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बालिका दिवस पर कविता – National Girl Child Day Poem in Hindi 2021

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2021 राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रत्येक साल 24 जनवरी को मनाया जाता है।इसी दिन श्रीमती इंदिरा गाँधी जी पहली बार प्रधानमंत्री पद को ग्रहण पर बैठी थी।इसी दिन के स्मरण में भारत देश हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस बड़े ही उत्साह पूर्वक मानते है।राष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन हमें लड़का-लड़की में भेद नहीं करने व समाज के लोगों को लिंग समानता के बारे में जागरूक करने की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए।साथ ही देश मे कन्या भ्रूण हत्या के कारण से लड़कियों के अनुपात में बहुत कमी आयी है। पूरे भारत देश में लिंगानुपात लगभग 933:1000 है।ओर इसी “बालिका दिवस पर अपनी कविता, National Girls Child Day Poem in Hindi 2021” के माध्यम से उन सभी बेटियों को ये ज्ञानसन्देश देता हूं की वे अपनी आत्मशक्ति कुंडलिनी जाग्रत करें ओर अपनी स्वतंत्र पहचान अपनी खोजो से बनाये।

इस दिवस पर बालिकाओं का स्वास्थ्य के साथ पोषण व पढ़ाई जैसी आवश्यक तथ्यों पर ध्यान दिए जाने की बहुत आवश्यकता है।जिससे वे बड़ी होकर अपने शारीरिक,आर्थिक,मानसिक व सामाजिक स्तर पर भावनात्मक रूप से आत्मनिर्भर व सक्षम बन सम्पन्न हो सकें।
भारत सरकार में समय समय पर किशोरियों व बालिकाओं के कल्याण के लिए ‘समग्र बाल विकास सेवा’, ‘धनलक्ष्मी’ जैसी अनेक योजनाएँ चलाई हैं।अभी लागू हुई ‘सबला योजना’ जो किशोरियों के वर्तमान व भविष्य के सशक्तीकरण के लिए समर्पित है। इन सबका उद्देश्य लड़कियों, विशेष कर किशोरियों को सशक्त बनाना है।जिससे कि वे आगे चलकर एक बौद्धिक शारारिक व भौतिक उन्नतिपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
इसी सब पर स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी की ज्ञानवर्द्धक प्रेरक कविता इस प्रकार से है कि,
राष्टीय बेटी दिवस 24 जनवरी पर ज्ञान कविता

जब मां प्रसव कर जी उठती है
तब एक किलकारी गूंज उठती है।
पता चलता है बेटी आयी
हर मुख चहरे पर टीस उठती है।।
जो मां बेटी रही है ख़ुद
वही सुन उदास हो खोती सुध।
ये भी वही सुनेगी ताने जमाने
जो मैने सुन सहे ह्रदय कर रुंध।।
फिर एक हाथ बढ़ता जाने किस
जो देख मुस्कान उस चहरे बेटी।
भूलने लगते उस चहकती बुलबुल
जो बढ़ती आंगन बाबुल बन जेटी।।
पढ़े चाहे कितना ऊंच स्तर
खेले चाहे कर रोशन घर देश।
पर फिर अपना उसका घर कौन
ये प्रश्न सदा रहता उस दिल शेष।।
पुरुषकार के ढेर लगा दे चाहे
ओर जोड़ दे चाहे कितने घर।
पहचान आज भी नहीं है अपनी
मोहर लगती किसी ओर के सर।।
बेटी दिवस आज भारत मनाता
इंदिरा जी की याद में।
आज दिवस वे प्रधानमंत्री बनी थी
पहली बेटी भारत आजाद में।।
प्रश्न उदय यहां ये होता है
वे किसकी बेटी किसकी बहु।
जन्मी ओर पद मिला पिता नेहरू
ओर नाम आगे जुड़ा गांधी बहु।।
ख़ुद का वजूद कहां सिद्ध होता
मैं ही हूँ सम्पूर्ण बेटी ओर नारी।
मुझसे जन्में दो बेटे जो
वे जाने जाये मुझ नामधारी।।
इस बेटी से भी चला वंश है
इंदिरा नहीं गांधी पिता ले नाम।
तब कहां है बेटी और कीर्ति
कहां शेष है इस नारी नाम।।
प्रसव ही प्रसव यहां जीवन
नारी से बेटी और बेटी से नारी।
आंगन कभी खुला नहीं मिलता
मिलता तो और के बन आभारी।।
कब तक ऐसा चलेगा बेटी?
कोई और श्रेय नहीं दे तुझ आँचल।
बस तू ही बीज ले सर्व जननी हो
अंश से वंश तुंझ हो सर्व आंचल।।
आज जो स्वतंत्रता नियम तू जीती
वो भी तुंझे पुरुष की देन।
क्रांति से शांति और देवित्त्व तक
पुरुष ही दाता नारी अधिकार की देन।।
वही दोहरा रही जो पुरुष कर चुका
कुछ नया कर केवल हो जो तुंझ।
जगा अपनी आत्मा और स्व कुंडलिनी
अपनी ही शक्ति के बल आत्म सुझ।।
रेहि क्रिया योग अपना कर
अपनी आत्मा का मंत्र जप।
मैं हूँ सदा सम्पूर्ण ओर जनु मैं
अहम सत्यास्मि आत्मघोष कर जप।।
बेटी से ले दिवस नारी सब
स्वयं मनाओ उत्साह ले मान।
प्रचारित करो स्वं कर गर्वित
नारा लगाओ नारी हो अभिमान।।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
Www.satysmeemission.org


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