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पूर्णिमा देवी गायत्री मंत्र का रहस्य जानें: स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी ने बताया साधना का सरल मार्ग

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आध्यात्मिक जगत में इन दिनों पूर्णिमा साधना और देवी उपासना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसी क्रम में प्रसिद्ध संत स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी ने पूर्णिमा देवी गायत्री मंत्र का गूढ़ अर्थ, जप-विधि और साधना रहस्य विस्तार से बताया है। उनका कहना है कि यदि श्रद्धा और नियम के साथ यह मंत्र जपा जाए तो जीवन में मानसिक शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पूर्णिमा देवी गायत्री मंत्र

ॐ पूर्णिमायै विद्महे सिद्धिदात्र्यै धीमहि
तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

मंत्र का भावार्थ

ॐ – परम चेतना और दिव्य ऊर्जा का आह्वान।
पूर्णिमायै विद्महे – हम पूर्णिमा देवी के स्वरूप को जानें और समझें।
सिद्धिदात्र्यै धीमहि – जो समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं, उनका ध्यान करें।
तन्नो देवी प्रचोदयात् – वे देवी हमारी बुद्धि, मन और जीवन को प्रेरित करें।

स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी के अनुसार, यह मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं बल्कि चेतना जागरण का माध्यम है। पूर्णिमा की दिव्य ऊर्जा मन को स्थिर करती है और साधक को आंतरिक प्रकाश की अनुभूति कराती है।

मंत्र जप-विधि (संक्षेप में)

समय: पूर्णिमा तिथि विशेष फलदायी मानी गई है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त या रात्रि में भी जप शुभ रहता है।
माला: स्फटिक या चंद्रकांत मणि की माला उत्तम मानी जाती है।
जप संख्या: 108 बार या 21 माला।
आसन: श्वेत वस्त्र धारण कर उत्तर–पश्चिम दिशा (चंद्र दिशा) की ओर मुख करके बैठें।

साधना के विशेष फल

– मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति।
– स्वास्थ्य में सुधार और मनोबल में वृद्धि।
– साधना में स्थिरता और आत्मविश्वास का विकास।
– चंद्र दोष एवं मनोविकारों में शमन।

स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी का कहना है कि मंत्र जप करते समय श्रद्धा, पवित्रता और नियमितता अत्यंत आवश्यक है। बिना एकाग्रता के जप का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

पूर्णिमा देवी स्थान

पूर्णिमा देवी श्रीभगपीठ आश्रम, चांगोली गंग नहर, ककोड़, गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश (रजि.) में श्रद्धालु दर्शन और साधना हेतु पहुंच सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट:
www.satyasmeemission.org

अंत में स्वामी जी का संदेश —
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः 🙏


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