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विश्व हैलो दिवस यानी नमस्कार दिवस ओर क्यों व कब से मनाया जाता है बता रहे है स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी

21 नवंबर 1973 में पहली बार विश्व हैलो दिवस यानी भारतीय भाषा मे नमस्कार दिवस मनाया गया था, जो अब 180 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है।वैसे सन 1973 में इजरायल और मिस्र के बीच बहुत लंबे समय से चला आ रहा युद्ध संघर्ष समाप्त होते ही जिस शब्द का सबसे पहले उपयोग किया गया था तो वो था हैलो।इसी सबको ध्यान में रखते हुए सारे विश्व में परस्पर शांति और मित्रता का प्रसार करने के लिए विश्व हैलो दिवस की मनाने की शुरुआत की गई।वैसे तो हैलो या नमस्कार या अन्य प्रचलित ऐसे परस्पर दोस्ती और विनम्रता को बढ़वा देने वाले शब्दों का सभी देशों में प्रान्तों में अपनी अपनी राष्टीय व लोकभाषा में अनादिकाल से प्रचलन चला आ रहा है,जिसमे थोड़ाबहुत ही बदलाव हुआ है, पर अंतर्राष्टीय भाषा के तौर पर अंग्रेजी भाषा का बहु प्रचलन होने से हैलो शब्द का उपयोग अत्याधिक होता है।यो इस दिवस को हैलो दिवस अधिक कहते है।

विश्व हैलो दिवस का महत्व जाने:-

विश्व हैलो दिवस या नमस्कार दिवस लोगों को एक-दूसरे के साथ अपनी लोक संस्कृतियों के बारे में जानकारी का आदान प्रदान करना,पार्टियों में व जन समूह यानी भीड़ के बीच में भी एक दूसरे से मेलजोल बढ़ाने और एक-दूसरे से बातचीत करने को पहल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह अंतर्राष्टीय हैलो दिवस यह जन संदेश देता है कि परस्पर व्यक्तिगत मेल मिलाप का एक शाब्दिक संचार किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए कितनी विशेषता रखता है।जैसे कि एक दूजे के प्रति निम्नता रखने का अंहकार, घमंड, शर्म, श्रेष्ठता, उच्चता, हीनता जैसी अनेक असामाजिकता व्यक्ति को एक-दूसरे से संवाद करने से रोकती है,जबकि हैलो या नमस्कार शब्द परस्पर अभिवादन करने के साथ-साथ बातचीत को प्रारम्भ करने में सहज बनाने में मदद करता है।

विश्व हैलो दिवस या नमस्कार दिवस का कोई भी सामान्य व्यक्ति हिस्सा बन सकता है।बस इस दिवस को सेलिब्रेट करने के लिए केवल 10 परिचित या अपरिचित लोगों को विश्व हैलो दिवस यानी नमस्कार दिवस की शुभकामनाएं भेजनी है।इस दिन का उद्धेश्य लोगों के बीच व्यक्तिगत संवाद विकसित करने की एक बहुत सराहनीय कोशिश है, जो रोजमर्रा के जीवन में आपसी संवाद की कीमत को बताता है।
इस हैलो दिवस यानी नमस्कार दिवस पर मेरी कविता इन दोनों शब्दो के अर्थ और उसके उपयोगिता को बताती कविता इस प्रकार से यूँ लिखी है कि,,

नमस्कार कविता

दोनों हाथ जोड़ ह्रदय तक
चहरे रख मुस्कान।
नमस्कार शब्द एक मीठा बोले
इस विनम्रता दे संग मिले सम्मान।।
हैलो का अर्थ है हाँ जी
इसमें नमन भाव अभाव।
केवल जुड़ाव ओर उपस्थिति
बताता सज्जन है स्वभाव।।
नमस्कार हैलो से ऊर्ध्व
इसमें दोनों हाथ की मुद्रा एक।
समानतावाद हटा सम्मानता देना
नमस्कार उद्धभव है एक बन बनना नेक।।
नमस्कार टूटे दिल जोड़े
नमस्कार मुड़े मुख मोड।
नमस्कार विनम्रता बल देता
नमस्कार दुख बदले सुख छोड़े।।
नमस्कार ईश्वर सदा करना
नमस्कार मात पिता करना।
नमस्कार गुरु करो अवश्य
नमस्कार खोले ह्रदय प्रेम झरना।।
बड़ों से नमस्कार हित देता
तुम्हें देख छोटे भी सीखें।
नमस्कार मिटाये व्यंग की पीड़ा
ये मीठे वचन बोल बिन तीखे।।
नमस्कार मुस्कान सहित हो
भरपूर आशीष हर से पाओ।
भूलते जा रहे नमस्कार करना
करो नमस्कार ओर सिखाओ।
आओ आज संदेश लिख मित्रों को
प्रेम संबोधन नमस्कार दिवस मनाओ।।

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
स्वामी सत्येन्द्र सत्यसाहिब जी
Www.satyasmeemission..org


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