
तानाशाह, शर्म, दुर्व्यवहार, विश्वासघात, ड्रामा, पाखंड, अक्षम, जुमलाजीवी, अंट-शंट, करप्ट, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना, निकम्मा जैसे शब्द अब लोकसभा और राज्यसभा में असंसदीय माने जाएंगे। बाल बुद्धि, जयचंद, शकुनि, लॉलीपॉप, चांडाल चौकड़ी, गुल खिलाए, पिट्ठू कोविड स्प्रेडर, स्नूपगेट, तानाशाही, विनाश पुरुष, बॉबकट जैसे शब्दों को भी अब दोनों सदनों में इस्तेमाल अमर्यादित माना जाएगा।

18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा सचिवालय ने एक सूची जारी की है। इस सूची में उन शब्दों और भावों को बताया गया है जिन्हें लोकसभा और राज्यसभा में असंसदीय माना जाएगा। यानी, अगर ये संसद में बोले गए तो उसे संसद की कार्यवाही से हटाया जा सकता है। शब्द ही नहीं कई आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले मुहावरों को भी असंसदीय सूची में डाला गया है।
आखिर, किन शब्दों पर लगी रोक? वो कौन से मुहावरे हैं जिन्हें असंसदीय शब्दों की सूची में शामिल किया गया है? विपक्ष का इस सूची पर क्या कहना है? राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे कांग्रेस शासित राज्यों की विधानसभा का इस विवाद में क्यों जिक्र हो रहा है? हर साल जारी होने वाली लिस्ट में अब बवाल क्यों? आइये जानते हैं…

जुमलाजीवी, बाल बुद्धि, बहरी सरकार, उचक्के, अहंकार, काला दिन, गुंडागर्दी, शर्मिंदा, गिरगिट, चमचा, दलाल, गुलछर्रा, गुल खिलाना, गुंडों की सरकार, दोहरा चरित्र, चौकड़ी, तड़ीपार, तलवे चाटना, तानाशाह, दादागिरी, दंगा, गद्दार, अपमान, काला बाजारी जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी संसद में बहस के दौरान कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाएगा। अब्यूज्ड, ब्रिट्रेड, करप्ट, ड्रामा, हिपोक्रेसी और इनकॉम्पिटेंट, कोविड स्प्रेडर और स्नूपगेट जैसे अंग्रेजी शब्द भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं होंगे।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, हाथी के दांत, घड़ियाली आंसू, चोर-चोर मौसेरे भाई, ठेंगा दिखाना, तलवे चाटना, मिर्ची लगना, कांव-कांव करना जैसे मुहावरे भी असंसदीय शब्दों की सूची में शामिल हैं।
विपक्ष ने इस सूची की आलोचना शुरू कर दी है। विपक्ष इसे नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विपक्ष को चुप कराने की कोशिश करार दे रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री के सरकार संचालन के तरीके को बताने वाले शब्दों अब असवैंधानिक करार दे दिया गया है।
वहीं, टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रयान ने ट्वीट करके लिखा कि अब हमें अशेम्ड, अब्यूज्ड, बिट्रेड, भ्रष्ट, हिपोक्रेसी, इनकॉम्पिटेंट जैसे आम बोलचाल के शब्दों का इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। लेकिन, मैं इन सभी शब्दों का इस्तेमाल करता रहूंगा। मुझे निलंबित करिए। लोकतंत्र के लिए संघर्ष।
राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नई सूची पर लिखा है, “मोदी सरकार की सच्चाई दिखाने के लिए विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी शब्द अब असंसदीय माने जाएंगे. अब आगे क्या विषगुरु?”
इस संकलन में ऐसे शब्दों या वाक्यों को शामिल किया गया है, जिन्हें लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधानमंडलों में वर्ष 2021 में विलोपित किया गया था। अध्यक्ष व सभापति पीठ पर आरोप को लेकर भी कई वाक्यों को असंसदीय श्रेणी में रखा गया है। इसमें आप मेरा समय खराब कर रहे हैं, आप हम लोगों का गला घोंट दीजिए, चेयर को कमजोर कर दिया है और यह चेयर अपने सदस्यों का संरक्षण नहीं कर पा रही है, आदि शामिल हैं।
अगर कोई सदस्य पीठ पर आक्षेप करते हुए यह कहता है कि जब आप इस तरह से चिल्ला कर वेल में जाते थे, उस वक्त को याद करूं या आज जब आप इस आसन पर बैठें हैं तो इस वक्त को याद करूं… तब ऐसी बातों को असंसदीय मानते हुए इन्हें रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
जिन शब्दों असंसदीय शब्दों की सूची में डाला गया है, उनमें लोकसभा, राज्यसभा के साथ राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही से हटाए गए शब्द शामिल हैं। इस सूची में राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही से हटाए गए शब्द भी शामिल हैं।
इन दोनों राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही से हटाए गए शब्दों में अंट-शंट, अनपढ़, अनर्गल, अनार्किस्ट, उचक्के, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, औकात, कांव-कांव करना, गिरगिट, गुलछर्रा, घड़ियाली आंसू, घास छीलना, चोर-चोर मौसेरे भाई, ठग, ठगना, ढिंढोरा पीटना, तड़ीपार, तलवे चाटना, धोखाधड़ी, नाटक जैसे शब्द शामिल हैं।
कोई भी सांसद सदन में जो कुछ कहता है वह संसद के नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। इस तरह के शब्दों की सूची के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि सांसद मानहानिकारक या अशोभनीय या असंसदीय शब्द का इस्तेमाल सदन में नहीं करें। लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन का नियम 380 कहता है कि अगर स्पीकर को लगता है कि बहस के दौरान इस्तेमाल किया गया कोई शब्द असंसदीय या अशोभनीय है तो स्पीकर चाहे तो उसे कार्यवाही से हटा सकता है।

अंग्रेजी, हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के हजारों शब्द असंसदीय शब्दों की सूची में शामिल हैं। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के ऊपर इन असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से बाहर करने की जिम्मेदारी होती है। उनकी मदद और रिफरेंस के लिए लोकसभा सचिवालय असंसदीय शब्दों की सूची किताब के रूप में प्रकाशित करता है। राज्यों की विधानसभाएं भी इसी किताब से संचालित होती हैं।
1999 में इस किताब का पहली बार प्रकाशन किया गया था। इस सूची में नए शब्दों को जोड़कर इसका प्रकाशन हर साल किया जाता है। नई सूची में 2021 में असंसदीय बताए गए शब्दों को शामिल किया गया है। 2022 में जिन शब्दों को सदन की कार्यवाही के दौरान असंसदीय बताए जाएंगे उन्हें जोड़कर 2023 में नई सूची प्रकाशित होगी।
सदन में बोलते वक्त सांसदों को विशेषाधिकार प्राप्त होता है। सदन में की गई किसी असंसदीय टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ किसी भी कोर्ट में केस नहीं हो सकता है। ये जरूर है कि सदन में बोले गए असंसदीय शब्दों को लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति सदन की कार्यवाही से विलोपित कर सकते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट : खबर 24 एक्सप्रेस, नई दिल्ली
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