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बुलंदशहर में भारतीय किसान यूनियन टिकैत की गुंडागर्दी.. शहर ठप, जनता बेहाल

बुलंदशहर की सड़कों पर आज भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं की खुली गुंडागर्दी देखने को मिली। सुबह से शहर के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैक्टर और गाड़ियों से जाम लगा दिया गया। मोती बाग से काला आम, भूड़ चौराहे से काला आम, चांदपुर रोड—हर तरफ बस भीड़ और बंद रास्ते।
इस जाम में स्कूली बच्चे घंटों फंसे रहे, एम्बुलेंस तक आगे नहीं बढ़ पाई। हालत यह रही कि पुलिस मौके पर मौजूद होते हुए भी बेबस नजर आई।

सबसे बड़ा सवाल — अगर किसान यूनियन को सरकार से शिकायत है, तो घेराव सरकार का क्यों नहीं? आम जनता को परेशान करने से किसकी जीत होती है?
रास्ते बंद होने से सरकार नहीं बल्कि लोग परेशान होते हैं। सरकार के ऊपर कुछ फर्क नहीं पड़ता क्योंकि चुनाव में वोट प्रचार को मिलते हैं। लोग सब भूल जाते हैं।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के कार्यकर्ता या टिकैत नेताओं के घरों का घेराव क्यों नहीं करते। इससे जनता का भी सहयोग मिलेगा।

लेकिन असल में नेता के घर जाने पर कार्रवाई होती है, डंडे पड़ते हैं… लेकिन आम आदमी को रोकना आसान है, क्योंकि वो प्रतिरोध नहीं करता।

जनता का गुस्सा साफ है — समस्याएं हों तो लड़ाई सरकार से हो, जनता से नहीं।
जनता को परेशान करके आप अपने लिए नफरत के बीज बो रहे हैं जैसे अभी हम ही आपके खिलाफ लिख रहे हैं। क्योंकि आपके मजे और परेशानी आम जनता को? ये बर्दाश्त के बाहर है।

क्योंकि जब इस पर सवाल किया जाता है तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत के कार्यकर्ता गुंडागर्दी पर उतर आते हैं। बहस करने लगते हैं मार पिटाई पर उतर आते हैं।
हूटर बजाती हुई कारें ये क्या किसानों की हैं? आम जनता को परेशान करना क्या ये किसानों का काम है?
ये किसान नहीं गुंडे हैं जो केवल गुंडागर्दी करके सरकार से अपनी बात मनवाने का आसान तरीका खोज रहे हैं।

Bureau Report : Khabar 24 Express


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