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Delhi Blast के बाद Al-Falah University सवालों के घेरे में, यहां से जुड़े प्रोफेसर ATS की गिरफ्त में

दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गई है. फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी अचानक सुर्खियों में है, क्योंकि यहां से जुड़े कई प्रोफेसर आतंक मॉड्यूल में पकड़े गए हैं.

सवाल ये उठ रहा है कि आखिर एक निजी यूनिवर्सिटी, जहां MBBS से लेकर इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई होती है… वहां से शिक्षित लोग आतंकी नेटवर्क का हिस्सा कैसे बन गए?


आपको बता दें, अल-फलाह यूनिवर्सिटी मुस्लिम बहुल धौज गांव में स्थित है और 1997 में इसकी शुरुआत इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी.

2019 में यहां MBBS कोर्स शुरू हुआ, 200 MBBS और 50 MD सीटों के साथ. लेकिन अब जांच एजेंसियों की नजर यहां के उन प्रोफेसरों पर है, जिन पर आतंक संगठनों से लिंक होने का शक है.


दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके में 13 लोगों की मौत के बाद इस यूनिवर्सिटी का नाम और भी ज्यादा चर्चा में आया है.

गिरफ्तार डॉक्टरों में से दो इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे, जबकि ब्लास्ट में मारा गया उमर नबी यहां असिस्टेंट प्रोफेसर था,यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि उनका इन लोगों से सिर्फ प्रोफेशनल रिलेशन था।

दिल्ली ब्लास्ट केस ने पूरे देश को हिला दिया है. लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट में 13 लोग मारे गए और कई घायल हुए.

इस हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे सवालों के सामने ला खड़ा किया है जो पहले कभी नहीं पूछे गए थे. इसी बीच जांच की दिशा उस यूनिवर्सिटी की ओर मुड़ी जिसने हमेशा खुद को आधुनिक शिक्षा और नैतिक मूल्यों का केंद्र बताया अल-फलाह यूनिवर्सिटी.

फरीदाबाद के धौज गांव में स्थित यह यूनिवर्सिटी 1997 में इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुई थी. बाद में 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट के तहत इसे विश्वविद्यालय का दर्जा मिला. यह संस्था अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित है. यहां इंजीनियरिंग, एजुकेशन और मेडिकल की पढ़ाई होती है. 2019 में NMC की अनुमति के बाद MBBS कोर्स शुरू हुआ और तब से हर साल 200 MBBS और 50 MD की सीटें भरी जाती हैं.

यूनिवर्सिटी का मेडिकल कॉलेज आधुनिक सुविधाओं से लैस है, 650 बेड का अस्पताल है, जहां MRI, CT स्कैन और एडवांस टेस्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. लेकिन इतने बड़े शैक्षणिक केंद्र पर अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है – आखिर यहां से जुड़े प्रोफेसर आतंक मॉड्यूल का हिस्सा कैसे बने?

गिरफ्तार डॉक्टरों में डॉ. मुज़म्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद शामिल हैं, दोनों किसी न किसी रूप में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे. इतना ही नहीं, ब्लास्ट में मारा गया डॉ. उमर नबी भी इसी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था. इस खुलासे ने जांच एजेंसियों को चौका दिया है.

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा है कि उनका इन प्रोफेसरों से केवल व्यावसायिक संबंध था और वे एक जिम्मेदार शैक्षणिक संस्था की तरह देश के साथ खड़े हैं. लेकिन जांच एजेंसियों के लिए अब चुनौती यह है कि एक उच्च शिक्षा संस्थान कथित तौर पर शिक्षित आतंकियों की जमीन कैसे बन गया?

क्या यह एक अलग-थलग घटना है? या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम सामने आने के बाद दिल्ली ब्लास्ट जांच और भी गहरी हो गई है. क्या इस यूनिवर्सिटी से और भी कड़ियां जुड़ी हैं? क्या ये सिर्फ एक शुरुआत है? सारी अपडेट्स आपको मिलेंगी यहीं.


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