
किसानों की मौत और सरकार की किरकिरी। जिसकी वजह से डैमेज कंट्रोल में एमपी सरकार लग गयी है और एक जांच कमेटी बनाई गयी है जिसकी रिपोर्ट 3 महीने में सौंपी जाएगी। आपको बता दें कि जिन किसानों की पुलिस की गोली लगने से मौत हुई है उन्हें भाजपा के लोग किसान ही नहीं बता रहे थे इसके बाद सभी ने भाजपा और एमपी गवर्मेन्ट को अपने निशाने पर ले लिया और जमकर आलोचना की।
मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी से हुई 7 किसानों की मौत के बाद प्रदेश सरकार ने रिटायर जस्टिस जे के जैन के अंडर में एक समिति बनाई है। सरकार ने समिति को इस पूरे मामले में 3 माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।
लेकिन आपको बता दें कि एमपी सरकार 7 की जगह 5 किसान ही मान रही है जबकि 7 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। अब देखना यह है कि जांच कमेटी कितना निष्पक्ष होकर रिजल्ट देती है और दोषियों के खिलाफ़ करवाई करती है।
गौरतलब हो कि मंदसौर में किसान आंदोलन को लेकर बीते हफ्ते पुलिस फायरिंग में 7 किसानों की मौत हो गई थी। किसानों पर पुलिस ने उस वक्त फायरिंग जब वह अपनी 20 सूत्रीय मांगों के लिए उग्र प्रदर्शन कर रहे थे। किसानों की मांग में कर्ज माफी, गल्ला मंडियों पर उचित दर मिलना और सरकार द्वारा फसल न बिकने पर उचित समर्थन मूल्य दिया जाना शामिल था।
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