Breaking News
BigRoz Big Roz
Home / Bihar / Breaking News : बीजेपी से नीतीश कुमार का हुआ मोह भंग! नड्डा, शाह से नहीं की मुलाकात, बिहार की राजनीति में जल्द मिल सकती है बड़ी खबर

Breaking News : बीजेपी से नीतीश कुमार का हुआ मोह भंग! नड्डा, शाह से नहीं की मुलाकात, बिहार की राजनीति में जल्द मिल सकती है बड़ी खबर

बिहार में अब ऐसा क्या हुआ जिससे सियासी घमासान मच गया है? अब इसे सियासी भूचाल कहें या फिर बिहार की राजनीति में एक बड़ा तूफान कहें। जो भाजपा के भारत विजय अभियान में बड़ा संकट पैदा कर सकता है। भाजपा की चाहत है कि चाहे जैसे भी संभव हो लेकिन हर राज्य में उसकी सरकार हो। विपक्ष का पूरी तरह से खात्मा भाजपा का बड़ा सपना है।

खैर अभी हाल ही में एक वक्त ऐसा भी था जब देश के 29 में से 20 राज्यों में बीजेपी का प्रत्यक्ष या परोक्ष शासन था। लेकिन अब यह 17 राज्यों में सिमट गया है। (16 राज्य थे एक जबरन छीना गया यानी महाराष्ट्र है।)

बीजेपी की यही कोशिश झारखंड में चल रही है और कुछ-कुछ कोशिशें छत्तीसगढ़ में भी हो रही हैं।

लेकिन इन कोशिशों के बीच बिहार हाथ से निकलने की तैयारी कर रहा है। यही वजह है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह पटना में डेरा जमाए हुए हैं। बिहार में लगभग 1 महीने से चल रही उठापटक अब अपने अंतिम चरण पर है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नड्डा और शाह से दूरी बना ली है। वहीं जेडीयू और आरजेडी के बीच की दूरी थोड़ी कम होती दिखाई दे रही है। दोनों ही पार्टियों के नेता सिर्फ बीजेपी पर हमलवार हैं लेकिन एक दूसरे के खिलाफ बयान बाजी करने से बच रहे हैं।

बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बिहार दौरे पर हैं। राजधानी पटना में बीजेपी के सभी सात मोर्चों की संयुक्त कार्यसमिति की बैठक हो रही है। इस बैठक में शिरकत करने के लिए जेपी नड्डा शनिवार को पटना पहुंचे। समापन समारोह में शिरकत करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह रविवार को पटना आएंगे। ऐसे में बीजेपी ने देश भर के नेतआों का जुटान पटना में कर रखा है। इधर, पार्टी के नेताओं ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि बीजेपी बिहार में 200 सीटों पर चुनाव की तैयारी करेगी। ऐसे में जेडीयू ने भी बयानबाजी करनी शुरू कर दी है।

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी शनिवार को खुला ऐलान कर दिया कि उनकी भी पार्टी सभी 243 सीटों पर तैयारी कर रही है। ललन सिंह ने कहा कि बीजेपी चाहे तो 200 क्या सभी सीटों पर तैयारी कर सकती है। उन्होंने कहा कि सभी दल तैयारी करने को स्वतंत्र हैं। वहीं जब ललन सिंह से जब बीजेपी और जेडीयू के रिश्तों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती को किसी तराजू पर तौला नहीं जा सकता है।

बता दें कि बिहार की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से अंदर ही अंदर काफी कुछ पक रहा है। पिछले कुछ समय से सरकार में शामिल बीजेपी और जेडीयू के नेताओं के बीच कई मौकों पर जुबानी जंग सामने आ रही है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों के बीच भी खिचड़ी पक रही है। इसी क्रम में जून में बिहार में बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया था असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 5 में से 4 विधायक राजद में शामिल हो गए थे। ऐसे में सदन में पार्टियों का समीकरण बदल चुका है। दूसरी ओर बीजेपी और जेडीयू के नेताओं के बीच चल रही अंतर्कलह भी जगजाहिर है। तो सवाल ये है​ कि कुछेक ऐसे समीकरण और बने तो क्या सत्ता भी बदल जाएगी?

कहना गलत नहीं होगा, लेकिन मजबूरी के गठबंधन से नीतीश कुमार भी परेशान नजर आ रहे हैं। और इसका वर्णन जेडीयू के नेता मंच से या दबी जुबान से करते आ रहे हैं।

बता दें कि वर्ष 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बन के उभरी थी, लेकिन बावजूद इसके सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाई।

बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। जिसमें भाजपा गठबंधन यानी एनडीए के पास कुल 126 विधायकों हैं। जिसमें भाजपा के पास 77, जेडीयू के पास 45, हम के कुल 4 विधायक। लेकिन हम के जीतन राम मांझी भी भाजपा के ऊपर हमलावर होते रहते हैं। अब ऐसे में 4 विधायक हम के अलग हो जाते हैं तो भाजपा गठबंधन खतरे के निशान पर होगा। अब ऐसे में कोई भी विधायक भाजपा से गठबंधन से अलग हुआ तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

अगर हम आपको बिहार की राजनीति को थोड़ा विस्तार से बताएं तो विधानसभा में आरजेडी के 80 (जिसमें 76 आरजेडी के और 4 MIM के) विधायक हो गए हैं। कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के 16 मिलाकर, महागठबंधन के पास कुल 115 सीटें हो गई हैं। वहीं बीजेपी के 77 (जिसमें बीजेपी के 73 और 3 VIP के) जेडीयू 45 और हम के 4 विधायकों को मिलाकर एनडीए के पास अब 126 विधायक हैं। यानी उसके पास 122 के जादुई आंकड़े से 4 सीटें ज्यादा है। महागठबंधन जादुई आंकड़े से दूर महज 7 सीटें दूर है।
भाजपा नहीं चाहती कि बिहार की सत्ता उसके हाथ से खिसके। लेकिन जेडीयू की नाराजगी कहीं न कहीं इस खाई को और गहरी कर रही है।

आरजेडी को सरकार बनाने के लिए एनडीए के खेमे से कम से कम 7 विधायक तोड़ने होंगे। एनडीए से 7 विधायक कम हो जाएं तो उनके पास 119 सीटें बचेंगी और एक निर्दलीय को साथ लेकर भी वह जादुई आंकड़े से दूर रह जाएगी।

खैर समीकरण तो बहुत कुछ कहते हैं। अब देखना यह है कि मजबूरी का गठबंधन अपने कार्यकाल को ऐसे ही पूरा कर पाता है या नीतीश कुमार अपनी की गई भूल को सुधारना चाहते हैं। वो भूल क्या है यह हमें बताने की जरूरत नहीं है।

ब्यूरो रिपोर्ट : मनीष कुमार अंकुर, पटना


Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Check Also

रायबरेली में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का पैतृक घर बदहाल, उपेक्षा से मिट रही हिंदी साहित्य की विरासत

रायबरेली में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का पैतृक घर बदहाल, उपेक्षा से मिट रही हिंदी साहित्य की विरासत

Leave a Reply

Discover more from Khabar 24 Express Indias Leading News Network, Khabar 24 Express Live TV shows, Latest News, Breaking News in Hindi, Daily News, News Headlines

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading