज थी कि जिस प्रदेश में भी छोटे बड़े चुनाव हुए मोदी लहर ने वहां किसी को टिकने नही दिया। लोकसभा चुनावों में मोदी लहर का ही जादू था जो बिहार में सुशासन बाबू नीतीश धड़ाम से नीचे आ गए।

इसी वजह से बिहार में नीतीश लालू को कुछ ऐसा करना था जिससे कि मोदी लहर को रोका जा सके तब महागठबंधन का गठन हुआ। यहां सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन उधर 2019 की तैयारियों जोरों शोरों से चल रही थी। अब ऐसे में भाजपा को बिहार कैसे भी करके चाहिए था। सो परिणाम आपके सामने हैं।
लेकिन इन सबमें नीतीश या उनकी पार्टी जेडीयू का कितना फायदा हुआ ये तो आने वाला वक़्त जाने या फिर राजनीतिक पंडित।
लेकिन हमारी नज़र में अब महागठबंधन का अंत हो चुका है नीतीश भाजपा की गोद में जा बैठे हैं। और आज ही के दिन सरकार भी बना चुके हैं लेकिन 243 में से 71 सीट जीतने वाले नीतीश की राह इतनी आसान भी नही है। कुछ राजनीतिक पंडितों की मानें तो नीतीश ने ऐसा करके राजनीति की हत्या की है जिसका परिणाम नीतीश को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा।

सूत्रों की मानें तो कुछ जेडीयू के नेता भी नीतीश के इस फैसले से खफ़ा नज़र आ रहे हैं। उनका कहना है कि जिस वजह से हम बीजेपी से अलग हुए आज नीतीश फिर वहीं पहुंच गए। लेकिन ये आने वाला वक़्त ही बताएगा कि नीतीश की वजह से जेडीयू में एक बार फिर दो फाड़ हो जाएगा या सबकुछ सामान्य रहेगा।

आपको बता दें कि जब नीतीश ने सरकार बचाने के लिए लालू का साथ लिया था तो जेडीयू के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ मांझी के साथ चल निकली थे।
अब वैसा ही समय है और मंझे हुए लालू की मंझी हुई राजनीति है। सुना है जेडीयू के कई विधायक लालू के संपर्क में हैं। अगर ऐसा हुआ और सरकार दोबारा गिरी तो आप यकीन मानिए नीतीश के जीवन की ये सबसे बड़ी राजनीतिक भूल होगी और नीतीश की राजनीति की अंतिम पटकथा भी लिख जाएगी।

 

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मनीष कुमार
ख़बर 24 एक्सप्रेस


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