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आरक्षण के विरोध में आज स्वर्णों द्वारा भारत बंद के दौरान दलितों के खिलाफ उतरे लोग, बिहार, यूपी में उत्पात, देश के कई हिस्सों में धारा 144 लागू

ऊपर की तस्वीरें 10 अप्रैल की बिहार से हैं, बाकी की सोशल मीडिया पर फैल रहे ज़हर की हैं।

 

2 अप्रैल को एससी-एसटी एक्ट को लेकर जिस तरह देशभर में हिंसा हुई वह अभी तक रुकने का नाम नहीं ले रही है। 2 अप्रैल को कई दलितों की गोली लगने से मौत हुई थी। कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल के बाद पुलिस जांच में कई ऊँची जाति के लोगों का नाम सामने आये। इसमें कई लोगों को पकड़ा जा चूका है और कई लोग अब भी फरार बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले एमपी, यूपी और राजस्थान से आये। अभी 4 दिन पहले मेरठ में भी एक दलित युवक की हत्या कर दी गयी।

जिस युवक की हत्या हुई उसका नाम गोपी पेरिया था, इस युवक ने सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट पर फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया था। लेकिन तीन दिन बाद युवक की हत्या कर दी गयी। पुलिस के मुताबिक बदमाशों ने उसे पांच गोलियां मारी थीं। युवक के पिता बसपा नेता हैं। पिता ताराचंद की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों में शोभापुर निवासी मनोज गुज्जर, आशीष गुज्जर, कपिल राणा और गिरधारी का नाम शामिल है। सभी पर भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की धारा 302, 504 , 506 और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

गोपी के पिता ताराचंद और भाई प्रशांत ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई किसी लिस्ट जिक्र कर रहे थे जो 2 अप्रैल के दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों के नाम इस लिस्ट में थे। कुछ दलित युवक लिस्ट में अपना नाम देखकर भाग गए थे। मगर गोपी अपने गांव में रहा। गांव में रहने की कीमत गोपी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। प्रशांत ने कहा कि यह पता नहीं है कि बंद के दौरान प्रदर्शन करने वालों की लिस्ट किसने बनाई, पहले हमने सोचा कि यह पुलिस की लिस्ट है मगर पता करने पर पुलिस ने इन्कार कर दिया।
पुलिस को दी तहरीर में मृतक के पिता ताराचंद ने कहा कि घटनास्थल पर मनोज, आशीष और कपिल अपने दो अन्य साथियों सुनील तथा अनिल के साथ मौजूद थे। मनोज ने सबसे पहले गोपी के सीने में गोली मारी, फिर कपिल और आशीष ने गोली मारी। एक गोली सीने में, दो तीन गोलियां पीछे और पांचवीं गोली उसके हाथ में लगी। ताराचंद के मुताबिक मरने से छह घंटे पहले बेटे गोपी ने कहा था कि आरोपियों ने उसे जाति के नाम पर भद्दी-भद्दी गालियां दीं और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर फिर कहा कि तू बड़ा नेता बनता है। तुझे छोड़ेंगे नहीं।

यह पहली घटना नहीं है बल्कि एमपी, राजस्थान से भी ऐसी ही घटनाएं सुनने को आ रही हैं। राजस्थान से एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ युवक एक दलित युवक को लाठी डंडों से मार रहे हैं और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एमपी में भीड़ पर गोली चलाते राजा चौहान नामक युवक का वीडियो भी खूब वायरल हुआ जिसे बाद में पुलिस ने पकड़ लिया। इसकी गोली से एक मजदूर की मौत हुई जो अपने परिवार को चलाने वाला गरीब मजदूर था।

5 अप्रैल को मुंबई में भाजपा के स्थापना दिवस के कार्यक्रम के मौके पर अमित शाह ने भरी सभा में कहा था कि न तो उनकी सरकार आरक्षण विरोधी है, न ही वो आरक्षण को हटाने की बात करते हैं और वो आरक्षण को किसी भी कीमत पर हटाने नहीं देंगें। लेकिन अमित शाह दलितों पर हो रही खुलेआम हिंसा के खिलाफ एक शब्द न बोले। दलितों के खिलाफ जो हिंसा हो रही है, हिंसा करने वालों में सबसे ज्यादा नाम उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं का आ रहा है।
और आज 10 अप्रैल आरक्षण के विरोध भारत बंद के सबसे ज्यादा समर्थक भाजपा से ही हैं और भाजपा कार्यकर्ता इस बन्द का समर्थन कर रहे हैं।
बिहार से रेल रोकने और आगजनी की खबरें भी आ रही हैं। वहीं एमपी, राजस्थान और यूपी के कुछ हिस्सों में धारा 144 लागू कर दी गयी है। लेकिन बाबजूद इसके कई जगह पर भीड़ अपना हिंसक रूप दिखाती नज़र आ रही है।

 

सोशल मीडिया के जरिये विभिन्न संगठनों द्वारा आज बुलाए गए भारत बंद का असर देशभर में दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश के भिंड और मुरैना में प्रदर्शनकारियों के विरोध की वजह से कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं बिहार के आरा में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी है।

चौतरफा विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क कर दिया है। गृह मंत्रालय ने राज्यों को जारी एडवाइजरी में बंद के दौरान सुरक्षा कड़ी करने और हिंसा रोकने के निर्देश दिए हैं। मालूम हो कि एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव के विरोध में हुए भारत बंद के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी। अब आरक्षण के विरोध में कई संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है।

जातिगत आरक्षण के मुद्दे पर विरोध की वजह से मध्यप्रदेश के भिंड और मुरैना में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

बिहार के आरा में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी है। जातिगत आरक्षण, वेरोजगारी और शिक्षा के मुद्दे पर ये लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

गौरतलब है कि किसी बड़े संगठन या दल ने भारत बंद की घोषणा नहीं की है, ऐसे में सोशल मीडिया के जरिये छोटे-छोटे संगठनों द्वारा शरारत किए जाने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। अब आरक्षण के विरोध में कई अचर्चित संगठनों ने भी भारत बंद का आह्वान किया है। इसके लिए भी सोशल मीडिया की मदद ली जा रही है।

गृह मंत्रालय ने राज्यों को सोशल मीडिया और कानून व्यवस्था पर खास निगाह रखने की सलाह दी है। राज्यों को सोशल मीडिया के जरिए बीते दो अप्रैल के भारत बंद की तरह ही इस बार भी हिंसा की साजिश रचने के प्रति आगाह भी किया है।

बीते 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ भारत बंद के दौरान देशभर में हिंसा हुई थी करीब 12 लोगों को जान तक गंवानी पड़ी थी। 10 अप्रैल को आयोजित बंद में फिर से हिंसा न फैले इसलिए गृहमंत्रालय दिशा निर्देश जारी किए हैं।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पुलिस और प्रशासन ने अलर्ट जारी कर धारा 144 लागू कर दी है। वहीं, मध्यप्रदेश में भी स्कूल कॉलेज की छुट्टी कर दी गई है जबकि कई शहरों में इंटरनेट की सुविधा भी मंगलवार तक के लिए बंद कर दी गई है।

भोपाल के कमिश्नर अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कहा है कि भोपाल में धारा 144 लागू की जाएगी वहीं स्कूल खुले रहेंगे। किसी भी हिंसा से निपटने के लिए भारी मात्रा में पुलिस फोर्स लगाई गई है। वहीं सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।

2 अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान सबसे ज्यादा तबाही मध्यप्रदेश में मची थी। जिसके बाद वहां काफी धड़पकड़ भी हुई है। यहां के ग्वालियर, भिंड और मुरैना में हुई हिंसक घटनाओं में 8 मौते हुईं थीं। आज आयोजित बंद में प्रशासन किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहता इसलिए उसने चाक चौबंद व्यवस्था कर ली है।

प्रशासन ने ग्वालियर, भिंड और मुरैना में प्रशासन ने स्कूल कॉलेजों को 10 अप्रैल को बंद करने का एलान किया है। यही नहीं भिंड में सोमवार रात से पूरे दिन कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया है। जबकि एमपी प्रशासन ने ग्वालियर में इंटरनेट सेवाएं रविवार रात 11 बजे से मंगलवार रात 10 बजे तक बंद रखने की बात कही है। जबकि मुरैना में भी सोमवार दोपहर 2 बजे से इंटरनेट सेवा बंद रहेगी।

 

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ख़बर 24 एक्सप्रेस

 

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