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बुलंदशहर में साइबर क्राइम और स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में 1 करोड़ 25 लाख रुपये की बैंक ठगी के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। मामला पंजाब नेशनल बैंक का है।
इस मामले में 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस जांच में यह बात साफ तौर पर सामने आ रही है कि इस पूरे फ्रॉड का मास्टरमाइंड बैंक मित्र आकाश कुमार था, जिसने भरोसे और सिस्टम की लापरवाही का फायदा उठाकर इतनी बड़ी ठगी को अंजाम दिया।
इस मामले में सबसे अहम और संवेदनशील पहलू यह है कि पूर्व बैंक मैनेजर अजय कुमार पासवान ने आकाश पर आंख बंद कर भरोसा कर लिया और उनकी इसी लापरवाही से ऐसा हो गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल, सीपीयू, मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस, बायोमेट्रिक डिवाइस, पासबुक, प्रिंटर, लैपटॉप, डाटा एडेप्टर, 7 चेक बुक, एक कैंसिल चेक, 25 फर्जी पर्चियां, 14 पासबुक और 14 रबर स्टांप बरामद किए हैं, जो इस संगठित ठगी की ओर इशारा करते हैं।
कैसे रचा गया ठगी का जाल
पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी आकाश कुमार वर्ष 2022 से Punjab National Bank की क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम शाखा, Bulandshahr में बैंक मित्र के रूप में कार्यरत था। इसी दौरान उसने बैंक आने वाले उन ग्राहकों को निशाना बनाया, जो उसके माध्यम से फिक्स्ड डिपॉजिट कराना चाहते थे।
आकाश ने रोजमर्रा की जिम्मेदारियों का फायदा उठाते हुए पूर्व बैंक मैनेजर अजय कुमार पासवान के विश्वास को पूरी तरह जीत लिया। अजय पासवान को जरा भी अंदेशा नहीं था कि जिस व्यक्ति पर वह भरोसा कर रहे हैं, वही उनके नाम और बैंक की व्यवस्था का दुरुपयोग कर इतना बड़ा अपराध कर देगा।
कमीशन नहीं, लापरवाही बनी वजह
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कहना गलत होगा कि बैंक अधिकारियों ने लालच या कमीशन के लिए इस ठगी में साथ दिया। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मामूली लालच में आकर ऐसा जोखिम नहीं उठाता। यह पूरा मामला भरोसे में की गई लापरवाही और आकाश द्वारा उस भरोसे के दुरुपयोग से जुड़ा है।
आकाश ने बैंकिंग सिस्टम की बारीकियों का इस्तेमाल करते हुए एफडी के नाम पर रकम डेबिट की और उसे अपने परिजनों व परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।
जब मामला सामने आया, तो परिस्थितियां ऐसी बनीं कि पूर्व बैंक मैनेजर अजय पासवान पर ही उंगलियां उठने लगीं, जबकि उनकी भूमिका जानबूझकर अपराध करने की नहीं, बल्कि सतर्कता में चूक की रही।
अजय पासवान क्यों बने बलि का बकरा
इस केस में अजय पासवान की संलिप्तता सिर्फ लापरवाही की है। उन्होंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया।
वहीं पुलिस जांच में यह सामने आ रहा है कि आकाश ने जानबूझकर उन्हें अपने भरोसे में रखा, ताकि किसी को शक न हो और ठगी लंबे समय तक चलती रहे।
जब घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तो सिस्टम की जिम्मेदारी सबसे पहले शाखा प्रबंधन पर आ गई।
केस दर्ज, जांच जारी
शाखा प्रबंधक पिंकी रानी की तहरीर पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। साक्ष्यों के आधार पर गुरुवार को सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आकाश ने किन-किन प्रक्रियात्मक कमियों का फायदा उठाया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।
यह मामला केवल आर्थिक अपराध का नहीं, बल्कि एक अधिकारी के भरोसे, प्रतिष्ठा और जीवन से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है, जिस पर जांच एजेंसियों की निष्पक्ष और संवेदनशील कार्रवाई बेहद जरूरी मानी जा रही है।
साक्ष्यों के आधार पर गुरुवार को आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तार आरोपियों में बैंक मित्र आकाश कुमार, पूर्व बैंक प्रबंधक अजय कुमार पासवान, सचिन कुमार, रोचित कुमार, निर्भय सिंह माल्या और अनिकेत कुमार शामिल हैं। पुलिस अब कमीशन चैन, अंतिम लाभार्थियों और आंतरिक मिलीभगत की गहन जांच कर रही है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बैंकिंग लेनदेन के दौरान सतर्क रहें, एफडी/डिजिटल ट्रांजैक्शन की नियमित जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को दें।
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