
बिहार कांग्रेस में अध्यक्ष बदलने भर से अभी भी कुछ नहीं बदला है। कांग्रेस में उठापटक अभी भी जारी है। जो नाराजगी पहले थी अभी भी वही बनी हुई है। अब इसको विधायकों का लालच कहा जाए या पार्टी में नाराजगी। लेकिन विधायक हैं कि वो टूटने का इंतजार देख रहे हैं बस कमी है आंकड़ों की। कांग्रेस के विधायक अशोक चौधरी जो कि बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे। उनके पास इन विधायकों का समर्थन है।
बस एक डर है कि कहीं टूट गए और सदस्यता रद्द हो गयी तो ये ना इधर के रहेंगे ना उधर के।
ये सभी विधायक पहले भी नाराज चल रहे थे और अब जब प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया गया है तब भी विधायकों की नाराजगी ख़त्म नहीं हुई है। दरअसल, पार्टी की ओर से कैकब कादरी को राज्य का नया प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है।
अशोक चौधरी की जगह लेने वाले कादरी के सम्मान में राज्य के कांग्रेस हेडक्वॉटर में एक कार्यक्रम रखा गया था, लेकिन यहां कई विधायक नहीं पहुंचे।
एक अखबार की खबर के मुताबिक विधायक सिद्धार्थ सिर्फ कार्यक्रम में पहुंचे, जबिक करीब 15 विधायक और एमएलसी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी के घर उनसे मिलने पहुंचे। हालांकि उन विधायकों के नाम जाहिर नहीं किए गए, लेकिन इसे बगावत के तौर पर ही देखा जा रहा है।
कहा ये भी जा रहा है कि इन सभी विधायकों को जेडीयू भाजपा गठबंधन की तरफ से लालच भी दिया जा रहा है जिसकी वजह से ये सभी विधायक बार-बार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
हाईकमान की ओर से पद लिए जाने पर चौधरी ने भी खासी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उनकी दो पीढ़ियों ने बिहार में सिर्फ कांग्रेस के लिए काम लिया लेकिन उनका इस तरह से पद से हटाया जाना बेहद गलत है। पार्टी के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि कांग्रेस के फैसले का सम्मान करते हैं। वहीं कादरी के चार्ज लेने के बाद उन्होंने अपना पहला फैसला लिया कि वे सृजन घोटाले में नीतीश सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे।
प्रभारी अध्यक्ष बनाए जाने पर कैकब कादरी ने आलाकमान का आभार जताते हुए कहा है कि वह नई जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे। कांग्रेस नेता वीके ठाकुर ने कादरी को प्रभार दिए जाने का स्वागत किया है। अशोक चौधरी के हटने के साथ ही नए अध्यक्ष को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।
उल्लेखनीय है कि बिहार में गठबंधन टूटने के बाद से ही आलाकमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से नाराज था। पार्टी के अंदर गुटबाजी चरम पर थी और बयानबाजी जारी थी। चौधरी पर पिछले दिनों विधायकों को बरगलाने और पार्टी तोड़ने का आरोप लगा था। कांग्रेस नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद बिहार में कांग्रेस विधायकों का बिखराव होने से बच गया था।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने सभी विधायकों को दिल्ली बुलाकर बारी-बारी से उनसे बातचीत की थी, जिसमें चौधरी की भूमिका संदिग्ध बताई गई थी। विधायकों और पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रदेश अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। जिसके बाद पार्टी ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि चौधरी को जल्द बदला जाएगा।
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