एक ओर भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार है। यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है लेकिन बाबजूद इसके भारतीय विमानन कंपनियां अपनी अंतिम सांसे गिन रही हैं।
कड़ी प्रतिस्पर्धा, टिकट के दाम नहीं बढ़ाना और विमान ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि समेत विभिन्न कारकों के चलते घरेलू विमानन कंपनियों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
कम किराया, महंगा रखरखाव, महंगा ईंधन विमानन कंपनियों के लिये घाटे का सौदा साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2018 के समाप्त तिमाही में भारतीय विमानन कंपनियों एयर इंडिया समेत इंडिगो, स्पाइसजेट और जेट एयरवेज को बड़ा नुकसान हुआ था।
भारतीय सरकार भले हवाई यात्रा को सुगम बनाने के लिए अनेकों दावे कर रही हो, नए एयरपोर्ट्स बनाने की सोच रही हो। अच्छी सुविधायें देने के नाम पर खूब पैसा बहा रही हो। लेकिन विमानन कम्पनियां दिवालिया होने के कगार पर हैं। खुद सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया दम तोड़ रही हैं।
सरकार की बेरुखी से विमानन कंपनियां बदहाल हैं। पहले किंगफिशर बर्बाद हुई अब जेट एयरवेज, स्पाइस जेट और इंडिगो बर्बादी की कगार पर हैं।
जेट के पायलटों ने तो हवाईजहाज न उड़ाने तक की धमकी दे डाली है।
जेट एयरवेज के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां इंजीनियर्स ने सुबह के वक्त उड़ान में जोखिम होने की बात कही थी, वहीं शाम को पायलटों ने भी सैलरी का भुगतान न होने पर 1 अप्रैल से सभी उड़ानों को बंद करने की धमकी दे दी है। वहीं डीजीसीए ने कहा है कि कंपनी के केवल 41 विमान ही इस वक्त उड़ रहे हैं।
जेट एयरवेज के पायलटों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 31 मार्च तक समाधान प्रक्रिया पूरी नहीं हुई और वेतन भुगतान में देरी हुई तो एक अप्रैल से वह विमान उड़ाना बंद कर देंगे।
डीजीसीए ने कहा इस समय केवल 41 विमान ही परिचालन के लिये उपलब्ध हैं जबकि एयरलाइन के पास कुल 119 विमान हैं। जेट एयरवेज की स्थिति तेजी से बदल रही है, आने वाले सप्ताहों में और उड़ाने निरस्त हो सकतीं हैं।
जेट एयरवेज संकट के समाधान के लिए नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने आपात बैठक बुलाई है। उन्होंने अपने मंत्रालय के सचिव को दिए निर्देश में कहा, जेट एयरवेज की उड़ानें रद्द होने से एडवांस बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और सुरक्षा कारणों के मुद्दे को लेकर आपात बैठक होगी। उन्होंने अपने सचिव से जेट एयरवेज मुद्दे से जुड़ी सभी जानकारियां भी तलब की हैं।
जेट एयरवेज के इंजीनियरों ने डीजीसीए को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें वेतन नहीं मिल रहा जिससे मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। यह स्थिति उड़ान की सुरक्षा के लिए जोखिम है। कंपनी के एयरक्राफ्ट मेंनटेनेंस इंजीनियर्स एसोसिएशन ने डीजीसीए से तीन महीने का बकाया वेतन दिलाने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की है। कंपनी में अभी 560 इंजीनियर्स हैं, जो 100 से ज्यादा विमानों का रखरखाव देखते हैं।
अब ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब विमानन कंपनियां दिवालिया होकर हवाई जहाजों को एयरपोर्ट पर ही खड़ा कर देंगी।
फ्लाइट्स कैंसल होने शुरू हो गए हैं। कुछ एयरलाइन्स ने बेहताशा किराए में वृद्धि करनी शुरू कर दी है। दोनों ही कंडीशन में परेशानी आम यात्रियों को ही होगी।
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