
ब्रिक्स में भारत की कूटनीतिक जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पूरे विश्व को ललकारा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व इस आतंकवाद से आहत है अब समय आ गया कि सब साथ आये और आतंकवाद के मुद्दे पर साथ मिलकर लड़ें।
पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए सभी ब्रिक्स देशों के साथ आने और मिलकर काम करने की जरूरत है।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक पटल पर ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे पर जोर देते हुए कहा कि यह बेहद जरूरी है। पीएम मोदी ने यह बातें चीन के शियामेन में ब्रिक्स सम्मेलन के आखिरी दिन ‘डायलॉग ऑफ इमरजिंग मार्केट एंड डेवलपिंग कंट्रीज’ नामक सत्र को संबोधित करते हुए कही।
सम्मेलन के आखिरी दिन पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि सभी ब्रिक्स देशों के लिए अगला दशक काफी अहम है। इसके साथ ही पीएम ने कहा कि दुनिया को और हरा-भरा बनाने के लिए हमें (ब्रिक्स देशों को) मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।
इस दौरान पीएम मोदी ने जिन मुद्दों पर फोकस किया उसमें साइबर साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और आपदा प्रबंधन भी शामिल था। उन्होंने कहा कि अगले दशक को स्वर्णिम बनाने के लिए इन मुद्दों पर गंभीर कदम उठाना बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने यह बातें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से ठीक पहले कही। ऐसा माना जा रहा है कि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच विवाद की वजह रहा डोकलाम मुद्दा इस वार्ता में उठ सकता है। हालांकि, पीएम मोदी और जिनपिंग सोमवार को आपसी सहयोग पर जोर देने की कह चुके हैं।
बता दें कि ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहली बार पाकिस्तान के आतंकी समूहों का नाम शामिल किया जाना भारतीय कूटनीति खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ी जीत है।
शिखर सम्मेलन में इस बार अपनी मेजबानी में ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद की चर्चा न कराने पर अड़े चीन को न सिर्फ इस पर चर्चा करानी पड़ी, बल्कि वह घोषणा पत्र में पाकिस्तान में फल फूल रहे आतंकी संगठनों लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तहरीक ए तालिबान और हिज्ब उत ताहिर का नाम भी शामिल कराने से भी नहीं रोक सका।
सबसे पहले गोल्डमैन सैश के एक अर्थशास्त्री ने 2001 में पश्चिमी देशों को चुनौती देने की क्षमता रखने वाले ब्राजील, रूस, भारत और चीन की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए ब्रिक्स शब्द का इस्तेमाल किया। इन चार देशों ने 2009 में रूस में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से इसके सदस्य देशों की संख्या पांच हो गई। इन देशों में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है, जबिक विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 22 फीसदी है। इन देशों की औसत आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से ज्यादा है।
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