श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के अनुसार पितरों के लिए किया गया श्राद्ध आपके परिवार के उन मृतकों को तृप्त करता है जो पितृलोक की यात्रा पर हैं। इस तरह अपने पितरों को श्राद्ध के माध्यम से दी गई वस्तु पहुंचती है और वे श्राद्ध करने वाले को आशीर्वाद देते हैं। अधिकतर लोग श्राद्ध पक्ष में नए काम करने से बचते हैं, लेकिन जिन लोगों पर पितरो की कृपा होती है, उन्हें नए काम करने से लाभ होता है।
पितृपक्ष (भाग छः) यानि प्रायश्चित दिवस, श्राद्ध के समय में क्या करें क्या नहीं? कोई शुभ कार्य करने से क्या हो सकता है नुकसान? बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज
इसके अलावा पितरों का स्वप्न दर्शन देना भी बहुत सारी बातों का संकेत होता है। पितरों का स्वप्न दर्शन शुभ होता है तो बहुत सी बार यह हमें चेतावनी भी देता है। या “पितरों को जो इच्छाएं अधूरी रह गईं हों, या हमने उन्हें भुला दिया हो” उनको लेकर भी पितृ स्वप्न में दिखाई देते हैं।
पितरों का स्वप्न में आना क्या फल देता है? इसी पर आज श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज अपने कीमती विचार आप सबके सामने रख रहे हैं जिन्हें पढ़ने के बाद आपके मन की बहुत सारी शंकाएँ दूर हो जाएंगी और आपका जीवन सुखमय बन जायेगा।
तो आइए स्वामी जी से जानते हैं पितृपक्ष के सातवें भाग “पितरों का स्वप्न में दिखना” मिलता है सुख या होती है अनहोनी?
[भाग-7]
जब हमें जाने या अनजाने अपने पितरों के स्वप्न में चाहे दोपहर को हो या रात्रि के मध्य पहर या प्रातः दर्शन हो,तो हमें उस दर्शन को गम्भीरता से लेना चाहिए।क्योकि उसका हमारे दैनिक जीवन पर बड़ा फलदायी वर्तमान और भविष्य जीवन और उसके कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।
आओ जाने प्रभाव :-
1-यदि हमारे स्त्री हो या पुरुष पितृ रोगी या कमजोर शरीर के साथ हमें असहाय रूप में दिखें तो,उनका आगामी जन्म गरीब और दरिद्र परिवार में हुआ है।और वे दुखी है।यो वे आपसे जप तप दान करने की साहयता माँग रहे है।
2-यदि आपके पितृ आपके स्वप्न में अचानक दिखे और गायब हो जाये,तो ये आप पर आने वाली अचानक विपदा का संकेत है।यहां स्त्री पितृ का ऐसा दर्शन होना-परिवार में स्त्री पक्ष से आपको कष्ट या परिवार में किसी स्त्री पक्ष को कष्ट मिलने वाला है।स्त्री लक्ष्मी का प्रतीक होने से धन हानि धोखे से भी सम्भव है।ऐसे ही पुरुष पितृ का किसी पुरुष से धोखा और परिजन में किसी पुरुष को कष्ट बनेगा।
3-बच्चे के रूप में कोई कन्या या लड़का आपकी गोद में या आँगन में खेल रहा है।या आप स्त्री या कन्या का दूध पी रहा है।तो ये बाल्य अवस्था में मरे पितृ का आपसे दूध मांगना अर्थ है।तुरन्त अपने इष्ट या किसी कुत्ते को दूध पिला दें।अन्यथा आपकी शारारिक शक्ति की हानि होने से आपको बड़ी कमजोरी अनुभव होगी।
4-यदि आपके पितृ आपसे कुछ माँग रहे है।तो तुरन्त उठकर खाना बनाकर और नए कपड़े किसी ब्राह्मण या जरूरतमन्द को दे आये।इसमें जरा भी देरी नहीं करें की-जब गांव या कहीं जायेंगे तब दे या चढ़ा आएंगे।तुरन्त इस कार्य को करें।
5-यदि आपके पितृ का आधा शरीर स्वस्थ है और आधा शरीर निर्बल या कालापन लिए या रोगुण है।तो तुरन्त स्नान करके पूजाघर में जाकर ज्योत जलाकर उनके नाम से संकल्प करके गंगा जल छोड़े और जितना गुरु या इष्ट मंत्र जप कर सके उतना जप करें।और ऐसा 3 या 5 दिन अवश्य करें।और यदि आपके उन पितृ ने कोई गुरु या इष्ट मंत्र ले रखा था,तो वही करना उत्तम होगा।और आपको उनका गुरु मंत्र नहीं पता तो उनके गुरु भाई बहिन संगत के लोगो से जप कराये और उनके गुरु आश्रम को दान भेजें।तो तुरन्त आपको लाभ होगा।
6- किसी पितृ के दिखने के बाद आपकी धड़कन बढ़ी हुयी घबराहट होनी प्रारम्भ हो। तो ये उसी पितृ का आप पर आक्रोशित शाप है।
7-यदि कोई पितृ हमारे घर के किसी कमरे के दक्षिण कोने में चुप खड़े दिखे तो हम पर कोई गुप्त शत्रु की और से गुप्त कार्यवाही या किसी पास से ही तांत्रिक क्रिया या अफवाह आदि सम्बंधित मुसीबत आने वाली है।
8-और पश्चिम कोने में खड़े दिखे तो धन की हानि होने के योग है।यो इस समय लेन देन करते में विचार करें।
9-और उत्तर कोने में खड़े दिखे तो, यात्रा में चोरी जैसी हानि की घटना बनेगी।
10-और पूर्व कोने में खड़े दिखे तो दैविक प्रकोप और रिश्तेदारी की और से कोई परेशानी और मुसीबत या बुराई बनेगी।
उपाय:-यो ऐसे दर्शन समय उसी कोने में घी का एक दीपक जल दें और साफ कटोरी में जल रख दें।अगले दिन उसे पोधे में डाल दें।
11- आकाश में उड़ते पितृ तुम्हें दिखे,पर वे नहीं देखे तो-शीघ्र ही कोई लाभ की या सदूर यात्रा आदि सम्बंधित सुचना मिले।पर उससे आपको कोई लाभ नहीं मिलेगा।या उपेक्षा ही मिलेगी।
12-श्मशान में खड़े पितृ दिखे तो आप पर खास परिवार से ही ईर्ष्या वश श्मशान सम्बंधित तांत्रिक क्रिया या काला जादू क्रिया होने वाली है और आप मुसीबत में आने वाले है।
13-हमारे रोग के समय हमारे पास बहुत सारे पितृ शांत या दुखी खड़े दिखे तो हमारा रोग बढ़ने वाला है और प्रसन्न दिखें तो रोग ठीक होगा।
14- हमारे पैरों की और खड़े पितृ दिखे तो कष्ट बढ़ेगा,आयी या आने वालीमुसीबत बढ़ेंगीं।
15- हमारे सिरहाने खड़े दिखे तो आई या आने वाली मुसीबत से रक्षा होगी।
16- पितृ आपकी और हाथ बढ़ा रहे हो तब वे आपकी मुसीबत कष्ट में साहयता करेंगे।
17- हमारे सर पर हाथ फिराते हुए दिखे और हमें अच्छा लगे तो शीघ्र ही कष्ट संकट समाप्त होंगे।
18- खून में सने पितृ दिखना,ये हमारे पर मृत्युतुल्य संकट की पहचान है और पितृ भी उसमें बचाव नहीं कर पा रहे।
19- पेड़ पर बेठे और झाड़ के पास खड़े या बेठे पितृ दिखे तो तो पितृ को अच्छी योनि नहीं प्राप्त हुयी है और आने वाले समय में आपको व्रक्ष के पास से या आंधी में यात्रा करते में सावधानी बरतनी चाहिए।
20- कीड़े या कीचड़ में सने पितृ दिखे तो वो निम्न परिवार में जन्में है और परेशान भी है।और आप को या परिजन को भी कोई आरोप लगने से बड़ी परेशानी आने वाली है।
21- हमारे साथ चलते पितृ दिखे तो,पितृ शक्ति हमारी साहयक शक्ति बनी है और यात्रा पद प्रतिष्ठा आदि में भी साहयता मिलेगी।
22- हमारा पितरों से झगड़ा होता दिखे या हम उन पर क्रोध या अपशब्द कहते दिखे तो शीघ्र ही अपने बन्धुओं या परिजनों से बड़ा विवाद होने वाला और किसी बात से बड़े ही समय तक क्षुब्धता की प्राप्ति होने वाली है।
23- या पितृ हमें अपने पर क्रोधित होते दिखे तो,तो पैत्रक सम्पत्ति में भी और भूमि मकान स्थान आदि में कोई बड़ा दोष आने वाला है।जिसे भूमि दोष कहते है और कोई मंगल कार्य में बड़ा विध्न बनेगा।सन्तान सुख बांधित होगी।
24- हमारे साथ सोते पितृ दिखे तो शुभ और शांति की प्राप्ति होगी।मुसीबत टलेगी।
25- या हमसे किसी अनजान स्त्री या पुरुष का शारारिक सम्बन्ध बनाते दिखना,तो हमारी शक्ति क्षीण होने वाली है।शिक्षा परीक्षा और कार्य नोकरी आदि में बड़ी अड़चन आएगी और पता नहीं चलेगा की किसने ऐसा किया है।
26-या हम ऐसे ही किसी स्त्री या पुरुष से शारारिक सम्बन्ध बनाते देखे,तो हमें शक्ति की प्राप्ति होती है,पर साथ ही कोई अपने प्रेम और प्रिय से या व्यवसाय में पार्टनर से किसी बात को लेकर अलगाव बनेगा।
27- या किसी पितृ को जीवित होते देखना,तो कोई पुराना केस या बीमारी या विवाद आदि अचानक आपके सामने परेशानी लाएगा,पर उसका अंत आपके पक्ष में होगा।
28-अपने मृत पति या पत्नी से शारारिक सम्बन्ध बनाते देखना,ये रोग और मन की खिन्नता को बढ़ाएगा और जीवित परिजन से विवाद बनता है।और वो मृत जन लौटकर किसी और रूप में आपके परिवार या निकट आने वाला है।
29-यदि आपका मन और तन पितृपक्ष के आते ही बीमार या खिन्न होने लगे तो अवश्य ही आप पर पितृदोष है।ये प्रायोगिक ज्ञान है।तब आप कैसे भी करके अधिक से अधीन अपने इष्ट मंत्र या गुरु मंत्र या जो बने उस चालीसा आदि का अपने पितरों को संकल्पित करके पाठ करें।तब आप देखेंगे की-आपका मन तब प्रफुल्लित होता जायेगा और जानेगें की पितृदोष कम होता जा रहा है।
30-पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण आदि करने के उपरांत अमावस्या के बाद के एक सप्ताह में अपने स्वप्न का विशेष ध्यान रखें।वो बताएगें की-आपकी जपतप दान आपके पितरों को पहुँचा या नहीं और उनका आपको क्या सन्देश है।तब और स्ंकल्पित जप करें।
कुछ जन इन सब स्वप्नों को मनोविज्ञान से जोड़कर केवल स्मर्तिदोष कहकर टाल देते है।जबकि सनातन विज्ञानं इस विषय में सम्पूर्ण खोज कर चूका और उसके अनेक सहज और सफल उपाय ढूढ़ चूका है।यो मन-माया-मनुष्य का सम्बन्ध अनादि है और रहेगा।यो स्वप्न के अर्थ होते है।पर उनके नकारात्मक पक्ष का निदान करें।स्वयं ही जप तप दान करके।
उपाय:-ऐसे अनेक पितृ सम्बंधित दर्शय है।जिनका शुभ अशुभ अर्थ होता है।उसपर सदा ध्यान दे और अपना गुरु मंत्र का तुरन्त जप करें और प्रार्थना करें की-हे पितरों मुझसे कोई भी जाने अनजाने भूल हुयी हो,तो क्षमा करें और मेरा ये जप दान स्वीकार कर मेरा कल्याण कर रक्षा करें।तो अवश्य पितृ कृपा मिलेगी और आपको सुख प्राप्त होगा।और उसी दिन कुछ न कुछ दान पितरों के नाम से गोशाला या गुरु स्थान या मन्दिर के दानपात्र में अवश्य करें।
अमावस्या को अपने गुरु मंत्र का अधिक जप करते हुए यज्ञ करें तो अति ही उत्तम व् सिद्धिदायक होगा।
इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”
अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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