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“भारत के सबसे बड़े सम्मानित पुरस्कारों में एक” को गीता मेहता ने लेने से क्यों मना किया? यहां जाने वो बड़ी वजह

भारत के सबसे बड़े सम्मानित पद्म पुरस्कार, लेकिन इन्होंने लेने से किया इनकार और मना करने के पीछे बताई यह बड़ी वजह।

भारत के सबसे बड़े सम्मानित पद्म पुरस्कार जिन्हें हर कोई पाना चाहता है, चाहे वे किसी भी क्षेत्र से जुड़कर भारत के नाम को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हों। और शायद ही कोई हो जो इन पुरस्कारों को पाने की इच्छा न रखता हो।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने 112 पद्म पुरस्कारों का एलान किया था। इसमें जानी-मानी लेखिका गीता मेहता का भी नाम शामिल है। लेकिन लेखिका ने पद्मश्री सम्मान लेने से इनकार कर दिया। इनकार करने के पीछे उन्होंने यह बड़ी वजह बताई।

वजह बताने से पहले आपको गीता मेहता के बारे में कुछ बता दें।
गीता मेहता ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बड़ी बहन हैं।
मेहता ने 1979 में कर्म कोला, 1989 में राज, 1993 में ए रिवर सूत्र, 1997 में स्नेक्स एंड लैडर्स: ग्लिम्पसिस ऑफ मॉडर्न इंडिया और 2006 में इटरनल गणेश: फ्रॉम बर्थ टू रीबर्थ जैसी किताबें लिखी हैं। उन्होंने 14 डॉक्यूमेंट्रियों का निर्माण और निर्देशन भी किया है।
एक बड़े टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेखिका और उनके पति से 90 मिनट बातचीत की थी।

“अब इतनी लंबी बातचीत का क्या मतलब हो सकता है वो आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं। पीएम मोदी बड़े राजनेता हैं और वो राजनीति में बड़े चतुर और धुरंधर माने जाते हैं।”

खैर बात गीता मेहता की हो रही थीं तो अभी राजनीति को थोड़ा साइड कर अब गीता मेहता के विषय पर आ जाते हैं।
आपको बता दें कि गीता मेहता को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र श्रेणी में इस सम्मान के लिए चुना गया था। गृह मंत्रालय के प्रेस नोट में उन्हें विदेशी के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। जबकि गीता मेहता भारतीय हैं और उनके पास भारत का पासपोर्ट है।

“खैर, ऐसी छोटी मोटी गलती सरकार से हो जाया करती हैं, भारत सरकार ने कुछ सोच समझकर ही उन्हें विदेशी नागरिक की कैटेगरी में डाला होगा। महरूम कादर खान को भी भारत सरकार ने कनाडा का नागरिक ही माना है।”

न्यूयॉर्क से जारी किए प्रेस बयान में उन्होंने कहा, ‘मैं भारत सरकार की बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझे पद्मश्री के लायक समझा लेकिन बड़े अफसोस के साथ मुझे लगता है कि मुझे इसे अस्वीकार करना चाहिए क्योंकि आम चुनाव आने वाले हैं और ऐसे में अवॉर्ड को गलत समझा जा सकता है। जिससे कि सरकार और मुझे शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है और मुझे इसका पछतावा होगा।

गीता ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बड़ी बहन हैं। मेहता ने 1979 में कर्म कोला, 1989 में राज, 1993 में ए रिवर सूत्र, 1997 में स्नेक्स एंड लैडर्स: ग्लिम्पसिस ऑफ मॉडर्न इंडिया और 2006 में इटरनल गणेश: फ्रॉम बर्थ टू रीबर्थ जैसी किताबों को लिखा है। उन्होंने 14 डॉक्यूमेंट्रियों का निर्माण या निर्देशन भी किया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेखिका और उनके पति से 90 मिनट बातचीत की थी।

76 साल की मेहता ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और उनकी पत्नी ज्ञान पटनायक के तीन बच्चों (प्रेम, गीता और नवीन) में एक हैं। उन्होंने पब्लिशिंग हाउस अल्फ्रेड ए-नोफ के मुखिया सोनी मेहता से शादी की है। शुक्रवार शाम को केंद्र ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अनुमोदन के बाद पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में उनके नाम की घोषणा की थी।

अब देखना है दिलचस्प रहेगा कि गीता मेहता के पुरस्कार न लेने पर क्या राजनीति होती है। क्योंकि भारत में छोटी से छोटी बात पर राजनीतिक रोटियां सेक ली जाती है।


मनीष कुमार “अंकुर”

manish@khabar24.co.in

+919654969006


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