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हस्तरेखा विज्ञान (भाग-5) हाथ में शनि पर्वत के महत्त्व को जानें, साथ ही जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को जाने : श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

हस्तरेखा विज्ञान के पांचवे भाग में आज श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज शनि पर्वत के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दे रहे हैं।

 

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हस्तरेखा विज्ञान (भाग-4) : हाथ में मंगल पर्वत के प्रभाव को जानिये, मंगल पर्वत कैसे देता है शुभ अशुभ लाभ? श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

हस्तरेखा में शनि पर्वत और रेखा का मनुष्य जीवन पर प्रभाव:-

हस्तरेखा शास्त्र में शनि ग्रह का पर्वत मनुष्य की बीच की ऊँगली के नीचे और ह्रदय रेखा तक होता है। ये जन्मकुंडली में भी अपनी शुभ या अशुभ स्थिति और दशा या महादशा में मनुष्य को ढईया यानि ढाई वर्ष, साढे साती सात वर्ष, अथवा महादशा यानि उन्नीस वर्षों तक अत्यधिक लाभ यानि राजा या रंक बना देता है।शनि यानि मनुष्य के किये सभी शुभ अशुभ कर्मों का फल यानि भाग्य नाम है।यो हाथ में शनि-पर्वत की स्थिति, आकार उभार और समीपवर्ती पर्वतों की संगति के भेद से शुभाशुभ एवं अशुभ दोनों प्रकार के फल का अनुमान लगाया जा सकता है।

हस्तरेखा में ‘शनि रेखा’ का प्रारम्भ हथेली के निचले भाग में कहीं से भी शुरू होकर शनि पर्वत तक या उसके नीचे तक होने से उसके सभी प्रभाव-दुष्प्रभावो के विषय में बताती है।
मध्यमा अंगुली के नीचे यह पर्वत बहुत भाग्यशाली मनुष्यों के हाथों में ही विकसित अवस्था में देखा गया है। शनि की शक्ति का अनुमान मध्यमा की लम्बाई बिना टेढी मेढ़ी यानि सीधे और सुंदर गठन को देखकर ही उत्तम भाग्य रहेगा और जीवन में संघर्ष कम ही आएंगे ये लगाया जा सकता है, यदि वह लम्बीं और सीधी है तथा गुरु और सूर्य की अंगुलियां उसकी ओर झुक रही हैं तो गुरु का ज्ञान और सूर्य की शक्ति के मिलने यानि सहयोग प्राप्त होने मनुष्य के स्वभाव और चरित्र में शनिग्रहों के गुणों की प्रधानता होगी। ये गुण हैं-यानि ऐसे व्यक्ति का भाग्य जल्दी जाग्रत होकर उसे शिक्षा में लाभ और सरकारी सर्विस या स्वयं से अर्जित व्यवसाय या राजनेतिक पद और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी।पर यदि अनामिका ऊँगली कुछ ज्यादा मध्यमा की और झुकी हो तो,व्यक्ति को शिक्षा में विध्न आता है,विषय और शिक्षा की दिशा में भी परिवर्तन होता है पद मिलता है और छीन जाता है और अचानक बदनामी या धोखा मिलता है।उच्च प्रसाशनिक परीक्षा में थोड़े से नम्बरों से सफलता नहीं मिलती है।और उसमे ये गुण होते है-
धार्मिकता,स्वाधीनता, बुद्धिमता, अध्ययनशीलता, गंभीरता, सहनशीलता, विनम्रता और अनुसंधान तथा इसके साथ अंतर्मुखी,परिवार से कुछ काटकर अकेलापन मिलता है।
शनि की ऊँगली का अनामिका ऊँगली की और झुकाव होने से ज्यादा शुभ परिणाम मिलते है,यानि सूर्य सभी नोकरी,पुत्र पिता,सुख है और उसमे शनि यानि भाग्य का संग मिलता है।पर सूर्य पर्वत पर सूर्य रेखा बिना कटी फ्टी और एक या सीधी हो तो अति उत्तम फल मिलेगा।गुरु यानि तर्जनी की और झुकाव हो तो भाग्य से जिस भी क्षेत्र में हो,चाहे चपरासी हो या रिक्शे वाला या साधू या अध्यापक उसे उस क्षेत्र में पद और सम्मान मिलने से उच्चता की प्राप्ति होती है,तर्जनी सीधी और साफ होनी चाहिए।
शनि के दुर्गुणों की सूची भी छोटी नहीं है,लम्बी जेल और लम्बे चलने वाले रोग और बड़े और पीढ़ी दर पीढ़ी के विवाद और मुकदमे और विषाद नैराश्य, अज्ञान, ईर्ष्या, तंत्रमंत्र के अनुष्ठानों में अधिक अंधविश्वास आदि इसमें सम्मिलित हैं। अतः शनि ग्रह से प्रभावित मनुष्य के शारीरिक गठन को बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है। ऐसे मनुष्य कद में असामान्य रूप में लम्बे होते हैं, उनका शरीर सुसंगठित लेकिन सिर पर बाल कम होते हैं। लम्बे चेहरे पर अविश्वास और संदेह से भरी उनकी गहरी और छोटी आंखें,जो होठों पर मुस्कान के बाद भी हमेशा उदास और खोयी सी रहती हैं।वे अपनी उत्तोजना, क्रोध और घृणा को वह छिपा नहीं पाते है।
इस पर्वत के दबे होने से मनुष्य अपने जीवन में अधिक सफलता या सम्मान नहीं प्राप्त कर पाता।
यदि मनुष्य के हाथ का रंग कालिमा या कुछ लाल रंग सा लिए होता है,तो उसका जीवन बड़ा संघर्ष में जाता है,यदि अंगूठें में लचक नहीं है,तो उसके अड़ियल स्वभाव से परिजनों और मित्रों को भी और स्वयं को सदा निर्णय से हानि होती है,क्योकि वो अपने मन की करता है और निर्णय गलत निकलते है।और यदि अंगूठा लचीला है, और हथेली का रंग कालिमा लिए है,तो उसे जादू और स्त्रियों के कारण जीवन में उन्नति से कई बार बड़ी हानि उठानी पड़ती है और वो दुसरो का पीछा करता है,उन्हें कमा कर देता है और लाभ नहीं या कम मिलता है। मध्यमा अंगुली भाग्य की देवी है।ऐसे व्यक्ति को थोड़ा सोच कर और रुककर कार्य करने चाहिए।और शनि रेखा यानि भाग्यरेखा की समाप्ति त्रिकोण या दो रेखाओ के साथ यदि इसी अंगुली की मूल या पर्वत में होती है,तो बहुत सफलता मिलती है,पर अंतिम समय में वो व्यक्ति परिवार से दूर म्रत्यु को पाता है।
पूर्ण विकसित पर ज्यादा उठा हुआ नहीं हो और किसी और ज्यादा झुकाव नहीं लिए हो, तो ऐसे शनि पर्वत वाला मनुष्य असाधारण और महाराजा तुल्य भाग्यवान होता है। ऐसे मनुष्य जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक उन्नति प्राप्त करते हैं। शुभ शनि पर्वत प्रधान मनुष्य,धार्मिक अनुष्ठान करने और कराने वाले बड़े यज्ञकर्ता या तांत्रिक, इंजीनियर, वैज्ञानिक, जादूगर, साहित्यकार, ज्योतिषी, बड़े फार्महाउस के मालिक कृषक अथवा रसायन शास्त्री और खदानों, खानों के मालिक होते हैं। शुभ शनि पर्वत वाले स्त्री-पुरुष प्रायः अपने माता-पिता की एकलौती संतान होते हैं तथा उनके जीवन में प्रेम और समाजिकता का सर्वोपरि महत्व होता है। बूढापे तक प्रेम में उनकी रुचि बनी रहती है, किंतु इससे अधिक आनंद उन्हें प्रेम का आडम्बर भरा नाटक रचने में आता है। उनका यह व्रति भरा नाटक छोटी आयु से ही प्रारंभ हो जाता है। वे स्वभाव से संतोषी और कंजूस होते हैं। कला क्षेत्रों में इनकी रुचि संगीत में विशेष होती है। यदि वह लेखक हैं तो धार्मिक गर्न्थो के शोधकर्ता और खोज के, रहस्यवाद उनके लेखन का विषय होता है।
अविकसित शनि पर्वत होने पर मनुष्य एकांत प्रिय, भटकता हुआ साधू और अपने कार्यों अथवा लक्ष्य में इतना तनमय हो जाते हैं कि घर-गृहस्थी की चिंता नहीं करते,परिणाम ऐसा मनुष्य चिड-चिडे और शंकालु स्वभाव के हो जाते हैं और उन्हें लोग पसन्द नही करते है तथा उनका शरीर रक्त की कमी से कमजोर होता है। उनके हाथ-पैर ठंडे होते हैं, और उनके दांत काफी कमजोर हुआ करते हैं। दुघर्टनाओं में अधिकतर उनके पैरों और नीचे के अंगों में चोट लगती है। यदि उनकी हृदय रेखा भी जंजीरा कार उलझी सी हो तो मनुष्य की वाहन या काले कुत्ते या बिजार की टक्कर आदि से दुर्घटना में मृत्यु भी हो जाती है।
शनि के क्षेत्र पर शनिवलय यानि चन्द्राकार जैसी अर्ध गोलाकार रेखा भी पायी जाती है, जो मनुष्य को अचानक राजनीती या सामजिक कार्यो से जोड़कर उसे जनसाधारण का नेता बना देती है,पर अहंकार या किसी व्यर्थ की निति के लागु करने से उसका पद और प्रतिष्ठा नष्ट हो जाती और शराब का व्यसन लगा रहता है।ये रेखा कटी हो तो कई बार पद मिलते है पर वे किसी काम के नहीं होते है।इन महत्वपूर्ण रेखाओं के अतिरिक्त इस पर्वत पर एक रेखा जहां सौभाग्य सूचक है। यदि यही रेखा या शनि पर्वत से कोई रेखा या रेखायें गुरु की पर्वत की ओर जा रही हों तो मनुष्य को सार्वजनिक मान-सम्मान प्राप्त होता है। इस पर्वत पर बिन्दु,तिल जहां दुर्घटना सूचक चिन्ह है, वैसे ही यहां क्रांस या रेखाओ का जाल मनुष्य को संतति उत्पादन की क्षमता को या किसी भी कारण से अंत में सन्तान विहीन कर करता है। नक्षत्र की उपस्थिति उसे घातक हथियार से हत्या या प्रेम या धोखा मिलने से आत्महत्या की ओर प्रेरित कर सकती है।गोल वृत का होना इस पर्वत पर स्थायी सम्पत्ति देना और शुभ होता है और वर्ग का चिन्ह होना अत्यधिक शुभ लक्षण है साथ ही ये वर्ग किसी रेखा से कटा हो तो अचानक धन प्रतिष्ठा की हानि और लम्बी जेल को देता है।स्पष्ट हो तो ये घटनाओं और शत्रुओं से बचाव के लिए सुरक्षा सूचक है, जबकि यहां रेखाओ का जाल होना अत्यधिक दुर्भाग्य का लक्षण है।
यदि शनि पर्वत अत्यधिक विकसित यानि चोटीदार होता है तो मनुष्य 22 या 31 या 45 वर्षों की उम्रों में निश्चित आत्महत्या कर लेता है।पैसा लेकर हत्या करने वाले हत्यारे, डाकू, ठग, अपराधी मनुष्यों के हाथों में यह पर्वत बहुत विकसित पाया जाता है और साथ ही उनके हाथ की रंगत लाल और कालिमा लिए होती है तब ऐसा होता है।
यदि इस पर्वत पर त्रिकोण जैसी आकृति हो तो मनुष्य योगी होता है और उसे अपने गुरु से सिद्धि मिलती है और त्राटक विद्या, गुप्तविधाओं में रुचि, विज्ञान, अनुसंधान, ज्योतिष, तंत्र-मंत्र सम्मोहन आदि में गहन रुचि और सफलता पाता है और इस विषय का ज्ञाता लेखक होता है। इस पर्वत पर मंदिर का चिन्ह भी हो ते मनुष्य प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति के रूप में प्रकट होते हैं और यह चिन्ह राजयोग कारक माना जाता है। यह चिन्ह जिस किसी की हथेलियों के पर्वत पर उत्पन्न होते हैं, वह किसी भी उम्रों में ही वह मनुष्य लाखों-करोडों-अरबों के स्वामी होते हैं। यदि इस पर्वत पर त्रिशूल जैसी आकृतियां हो तो वह मनुष्य एका-एक अचानक सब त्याग कर चाहे कम उम्र हो या मध्यम उम्र हो,उसमें दीक्षा लेकर सन्यासी बन जाते हैं। यह वैराग्य सूचक चिन्ह है। इसके अलावा शनि पर्वत का ह्रदय रेखा की और ढलाव मनुष्य के शुरुआत काल में भाग्यवान बनाता है और बीच आयु में हानि देकर फिर अंतिम आयु में भाग्यवान बनाता है।
शनि रेखा के नीचे कोई कोठरा या मछली बनी हो और शनि पर्वत तक रेखा जाये चाहे रुक कर जाये तो उसका भाग्य सदा संग देकर उसकी किसी योजना के पुरे होने से उसे उच्चता पर पहुँचा देता है।
चन्द्र पर्वत से चली भाग्य रेखा यदि जीवन रेखा में मिल जाये,तो जहाँ मिले और वहां से फिर शनि पर्वत की और जाये,तो अल्पायु या जल्दी में सरकारी नोकरी और सरकारी नोकरी वाला जीवनसाथी आदि की प्राप्ति होकर सफलता मिलती है।पर ये अंत में रुक गयी या किसी रेखा ने काट कर रोक दी,तो जीवनसाथी की म्रत्यु के बाद उसे दोनों सर्विस का लाभ मिलता है,पर बड़ा दुखी जीवन व्यतीत होता है।
चन्द्र से चलकर ये रेखा मस्तक रेखा पर समाप्त होने लगे,तो व्यक्ति जल्दी नोकरी या प्रसिद्धि और विदेश यात्रा करके मध्यायु में अपने किसी आदत या योजना से असफलताओं को प्राप्त करता है।
जीवन रेखा से निकलने वाली रेखा शनि पर्वत पर पहुँचे या उधर को जाये,तो व्यक्ति की भी निति या योजना या अपने विचार को लेखन आदि के माध्यम से बड़ा संगठन खड़ा करता है।बस रेखा का अंत अच्छा हो।
मस्तक रेखा से शनि पर्वत तक जाने वाली रेखा क़ानूनी या कम्पनी के प्लानर,एकांउटेंट पद या जासूसी विभाग या विदेश विभाग या विदेशी कम्पनी में कार्य आदि से लाभ पाता है।
शनि ऊँगली के तीनो खण्डों या पौरवों पे कहीं भी खड़ी रेखाएं हो,तो वे उसके व्यापारिक और राजनेतिक मित्र और सहयोगियों के विषय में बताती है और ये ही रेखा या पड़ी रेखाएं हो तो परिवारिक और मित्रों से अनावश्यक विवादों से और गुप्त शत्रुओं से या छोटे मुकदमे से हानि देती है और व्यापार में हानि भी बताती है और साथ में कोई एक ही गहरी पड़ी रेखा हो,तो बड़े घोटाले में फसने की और जहर दिए जाने से जीवन को खतरा बताती है और ऐसी छोटी रेखाएं हो,तो सन्तान सुख से वंचित बनाती है।
शनि ऊँगली के नाख़ून उभरा और थोडा लम्बा हो तो शुभ और धर्म में और परिवार में उन्नति देता है,पर स्वयं के कारण या आदत से जीवनसाथी से अन्तुष्टि नहीं देता।
और नाख़ून छोटा हो,तो तर्कशीलता और जल्दी जबाब देने के गुण से पढ़ाई में सफलता,पर लोगों और परिवार व् मित्रों में कुतार्किक छवि बनाकर वेमनस्य और कलह देता है।
यहाँ नाख़ून पे चन्द्राकार सफेद आक्रति हो तो बहुत शुभ और समय समय पर भाग्य के विरोधी होने पर भी सदा साहयता मिलने और आध्यात्मिकता में नवीनता और नवीन ज्ञान में विस्वास को देती है।
ये चन्द्र नहीं हो तो व्यक्ति केवल परम्पराओं का ही निर्वाह करने वाला रूढ़िवादी और जो मिल गया या भौतिकवादी विचार का बना रहता है।

उपाय:-

शनि की दशा शांति करने हित शनिवार को बीच की ऊँगली में शनि छल्ला पहने।
शनि मन्दिर में चना हलुआ बांटता रहे और पीपल के नीचे दीपक जलाना चाहिए व शनिदेव चालीसा और उनका मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का जप ओर हनुमान जी की पूजा-उपासना करना चाहिए।

विशेष उपाय:-

मध्यमा ऊँगली और पर्वत को थोडा दबाकर और सहलाकर बाकि उँगलियों को बन्द करके इसको थोड़ा खुली रखे और गुरु मन्त्र या शनि मंत्र के साथ जप करते मन की आँखों से शनि ऊँगली को ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर यानि उसके तीनों खण्डों और पर्वत का ध्यान करें।तो शनि के रेखा सम्बंधित दोष मिटकर बिना किसी महंगे उपाय के आपको चमत्कारिक शनि यानि भाग्य वृद्धि का लाभ मिल सभी क्षेत्रों में कल्याण होगा।

 

 

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ज्ञान लाभ के लिए श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के यूटीयूब

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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