
पैराडाइज पेपर्स में नाम सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा अपनी सफाई देने लग गए हैं। उन्होंने अपनी सफाई में कि जब वो केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल हुए उसी समय तत्काल प्रभाव से डी लाइट कंपनी बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था और कंपनी के साथ अपनी भागीदारी को छोड़ दिया था।
जयंत सिन्हा ने सोमवार सुबह ट्वीट कर सफाई दी। सिन्हा ने ट्वीट किया, यह ध्यान देने वाली बात है कि यह लेनदेन डी. लाइट कंपनी के लिए एक ओमिडीयार प्रतिनिधि के रूप में किए गए थे। यह निजी उद्देश्य के लिए किया गया लेन-देन नहीं था। उन्होंने लिखा है,
उन्होंने कहा ओमिडीयार कंपनी छोडऩे के बाद डी लाइट बोर्ड में एक स्वतंत्र निदेशक के तौर में काम जारी रखने के लिए भी कहा गया था। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स की ओर से 1.34 करोड़ दस्तावेजों की जांच में टैक्स चोरी और पैसों को एक देश से दूसरे देश भेजने से जुड़े वित्तीय फर्मों के खुलासे में विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा, सासंद रवींद्र किशोर सिन्हा, दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन और संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त समेत कई हस्तियों के नाम शामिल हैं।
इस लिस्ट में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं। वहीं, दुनियाभर के इस लिस्ट में कुल 180 देशों के नाम हैं। इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है। जिन दस्तावेजों की छानबीन की गई है, उनमें से ज्यादातर बरमूडा की लॉ फर्म ऐपलबाय के हैं। 119 साल पुरानी यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक सदस्य है।
यह कंपनी अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेट अप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं। छानबीन में पता चला है कि ऐपलबाय का दूसरी सबसे बडी क्लाइंट एक भारतीय कंपनी है, जिसकी दुनियाभर में करीब 118 सहयोगी कंपनियां हैं।
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